मुरैना के मदरसों में बड़ी संख्या में हिंदू बच्चे, अन्य स्कूलों की तरह सभी विषयों की पढ़ाई
मुरैना के मदरसों में सरकारी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई. गणित, विज्ञान हिंदी सहित सारे विषयों की क्लास.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 5:44 PM IST
मुरैना : मुरैना में संचालित मदरसों में हिंदू समुदाय के बच्चे भी पढ़ाई कर रहे हैं. जिला शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है. अभिभावकों ने खुद अपनी मर्जी से बच्चों का यहां दाखिला कराया है. शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार "करीब 8 मदरसों में हिंदू बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन यहां उन्हें किसी प्रकार की धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा रही. इन मदरसों में गणित, विज्ञान के अलावा हिंदी विषय भी पढ़ाया जाता है. इन मदरसों में सरकारी पाठ्यपुस्तकों से पढ़ाई जारी है."
शिक्षा विभाग ने मांगी थी मदरसों से जानकारी
बीते साल सितंबर-अक्टूबर माह में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को पत्र लिखकर मदरसों में हिंदू बच्चों को धार्मिक शिक्षा दिए जाने की आशंका जताई थी. केंद्र सरकार ने इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुरैना जिले में संचालित सभी मदरसों की जानकारी मांगी और जांच के निर्देश शिक्षा विभाग को दिए.
केंद्र को जवाब देने के लिए जब शिक्षा विभाग ने जिले भर में जांच कराई तो सामने आया कि मुरैना जिले में कुल 55 मदरसे संचालित थे, जिनमें से 26 मदरसे सरकारी सहायता न मिलने के कारण बंद हो चुके हैं.
अंजुम इस्लामिया मदरसे में 110 हिंदू बच्चे
रिपोर्ट के अनुसार "मुरैना जिले में 29 मदरसे संचालित हैं. जांच में यह भी सामने आया कि इन 29 में से 8 मदरसों में मुस्लिम बच्चों के साथ हिंदू बच्चे भी पढ़ाई कर रहे हैं. इनमें कैलारस विकासखंड के 5 और अंबाह विकासखंड के 3 मदरसे शामिल हैं.
अंबाह तहसील के खड़ियाहर गांव में संचालित अंजुम इस्लामिया मदरसे में सबसे अधिक 110 हिंदू बच्चे अध्ययनरत हैं. वहीं, कैलारस के कृष्णा मार्ग स्थित गौसे आजम मदरसे में 85 हिंदू बच्चे पढ़ रहे हैं. अन्य मदरसों में कहीं 12, कहीं 5, कहीं 3 तो कहीं मात्र 2 हिंदू बच्चे दर्ज पाए गए हैं.
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जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच रिपोर्ट भेजी
इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी भगवान सिंह इंदौलिया का कहना है "पालकों की सहमति से बच्चों को मदरसों में पढ़ाया जा रहा है और उन्हें किसी धर्म विशेष की नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा दी जा रही है. जांच के दौरान ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि मदरसों में कोई गलत या धार्मिक पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा हो. जांच रिपोर्ट तैयार कर संबंधित दस्तावेजों के साथ भोपाल भेज दी गई है."

