चंबल नदी में खुशियों की बहार, देवरी घड़ियाल ईको सेंटर में अंडों से निकले 70 शावक
चंबल नदी के घाटों पर मिले घड़ियालों के 200 में से 70 अंडों से नन्हे शावक जन्मे. मुरैना से संवाददाता ओपी गोले की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 25, 2026 at 1:09 PM IST
मुरैना : चंबल नदी में इन दिनों खुशियां छाई हैं. वजह है नन्हे घड़ियाल, जिन्होंने देवरी घड़ियाल ईको सेंटर में घड़ियालों के बच्चों ने जन्म लेकर वन विभाग की उम्मीदों को नई उड़ान दी है. 200 अंडों में से अब तक 70 शावक सुरक्षित बाहर आ चुके हैं. दिलचस्प ये है कि कई शावकों ने तय समय से पहले ही अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी.
इसी माह मई में चंबल के अलग-अलग घाटों से अंडों को लाकर सेंटर में बेहद सावधानी से रखा गया. अब विशेषज्ञों की निगरानी में इन नन्हे जलीय जीवों की परवरिश की जा रही है.
120 सेमी लंबे होने पर नदी में छोड़े जाएंगे शावक
देवरी घड़ियाल ईको सेंटर में हैचिंग की प्रक्रिया जारी है. जब ये शावक 120 सेंटीमीटर लंबे हो जाएंगे, तब इन्हें फिर चंबल नदी की धाराओं में छोड़ दिया जाएगा. फिलहाल चंबल में घड़ियालों की संख्या 2938 तक पहुंच चुकी है. इसे चंबल संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है.
इसी साल 4 फरवरी से 16 फरवरी तक बॉम्बे नेशनल हिस्ट्री सोसाइटी, वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन ट्रस्ट, वाइल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और मध्यप्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश के 11 जलीय जीव विशेषज्ञों ने चंबल नदी का संयुक्त सर्वे किया था.

चंबल में फिलहाल 2938 घड़ियाल
सर्वे में चंबल में घड़ियालों की संख्या करीब 2938 दर्ज की गई, जो लगातार बढ़ती संरक्षण सफलता का संकेत है. वन विभाग ने मई में बरौली घाट और अंबाह क्षेत्र के कुथियाना घाट से 200 अंडे एकत्र कर देवरी ईको सेंटर की हैचरी में सुरक्षित रखा था. 23 मई से शुरू हुई हैचिंग प्रक्रिया में अब तक 70 शावक बाहर आ चुके हैं, जबकि बाकी अंडों से बच्चों के निकलने का इंतजार है.
विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ अंडे खराब भी हो सकते हैं. फिलहाल इन नन्हे घड़ियालों की देखभाल विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही है. करीब 3 साल तक पालन-पोषण के बाद जब इनकी लंबाई 120 सेंटीमीटर हो जाएगी, तब इन्हें दोबारा चंबल नदी में छोड़ा जाएगा. वन विभाग इसे चंबल के सुनहरे भविष्य की बड़ी उपलब्धि मान रहा है.

चंबल के इन घाटों पर अंडे देते हैं घड़ियाल
चम्बल घड़ियाल सेंचुरी के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया "मौसम तथा प्रकृति के अनुकूल वातावरण होने के कारण घड़ियाल सवलगढ़ के बरौली घाट और अम्बाह के कुथियाना घाट पर सबसे अधिक अंडे देते हैं. इस बार बरौली गाय से 105 तथा कुथियाना घाट से 96 अंडे कलेक्ट किये गए हैं. इन अंडों पर मार्किंग कर सुरक्षित रखवा दिया गया है. घड़ियालों के लिए चम्बल नदी में 435 किलो मीटर का एरिया सरंक्षित किया गया है."
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घड़ियालों की दुनिया बेहद रहस्यमयी
देवरी घड़ियाल ईको सेंटर की रिसर्च अधिकारी ज्योति डंडौतिया ने बताया "घड़ियालों की दुनिया बेहद रहस्यमयी होती है. जब मादा घड़ियाल अंडे देती है, तब शुरुआती अवस्था में किसी भी शावक का लिंग तय नहीं होता. घोंसले के भीतर का तापमान ही यह तय करता है कि अंडों से नर घड़ियाल निकलेंगे या मादा. जन्म के समय सभी शावक एक जैसे दिखाई देते हैं और उन्हें देखकर नर-मादा की पहचान संभव नहीं होती."
रिसर्च में यह रोचक तथ्य सामने आया है कि घोंसले की ऊपरी परत में अधिक तापमान पाने वाले अंडों से अधिकतर नर घड़ियाल जन्म लेते हैं, जबकि निचली परत के अपेक्षाकृत ठंडे अंडों से मादा घड़ियाल विकसित होती हैं. वैज्ञानिक अब भी उस सटीक तापमान की खोज में जुटे हैं.

