दिल्ली के विजय विहार में DDA के जर्जर फ्लैटों में रहने को लोग मजबूर, हर वक्त बड़े हादसे का रहता है डर
रिठाला के इन जर्जर फ्लैटों में रहने वाले लोगों का सवाल सीधा है कि आखिर उनकी जान की कीमत कब समझी जाएगी?

Published : September 1, 2026 at 7:23 PM IST
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की रिठाला विधानसभा में डीडीए के सिंगल स्टोरी फ्लैटों में रहने वाले लोगों की जिंदगी आज बदहाली और डर के साये में गुजर रही है. जर्जर हो चुके इन मकानों की हालत ऐसी है कि यहां रहने वाले लोगों को हर वक्त किसी बड़े हादसे का डर सताता रहता है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों और लिखित शिकायतें देने के बावजूद न तो प्रशासन उनकी सुध ले रहा है और न ही संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालात देखने को तैयार हैं. ये जर्जर इमारतें रिठाला इलाके में रहने वाले परिवारों की मजबूरी की कहानी बयां कर रही हैं. कहीं पानी की पाइपलाइन टूटी पड़ी है, तो कहीं मकानों की दीवारें लगातार झड़ रही हैं. कई जगहों पर लेंटर टूटने लगे हैं और बारिश के दौरान छतों से पानी टपकता है.
डीडीए फ्लैट की जर्जर हालात
लोगों का कहना है कि तेज बारिश और आंधी-तूफान के दौरान इन मकानों की बाहरी दीवारों पर लगे पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है. अगर कोई पत्थर नीचे गिरा तो इसकी चपेट में कोई बच्चा या राहगीर भी आ सकता है. यही नहीं, कई जगह बिजली की तारें भी टूटकर नीचे गिरी हुई हैं, जिससे करंट लगने का खतरा बना हुआ है. घरों के अंदर लगे लेंटर भी कमजोर हो चुके हैं. सोते वक्त भी उन्हें डर लगा रहता है कि कहीं छत या उसका कोई हिस्सा अचानक नीचे न गिर जाए.
कई बार अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी गई
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, उन्होंने कई बार नेताओं और संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. लोगों की मांग है कि डीडीए, एमसीडी और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मौके पर पहुंचकर मकानों का निरीक्षण करें और जल्द से जल्द मरम्मत या पुनर्वास की व्यवस्था की जाए.
कोई सटीक जवाब नहीं, सिर्फ आश्वासन मिला
स्थानीय निवासी सुनीता ने बताया कि जब हम झुग्गियों से पुनर्वास किया गया, तब से लेके आज तक कोई सुविधा हमें नहीं मिली. मकान टूट कर लेंटर गिर रहे है, छत टपकती है, हमने इस संबंध में अधिकारियों को शिकायत भी दी पर कोई सुनवाई नहीं नहीं हुई. इससे अच्छा तो हम अपनी झुगी में ही थे, कम से कम सुरक्षित तो थे.
वहीं, अशोक ने बताया कि पहाड़गंज से हमें जब यह पुनर्वास किया गया तब से आज तक सरकार ने ये नहीं देखा कि हम किन हालात में जी रहे हैं. दीवार टूटने लगी है. घरों के लेंटर टूटने लगे हैं, कई बार अधिकारियों ओर नेताओं से शिकायत की, पर कोई सटीक जवाब नहीं मिला, हमें सिर्फ आश्वासन मिला.
ये भी पढ़ें:

