यूपी में 74 साल में 4 गुना से अधिक बढ़े वोटर, SIR के बाद जानिए कैसे चेक करें ड्राफ्ट सूची में अपना नाम?
ETV Bharat के EXPLAINER में पढ़िए विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) की जरूरत क्यों पड़ी, ड्राफ्ट सूची क्या है और इससे क्या फायदे?

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 7:30 AM IST
|Updated : January 8, 2026 at 2:05 PM IST
हैदराबाद (ओम प्रकाश): वोट के अधिकार छीनने की आशंकाओं और उसको लेकर हो रही सियासत के बीच आखिरकार उत्तर प्रदेश में भी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण 2026 (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो गई है. 6 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) जारी कर दी है. हालांकि यह सूची अभी फाइनल नहीं है, क्योंकि चुनाव आयोग ने आपत्ति और दावे के लिए एक महीने का समय दिया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि एसआईआर की क्यों जरूरत पड़ी और किस जिले में कितने वोटर कम हुए. साथ ही आजादी के बाद से यूपी में वोटर कैसे घटते और बढ़ते रहे?
22 साल बाद एसआईआर प्रक्रिया: भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इसके पहले एसआईआर साल 2003 में हुआ था. लगभग 22 साल बाद उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण किया गया. उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर 2025 से आरंभ हुई थी, जो 4 दिसंबर को पूरा होना था और 11 दिसंबर को फाइनल सूची जारी होनी थी. लेकिन इस दौरान यूपी में जमकर बवाल और हंगामा होने लगा. इस दौरान काम के अधिक दबाव के कारण कई बीएलओ ने आत्महत्या कर ली और कई की हार्ट अटैक से मौत हो गई. वहीं, विपक्ष ने योगी सरकार पर कर्मचारियों का शोषण करने और दबाव बनाने का आरोप लगाया.

बढ़ते विरोध और विपक्ष की मांग चुनाव आयोग ने सुनीः यूपी पूर्व सीएम अखिलेश यादव, मायावती समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने बीलओ की मौत और एसआईआर प्रक्रिया की मोहलत बढ़ाने की जमकर वकालत की और जोरशोर से मांग की. इसके बाद चुनाव आयोग ने पहले 11 और फिर बाद में 26 दिसंबर 2025 तक की मोहलत दे दी थी. इसके बाद 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई है.

18.70 फीसदी मतदाताओं के नाम कटेः राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची में 15,44,30,092 (15.44 करोड़) मतदाता थे. एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 12,55,56,025 (81.30%) मतदाता ही बचे. ड्राफ्ट सूची में 28874067 (2.89 करोड़) यानि 18.70 फीसदी मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. इनमें मृतक 4623796 (2.99%) , अनुपस्थित 7952190 (5.15%), पूर्णरूप से स्थानंतरित 12977427 (8.40%), दो जगह नाम 2547207 (1.65%) और अन्य कारणों से 773402 (.50%) मतदाताओं के नाम कटे हैं.

लखनऊ में सबसे अधिक वोटरों के नाम कटे: ड्राफ्ट सूची के अनुसार, यूपी की राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक 30.04 फीसदी यानि 1200138 मतदाताओं के नाम कटे हैं. लखनऊ में 2794397 वोटर ड्राफ्ट सूची में वर्तमान में हैं. वहीं, सबसे कम महोबा में 9.95 फीसदी यानी 95447 मतदाताओं के नाम कम कटे हैं. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 573203 (18.18%), कानपुर में 902148 (25.50%), प्रयागराज में 1156305 (24.64 %), गौतमबुद्ध नगर में 403369 (15.14%), गाजियाबाद में 818139 (28.8%), मेरठ में 665635 (24.65 %), आगरा में 836943 (23.25%), अयोध्या में 337542 (17.69%) वोटरों के नाम लिस्ट से कटे हैं.

74 साल में 4 गुना से अधिक मतदाता बढ़े: गौरलतलब है कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में 1951 में विधानसभा चुनाव हुआ था. भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार, 1951 विधानसभा चुनाव में 3.17 करोड़ मतदाता थे. जबकि वर्तमान 6 जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट सूची में 12.5 करोड़ मतदाता हैं. यानि कि 74 साल में उत्तर प्रदेश में 4 गुना से अधिक मतदाता बढ़े हैं.

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट क्या होती है?
दरअसल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट चुनाव से पहले मतदाता डाटाबेस को शुद्ध करने की एक संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अस्थायी (Temporary) होती है. इसे जनता के लिए इसलिए जारी किया जाता है ताकि गलत प्रविष्टियां सुधारी जा सकें. छूटे हुए पात्र मतदाता जोड़े जा सकें और मृत, डुप्लिकेट या स्थानांतरित मतदाताओं को हटाए जा सकें. यह अंतिम सूची नहीं होती है. इस चरण को दावे और आपत्तियां कहा जाता है. दावे आपत्ति पूरी होने के बाद फाइनल सूची जारी होती है.

मतदाता सूची में अपना नाम कैसे चेक करें?
बूथ लेवल अधिकारी के पास उपलब्ध सूची, ECINET मोबाइल ऐप, ceouttarpradesh.nic.in या voters.eci.gov.in के माध्यम से वोटर लिस्ट में अपना नाम देख सकते हैं.

कैसे दोबारा अपना नाम शामिल कराएं
अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो घबराने की जरूरत नहीं है, इससे वोट का अधिकार खत्म नहीं होता है. अपना नाम बाद में जुड़वा सकते हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि छूटे हुए मतदाता 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 के दौरान फॉर्म–6 भरकर आवश्यक अभिलेखों के साथ अपना नाम पुनः शामिल करा सकते हैं. आवेदन बीएलओ, मतदाता पंजीकरण केंद्र (VRC), या ऑनलाइन https://sec.up.nic.in/OnlineVoters/ माध्यम से किए जा सकते हैं.

UP में SIR क्यों जरूरी?
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी का मुद्दा उठाया था. कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने वोटर लिस्ट में धांधली कर चुनाव जीतने का आरोप लगाया था. इसके बाद भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण 2026 (SIR) की प्रक्रिया शुरू हुई. इसके एक और वजह है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और गतिशील राज्य में बड़े पैमाने पर आंतरिक प्रवास, किराये पर रहने वाली आबादी और डुप्लिकेट वोटर कार्ड की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं.

ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्टः ड्राफ्ट चरण लोकतंत्र में नागरिक भागीदारी का सबसे अहम मौका है. ड्राफ्ट लिस्ट में अस्थायी होता है और सुधार किया जा सकता है. जबकि फाइनल वोटर लिस्ट चुनाव में मान्य होती है और अंतिम सूची होती है. वहीं, पहली बार वोट देने वाले युवा, शहर/जिला बदलने वाल लोग, किराये के मकान में रहने वाले, बुजुर्ग और अकेले रहने वाले प्रवासी मजदूरों को सतर्क रहना चाहिए और अपना नाम चेक करते रहना चाहिए.

