पौड़ी जिले में 12 लोगों को अस्पताल पहुंचा चुका भालू, एक की गई जान, लोगों का खेत जाना हुआ मुश्किल
उत्तराखंड में भालू खूंखार होते जा रहे हैं. पौड़ी जिले में भी भालू के हमले लगातार सामने आ रहे हैं. जिसके आंकड़े डरावने हैं.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : November 20, 2025 at 7:27 PM IST
|Updated : November 21, 2025 at 1:00 PM IST
पौड़ी: उत्तराखंड में भालू लगातार बवाली होते जा रहे हैं. आमतौर पर सर्दियों के मौसम में भालू हाइबरनेशन यानी शीतनिद्रा पर चले जाते हैं, लेकिन अब भालू शीतनिद्रा करीबन भूल चुके हैं. इन दिनों भी भालुओं को जंगल की गहराई में चले जाना चाहिए था, लेकिन इस बार स्थिति ठीक उलट नजर आ रही है. आलम ये है कि आबादी वाले इलाकों में घूम रहे हैं. जहां वे लोगों पर हमला कर रहे हैं. जिसमें लोग घायल हो रहे हैं या फिर उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है. पौड़ी जिले में भी अभी तक भालू 12 लोगों को अस्पताल पहुंचा चुका है.
बता दें कि पौड़ी जिले में भालू का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. वन विभाग की मानें तो इस बार भालू बस्तियों के आसपास असामान्य रूप से ज्यादा समय तक सक्रिय नजर आ रहे हैं, जिससे लोगों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है. इन दिनों पैठाणी रेंज, कल्जीखाल और थलीसैंण क्षेत्रों में भालू की सक्रियता बढ़ी है. जहां बीते सालों में भालू की आवाजाही बहुत कम देखने को मिलती थी, वहीं इस बार मात्र दो महीनों में इसकी गतिविधियां कई गुना बढ़ गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों का जीना दूभर हो गया है.
पैठाणी रेंज में बीते दिनों भालू ने कई मवेशियों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया. जबकि, कुछ मवेशियों की मौत भी हो गई. वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने एक विशेष टीम का गठन किया, जिसने प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त की. भालू को ट्रेंकुलाइज करने के लिए सभी आवश्यक उपकरणों के साथ टीम तैनात भी रही. कुछ समय तक भालू की गतिविधियां पूरी तरह से थम गईं, लेकिन कुछ दिन बाद फिर से उसकी मौजूदगी दर्ज की गई.

थलीसैंण में भालू से खौफजदा लोग: थलीसैंण क्षेत्र में भी भालू की आवाजाही और गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं. स्थानीय लोग सुबह-शाम खेतों और रास्तों पर जाते हुए दहशत में हैं. ग्रामीणों को डर है कि कहीं भालू उन पर हमला न कर दे. इस वजह से लोग घास, चारा पत्ती, जलावन लकड़ी, बिछावन आदि के लिए जंगल जाने से कतरा रहे हैं. इतना ही नहीं सर्दियां अब चरम पर आने वाली है, ऐसे में ग्रामीण खेतों में तमाम कामों को निपटा रहे हैं. वहीं, खेतों में काम करना भी लोगों में मुश्किल हो रखा है.
डरा रहे भालू के हमले के आंकड़े: पौड़ी जिले में भालू के हमलों की बात करें तो आंकड़े बेहद डरावने हैं. वन विभाग के मुताबिक, इस साल यानी जनवरी 2025 से लेकर अब तक यानी 20 नवंबर 2025 तक भालू के कई हमले दर्ज हुए हैं. जिसमें 12 लोग घायल हुए हैं. जबकि, भालू के हमले में एक व्यक्ति की जान गई है. वहीं, भालू ने 53 पशुओं को अपना शिकार बनाया है. ये आंकड़े बताते हैं कि स्थिति बेहद चिंताजनक है. ग्रामीणों में भय का माहौल है और लोग सुरक्षा को लेकर वन विभाग से अधिक प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं.

"बीते सालों में पौड़ी जिले में इस तरह की स्थिति कभी नहीं बनी. आमतौर पर नवंबर-दिसंबर के महीनों में भालू घने जंगलों में छिपे रहते हैं, लेकिन इस साल पिछले दो महीनों के भीतर भालू की गतिविधियां बेहद तेजी से बढ़ी हैं. पैठाणी रेंज, थलीसैंण और कल्जीखाल जैसे क्षेत्रों से लगातार भालू देखे जाने की शिकायत वन विभाग को मिल रही हैं."- आकाश वर्मा, वन संरक्षक गढ़वाल वृत्त
वन विभाग ने स्वीकार किया कि भालू की इतनी ज्यादा सक्रियता पहले कभी सामने नहीं आई थी. जिन क्षेत्रों से भालू के दिखाई देने की सूचना विभाग तक पहुंची, वहां तत्काल वन विभाग की टीमों को भेजा गया. टीमों ने मौके पर पहुंचकर भालू को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर हटाने के प्रयास किए.
जनपद पौड़ी गढ़वाल के पैठाणी रेंज में भालू के आतंक पर काबू पाने के लिए प्रशासन और वन विभाग द्वारा संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है। टीम पैठाणी रेंज के अंतर्गत भालू प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही है। भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने के साथ ही ड्रोन और ट्रैप कैमरों से… pic.twitter.com/qPXnTRDz69
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) September 7, 2025
भोजन की तलाश में गांव में पहुंच रहे भालू: वनाधिकारियों ने बताया कि कई बार भालू भोजन की तलाश में गांवों की ओर आ जाते हैं, जो टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है. टीमें लगातार गश्त कर रही हैं. ताकि, भालू की मूवमेंट पर नजर रखी जा सके और ग्रामीणों को किसी अनहोनी से बचाया जा सके. वहीं, वन विभाग की ओर से प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है.
भालू से बचाव के तरीके-
- जंगलों की ओर जाते समय पूरी सावधानी बरतें.
- अकेले जंगल न जाएं, हमेशा समूह में जाएं.
- रास्ते में शोर-शराबा करते रहें, ताकि भालू के पास पहुंचने से पहले ही वो दूर हट जाए.
- हाथ में लाठी या लकड़ी लेकर चलें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर आत्मरक्षा की जा सके.
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि या भालू दिखने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें.
जिवई गांव में भालू के हमले में महिला गंभीर रूप से घायल: बीती 17 नवंबर को भी पौड़ी के बीरोंखाल ब्लॉक के जिवई गांव में झाड़ियों में छिपे भालू ने लक्ष्मी देवी पत्नी महिपाल सिंह (उम्र 40 वर्ष) पर अचानक हमला कर दिया. बताया जा रहा है कि लक्ष्मी देवी तीन–चार अन्य महिलाओं के साथ रोजाना की तरह घास काटने गई थी. सभी महिलाएं घास काटने में व्यस्त थी, तभी झाड़ियों में छिपा भालू तेजी से निकला और लक्ष्मी देवी पर हमला कर दिया.

भालू के हमले में महिला की दाईं आंख और सिर पर गंभीर चोटें आईं. हमला इतना खतरनाक था कि घायल महिला कुछ समय तक उठ भी नहीं पाई. हमला होते ही लक्ष्मी देवी ने चीखकर अन्य महिलाओं को मदद के लिए पुकारा. महिलाओं की शोर सुनकर भालू भाग गया. इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल लक्ष्मी देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल पहुंचाया गया. जहां से हायर सेंटर भेज दिया गया.

लोगों को सुरक्षित रखने के लिए उठाए जा रहे हर संभव कदम: वन विभाग का कहना है कि जिन क्षेत्रों में भालू की दहशत बनी हुई है, वहां लोगों को सुरक्षित रखने के लिए विभाग की ओर से हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं. टीमों की तैनाती बढ़ाई गई है और गश्त को भी तेज किया गया है. वन अधिकारियों का कहना है कि विभाग का उद्देश्य भालू को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव को रोकना है.
पहाड़ी इलाकों में भालू बने चुनौती: पौड़ी जिले के पर्वतीय इलाकों में भालू की यह बढ़ती सक्रियता लोगों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई है. वन विभाग उम्मीद कर रहा है कि ठंड बढ़ने के साथ-साथ भालू जंगलों की ओर लौट जाएंगे, लेकिन तब तक स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है.
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