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डिपुओं में मिलने वाली दालों में हुआ ये बदलाव, लाखों उपभोक्ताओं को फिर मिलेगी 'गायब' हुई ये दाल

हिमाचल में 19 लाख से अधिक राशनकार्ड धारक हैं. राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने चार प्रकार की दालों के आवंटन के लिए प्रस्ताव भेजा है.

हिमाचल के डिपुओं में मिलेंगी दाल
हिमाचल के डिपुओं में मिलेंगी दाल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : July 7, 2026 at 5:41 PM IST

5 Min Read
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शिमला: महंगाई के दौर में आम रसोई की थाली से धीरे-धीरे दूर होती जा रही पौष्टिक दालों में अब एक बड़ी राहत मिलने जा रही है. तीन साल बाद हिमाचल के राशन डिपुओं में एक बार फिर मूंग दाल की वापसी होने जा रही है. महंगाई के कारण आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही यह पौष्टिक दाल अब उचित मूल्य पर डिपुओं के माध्यम से उपलब्ध होगी. प्रोटीन, फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर और कम वसा वाली मूंग दाल की वापसी से प्रदेश के लाखों राशन कार्ड धारकों को राहत मिलेगी.

लंबे समय से उपभोक्ता इसकी मांग कर रहे थे, क्योंकि बाजार में बढ़ती कीमतों के चलते इसे खरीदना हर परिवार के लिए आसान नहीं रह गया था. अब सरकार ने पोषण और जनहित को प्राथमिकता देते हुए इसे फिर से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल करने का फैसला लिया है. बाजार में मूंग दाल के दाम बढ़ने के कारण करीब तीन वर्ष पहले इसकी आपूर्ति डिपुओं से बंद कर दी गई थी.

हालांकि, स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे लाभकारी दालों में शामिल मूंग की मांग लगातार बनी रही. इसी को देखते हुए हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने मूंग दाल समेत चार प्रकार की दालों के 1 लाख 13 हजार 240 क्विंटल स्टॉक के आवंटन के लिए भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स को प्रस्ताव भेज दिया है. मंजूरी मिलते ही प्रदेशभर के डिपुओं में मूंग दाल की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी. इससे उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर पौष्टिक दाल उपलब्ध होगी, वहीं महंगाई के दौर में घरेलू बजट पर पड़ने वाला बोझ भी कुछ कम होने की उम्मीद है.

हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल ने बताया, "भारत सरकार को एक लाख क्विंटल 13 हजार क्विंटल से अधिक चार दालों के स्टॉक आवंटन की डिमांड भेजी गई है. इसमें इस बार मूंग की दाल भी शामिल है".

16,947 क्विंटल मूंग दाल की डिमांड भेजी

प्रदेश भर के सरकारी डिपुओं में दालों की उपलब्धता और अधिक व्यवस्थित होने जा रही है. उपभोक्ताओं को एक-दो नहीं, बल्कि चार प्रमुख किस्मों की दालें मूंग, दाल चना, उड़द और मलका उपलब्ध कराई जाएंगी. खास बात यह है कि राशन कार्डधारक अपनी पसंद के अनुसार इन चार दालों में से किसी भी तीन किस्म की दालें खरीद सकेंगे. इससे उपभोक्ताओं को विकल्प मिलने के साथ-साथ उनकी जरूरत और पसंद के अनुरूप दालें लेने की सुविधा भी मिलेगी.

दालों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग को कुल 1,13,208 क्विंटल दालों के स्टॉक आवंटन की मांग भेजी है. इसमें उड़द की 26,835 क्विंटल, मलका की 31,542 क्विंटल, दाल चना की 37,884 क्विंटल और मूंग की 16,947 क्विंटल की मांग शामिल है. इसके अलावा निगम के पास वर्तमान में 19,000 क्विंटल दालों का स्टॉक पहले से उपलब्ध है, जिससे डिपुओं में आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना नहीं है.

प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों का नेटवर्क

प्रदेश के दूरदराज, जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों तक भी सस्ता राशन समय पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उचित मूल्य की दुकानों (राशन डिपुओं) का व्यापक जाल बिछाया गया है. यही कारण है कि प्रदेश के 19 लाख से अधिक उपभोक्ता प्रतिमाह इन डिपुओं के माध्यम से आटा ,चावल, दालें, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री रियायती दरों पर प्राप्त कर रहे हैं. सरकार की खाद्य सुरक्षा योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में ये राशन डिपो सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहे हैं.

प्रदेश में वर्तमान में कुल 5,420 उचित मूल्य की दुकानें (राशन डिपो) संचालित हैं. जिला स्तर पर देखें तो कांगड़ा में सबसे अधिक 1,161 डिपो हैं, जो राज्य में सबसे बड़ा वितरण नेटवर्क है. इसके विपरीत जनजातीय एवं कम आबादी वाले लाहौल-स्पीति जिले में सबसे कम 65 उचित मूल्य की दुकानें संचालित हैं. अन्य जिलों में मंडी में 868, शिमला में 646, चंबा में 524, कुल्लू में 456, सिरमौर में 371, सोलन में 355, ऊना में 325, हमीरपुर में 320 और बिलासपुर में 260 राशन डिपो कार्यरत हैं. इन डिपुओं के माध्यम से प्रदेश के 19 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को हर महीने सस्ता एवं सब्सिडी वाला राशन उपलब्ध कराया जाता है.

प्रदेश में 19 लाख से अधिक राशनकार्ड धारक

प्रदेश में जहां लाखों परिवार सरकारी राशन व्यवस्था से जुड़े हैं. वहीं, आंकड़े बताते हैं कि सबसे बड़ा वर्ग अभी भी सामान्य श्रेणी (एपीएल) के परिवारों का है. दूसरी ओर, प्राथमिकता वाले परिवार (पीएचएच), गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करने वाले परिवार और अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के लाभार्थी भी बड़ी संख्या में सरकारी खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं.

खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में कुल 19,58,895 राशनकार्ड धारक पंजीकृत हैं. इनमें सबसे अधिक 11,60,019 परिवार सामान्य श्रेणी (एपीएल) के हैं. इसके अलावा 3,00,795 प्राथमिकता वाले परिवार (पीएचएच) हैं. जबकि 2,76,598 परिवार गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी में शामिल हैं. सबसे कमजोर और जरूरतमंद वर्ग को राहत देने वाली अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के तहत 1,59,658 राशनकार्ड धारक लाभान्वित हो रहे हैं. वहीं, 60,827 राशनकार्ड ऐसे परिवारों के हैं, जिन्हें एपीएल टैक्स पेयर श्रेणी में रखा गया है.

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