मानसून फिर सक्रिय, झालावाड़ के बकानी में 114 मिमी बारिश,
मौसम विभाग के मुताबिक 28 अगस्त से बारिश कमजोर पड़ने के आसार हैं.

Published : August 27, 2026 at 4:34 PM IST
जयपुर: राजस्थान में मानसून की गतिविधियों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है. पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में मेघगर्जन के साथ कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी राजस्थान में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश हुई. मौसम विभाग के अनुसार झालावाड़ जिले के बकानी में सबसे अधिक 114 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. हालांकि, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में मानसून के कमजोर पड़ने और बारिश की गतिविधियों में कमी आने का अनुमान जताया है.
झालावाड़ में सबसे ज्यादा बारिश: 27 अगस्त को दर्ज बारिश के आंकड़ों में झालावाड़ जिला सबसे आगे रहा. बकानी में 114 मिमी, पिडावा में 92 मिमी, सुनेल में 85 मिमी, झालरापाटन में 77 मिमी और रायपुर में 74 मिमी बारिश दर्ज की गई. पचपहाड़ में 58 मिमी, अकलेरा में 38 मिमी बारिश हुई. कोटा संभाग में भी बारिश का असर देखने को मिला. दीगोद में 70 मिमी, रामगंजमंडी में 53 मिमी और चेचट में 38 मिमी बारिश दर्ज की गई. करौली के सपोटरा में 58 मिमी और बारां के किशनगंज में 50 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई.
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— मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर (@IMDJaipur) August 27, 2026
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जयपुर में झमाझम बारिश, कई इलाकों में जलभराव: राजधानी जयपुर में दिनभर उमस और गर्मी के बाद बुधवार दोपहर मौसम ने अचानक करवट ली. करीब दो बजे के बाद आसमान में काले बादल छा गए और कुछ ही देर में तेज बारिश शुरू हो गई. करीब आधे घंटे तक हुई झमाझम बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में सड़कें पानी से भर गईं. इसके बाद करीब एक घंटे तक रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा. बारिश के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बन गई. वाहन चालकों को जलभराव के बीच से गुजरना पड़ा. मौसम विभाग के अनुसार जयपुर कलक्ट्रेट में 25 मिमी, जेएलएन मार्ग पर 21.5 मिमी और सांगानेर एयरपोर्ट पर 22 मिमी बारिश दर्ज की गई. शहर के अन्य हिस्सों में भी अलग-अलग समय पर बारिश हुई. बारिश के बावजूद जयपुर में दिन का तापमान 34.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं पश्चिमी राजस्थान में गर्मी का असर बना रहा. सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 38 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया. प्रदेश में सबसे अधिक तापमान श्रीगंगानगर में 41.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से करीब 3.5 डिग्री अधिक है.
आठ जिलों के लिए यलो अलर्ट: मौसम विभाग के जयपुर केन्द्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि बारिश को देखते हुए भरतपुर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, धौलपुर, कोटा, बारां और अजमेर के लिए यलो अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में कुछ स्थानों पर मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार कम दबाव का क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना हुआ है. इसके प्रभाव से पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं. हालांकि, इस सिस्टम के कमजोर पड़ने के साथ प्रदेश में बारिश का जोर भी कम होने की संभावना है.
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28 अगस्त से कमजोर पड़ेगा मानसून: मौसम विभाग के अनुसार 27 अगस्त से ही राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है. भरतपुर, कोटा और जयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. 28 अगस्त से आगामी एक सप्ताह तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की गतिविधियां कमजोर रहने की प्रबल संभावना है. पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश हिस्सों में भी अगले एक सप्ताह तक मानसून कमजोर रहने का अनुमान है. ऐसे में प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश का जोर कम होगा और तापमान में फिर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि 4 से 7 सितंबर के बीच पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में फिर बढ़ोतरी हो सकती है.
राजस्थान में सामान्य से करीब 15 फीसदी कम बारिश: जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 26 अगस्त तक राजस्थान में 291.81 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है. इस अवधि में सामान्य तौर पर 344.74 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी. इस लिहाज से प्रदेश में अब तक बारिश सामान्य से करीब 15 फीसदी कम है. पूर्वी राजस्थान में हालिया बारिश के बावजूद पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश की कमी और अधिक तापमान की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में मानसून के कमजोर पड़ने से बारिश की कमी वाले इलाकों में चिंता बढ़ सकती है.
बीसलपुर समेत कई बांधों में पानी की आवक: बारिश के कारण प्रदेश के कई बांधों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है. बीसलपुर बांध में भी पानी की आवक बनी हुई है. बांध में करीब 3 सेंटीमीटर पानी की आवक दर्ज की गई और जलस्तर 314.09 आरएल मीटर तक पहुंच गया. बीसलपुर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में अब तक 557 मिलीमीटर बारि दर्ज की जा चुकी है. वहीं बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित ल्हासी डैम में भी लगातार पानी की आवक जारी है. बांध का जलस्तर 345.00 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि इसका पूर्ण जलभराव स्तर 345.60 मीटर है. बांध में वर्तमान में 919.24 एमसीएफटी यानी 26.03 एमसीएम पानी उपलब्ध है. करीब 655 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि फिलहाल निकासी शून्य है और तीनों गेट बंद हैं. बांध 84.51 फीसदी भर चुका है.
भीमसागर बांध में भी लगातार आवक: खानपुर क्षेत्र के भीमसागर बांध में कैचमेंट एरिया में हो रही बारिश के कारण पानी की आवक जारी है. बांध का जलस्तर करीब 1003.90 फीट पहुंच गया है, जबकि पूर्ण भराव क्षमता 1012 फीट है. बांध अभी करीब 8.10 फीट खाली है. बांध में करीब 1369 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है. वर्तमान जलभराव 51.59 फीसदी बताया गया है और सभी गेट फिलहाल बंद हैं. क्षेत्र के किसानों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले भीमसागर बांध के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है.
पार्वती बांध में तेजी से बढ़ा जलस्तर: धौलपुर के सरमथुरा क्षेत्र स्थित पार्वती बांध आंगई में भी कैचमेंट क्षेत्र में बारिश के बाद पानी की आवक बढ़ी है. सुबह 8 बजे बांध का जलस्तर 222.05 मीटर दर्ज किया गया, जबकि बांध की कुल भराव क्षमता 223.41 मीटर है. बांध के जलस्तर और पानी की आवक पर सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं. इसी तरह पानी की आवक जारी रही तो आने वाले समय में बांध के गेट खोले जाने की स्थिति बन सकती है.
सितंबर में फिर बढ़ सकती है बारिश: फिलहाल राजस्थान में मानसून की सक्रियता कुछ क्षेत्रों तक सीमित दिखाई दे रही है. पूर्वी राजस्थान के झालावाड़, कोटा, करौली, बारां और आसपास के जिलों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी राजस्थान में गर्मी और उमस का असर बना हुआ है. मौसम विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह में मानसून कमजोर रहने के बाद सितंबर के पहले सप्ताह में पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां दोबारा बढ़ सकती हैं. वहीं 10 सितंबर के बाद प्रदेश में मौसम के शुष्क होने के संकेत भी मिल रहे हैं. जेट स्ट्रीम के दक्षिण की ओर खिसकने से राजस्थान में शुष्क हवाओं का प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे बारिश में तेज गिरावट और मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है. जलसंसाधन विभाग के अनुसार राजस्थान में मानसून की सामान्य वापसी की शुरुआत उत्तर-पश्चिमी राजस्थान से करीब 17 सितंबर के आसपास मानी जाती है.

