मोहन यादव सरकार ने लिया 3600 करोड़ का लोन, कर्ज के बोझ में दबता मध्य प्रदेश
मोहन यादव सरकार ने फिर लिया नया कर्ज, बाजार से उठाया 3600 करोड़ रुपए का लोन,मध्य प्रदेश सरकार पर पहुंचा 5 लाख करोड़ का कर्ज. विश्वास चतुर्वेदी की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 8, 2026 at 2:33 PM IST
|Updated : July 8, 2026 at 2:41 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार के वित्तीय हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं. चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने बाजार से एक बार फिर 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठा लिया है. इस नई उधारी के साथ ही राज्य पर कुल बकाया कर्ज का आंकड़ा 5 लाख करोड़ रुपए के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया है. वहीं बजट में तय किए गए सालाना उधारी लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा सरकार शुरुआती दौर में ही खर्च कर चुकी है.
चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 12,800 करोड़ रुपए का कर्ज
मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के जरिए सरकारी प्रतिभूतियां जारी करके बाजार से 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया है. इस नए कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज अब 12,800 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. वहीं लगातार बढ़ती इस उधारी के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव साफ देखा जा सकता है.
कुल कर्ज का ऐतिहासिक स्तर पार
वित्त विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति यानी 31 मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश पर कुल 4,88,714.17 करोड़ रुपए का कर्ज था. वहीं चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में ही ली गई 12,800 करोड़ रुपए की नई उधारी को इसमें शामिल करने के बाद राज्य पर कुल बकाया कर्ज अब 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है.
वर्तमान वित्तीय वर्ष में 78,500 करोड़ रुपएलेने का लक्ष्य
सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में कुल 1,06,190 करोड़ रुपए का सार्वजनिक ऋण जुटाने का प्रावधान किया गया है. इस कुल प्रावधान में से सरकार का लक्ष्य बाजार से 78,500 करोड़ रुपए की उधारी जुटाने का है. वर्तमान स्थिति को देखें तो सरकार इस तय लक्ष्य का 16.30 प्रतिशत हिस्सा यानि 12,800 करोड़ रुपए वित्तीय वर्ष के शुरुआती दौर में ही उधार ले चुकी है.
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मार्च 2027 तक और बढ़ेगा कर्ज का बोझ
वित्त विभाग से रिटायर्ड अधिकारी विश्वजीत झारिया ने बताया कि "सरकारी अनुमानों के अनुसार पुराने कर्ज के भुगतान की प्रक्रियाओं के बाद इस साल कुल कर्ज में 71,753.38 करोड़ रुपए की शुद्ध बढ़ोतरी का अनुमान है. इसका सीधा असर यह होगा कि 31 मार्च 2027 तक मध्य प्रदेश पर कुल बकाया कर्ज का यह ग्राफ बढ़कर करीब 5.60 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है. यदि कर्ज लेने की यही रफ्तार रही, तो आने वाले समय में विकास कार्यों के बजट में कटौती भी करनी पड़ सकती है."

