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रेशम की चमक से दमकेगा मध्य प्रदेश का किसान, बंपर रोजगार, 42 महिलाएं बनीं लखपति दीदी

रेशम क्रांति से समृद्ध होंगे मध्य प्रदेश के किसान, 42 महिलाएं बनी लखपति दीदी, अब नए शोरूम और ई-कॉमर्स से होगा बाजार का विस्तार.

MADHYA PRADESH SILK BEGINS
Etv Bharat (Getty Image)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 5, 2026 at 2:43 PM IST

3 Min Read
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भोपाल: रेशम उत्पादन मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान बनने जा रहा है. राज्य सरकार ने इसकी शुरुआत कर दी है. आने वाले 3 वर्षों में इसके परिणाम भी नजर आने लगेंगे. मध्य प्रदेश कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान और महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए रेशम क्रांति की शुरुआत की है. इससे हजारों किसानों और महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है. वहीं आने वाले समय में प्रदेश में 3500 एकड़ में रेशम की फसल का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है.

निजी और सरकारी मिलाकर 431 एकड़ में खेती

कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि "प्रदेश सरकार रेशम उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है. रेशम संचालनालय के माध्यम से पिछले दो वर्षों में निजी क्षेत्र में 231 एकड़ और सरकारी रेशम केंद्रों पर 200 एकड़ क्षेत्र में नए मलबरी पौधों का रोपण किया गया है. इससे रेशम उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ी है और भविष्य के उत्पादन को मजबूती मिली है.

MOHAN YADAV GOVT SILK EMPLOYMENT
रेशम से 42 महिलाएं बनीं लखपति दीदी (ETV Bharat)

5 हजार किसानों को दिया गया प्रशिक्षण

मंत्री जायसवाल ने बताया कि प्रदेश के 3,600 मलबरी और 850 टसर कोकून उत्पादक किसानों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है. पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 2.64 लाख किलोग्राम मलबरी कोकून और 31.51 लाख टसर कोकून का उत्पादन किया गया. इसके साथ ही करीब 5 हजार किसानों को आधुनिक कोकून उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण देकर उनकी उत्पादकता और आय बढ़ाने का प्रयास किया गया है.

MP SILK PRODUCTION 3500 ACRES
रेशम क्रांति की शुरुआत (ETV Bharat)

रेशम से 42 महिलाएं बनीं लखपति दीदी

अब तक प्रदेश में 42 महिलाओं को रेशम उत्पादन के जरिए लखपति दीदी के रूप में चिन्हांकित किया गया है. यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू आय बढ़ाने में अहम साबित हो रही है. राज्यमंत्री जायसवाल ने बताया कि आगामी 3 वर्षों में मलबरी कोकून उत्पादन को वर्तमान 1.50 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 4 लाख किलोग्राम तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है. वहीं टसर कोकून उत्पादन को 40 लाख से बढ़ाकर 70 लाख तक ले जाने की योजना है. इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मलबरी पौधरोपण क्षेत्र में अतिरिक्त 3,500 एकड़ की वृद्धि की जाएगी.

MP FARMERS WOMEN EMPLOYMENT SILK
5 हजार किसानों को दिया गया प्रशिक्षण (ETV Bharat)

ई-कामर्स प्लेटफार्म पर मिलेंगे उत्पाद

मंत्री ने बताया कि रेशम उद्योग के प्रचार, प्रशिक्षण और जागरूकता के लिए नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी में रेशम इंटरप्रिटेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी. इसके साथ ही रेशम उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से मार्केटिंग शुरू की जाएगी. ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में नए प्राकृतिक रेशम शोरूम भी खोले जाएंगे.

3500 एकड़ में होगा मलबरी रेशम का उत्पादन

आगामी तीन वर्षों में 6,200 हितग्राहियों को कौशल उन्नयन प्रशिक्षण देने की कार्य योजना तैयार की गई है. इसके अलावा 150 एकड़ क्षेत्र में मलबरी नर्सरी विकसित की जाएगी. 3,500 एकड़ में नया मलबरी पौधरोपण, 16 नई बीज इकाइयों की शुरुआत और 10 नई धागाकरण इकाइयों की स्थापना की जाएगी. इन प्रयासों से प्रदेश में रेशम उत्पादन, रोजगार और ग्रामीण आय को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है."