मध्य प्रदेश के 70 हजार शिक्षक हो जाएं अलर्ट, स्कूल लेट पहुंचे तो जाएंगे नौकरी से
लेटलतीफी पर सख्त हुई मध्य प्रदेश सरकार, अतिथि शिक्षकों को टाइम पर स्कूल पहुंचने का आदेश, लेट आने पर जा सकती है नौकरी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 23, 2026 at 2:48 PM IST
MP GUEST TEACHER ATTENDANCE RULE: प्रदेश में अब अतिथि शिक्षकों और विद्वानों की उपस्थिति को लेकर मध्य प्रदेश लोक शिक्षण संचनालय सख्त रवैया अपनाने की तैयारी में है. हाल में एक आदेश जारी कर अतिथि शिक्षक और अतिथि विद्वानों को अपने स्कूल और कॉलेजों में समय पर उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता कर दी गई है. यानि अब लेटलतीफी नहीं चलेगी, टीचर्स को तय वक्त पर ही स्कूल आना होगा.
छात्रों की पढ़ाई को ध्यान में रख लिया फैसला
लोक शिक्षा संचनालय द्वारा ये फैसला स्कूल और कॉलेजों में छात्रों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. क्योंकि संचनालय का मानना है कि, अतिथि शिक्षक शिक्षा व्यस्त का अहम हिस्सा है, जो शिक्षण कार्यों के साथ-साथ छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था में योगदान देते हैं. ऐसे में उनकी उपस्थिति समय पर होना अनिवार्य है.
समय पर नहीं हुए उपस्थित तो होगी कार्रवाई
आदेश के जरिए ये साफ किया गया है कि, अब से स्कूलों में अतिथि शिक्षकों और कॉलेजों में अतिथि विद्वानों की उपस्थिति का रिकॉर्ड भी मेंटेन किया जाएगा. जिसकी रिपोर्ट समय समय संबंधित स्कूल और कॉलेजों को भेजना होगी. साथ ही कहा गया है कि, इसका उल्लंघन और नजरअंदाज़ी संबंधित शिक्षकों पर भारी पड़ सकती है. क्योंकि इसे कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा और उन के खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. ना सिर्फ उपस्थिति बल्कि इन शिक्षकों के शिक्षण कार्य की गुणवत्ता पर भी अब नजर रहेगी, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.
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अतिथि विद्वानों का मानना, समय पर मिले फ्लेक्सिबिलिटी
शासन के इस नए आदेश को लेकर मुरार कन्या महाविद्यालय में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वान दिनेश चतुर्वेदी का कहना है कि, "अतिथि विद्वान पहले से ही अपना पूरा समय दे रहे हैं. कभी कभार ही लेट लतीफी जैसी स्थिति बनती है. सरकार का यह नियम न्याय संगत नहीं लगता. क्योंकि, एक स्थायी टीचर को लाखों रुपये मिल रहे हैं, जबकि अतिथि विद्वान को महज 45 हज़ार रुपये मिल रहे.
जबकि अतिथि विद्वानों पर जिम्मेदारियां ज्यादा हैं. दोनों ही 6 घंटे का पूरा समय दे रहे हैं. ऐसे में सरकार को समय की थोड़ी फ्लेक्सिबिलिटी देना चाहिए. खासकर महिलाएं सुबह घर से निकलती हैं, उन पर पारिवारिक जिम्मेदारियां भी ज्यादा होती हैं तो सरकार को इस पर विचार करना चाहिए और समय 5 घंटे का कर देना चाहिए."

