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मोहन भागवत के 'हिंदू 3 बच्चे पैदा करें, घर वापसी जरूरी, पर मौलाना शहाबुद्दीन बोले- यह कानूनन अपराध

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहाकि जनसंख्या वृद्धि को किसी एक धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

मौलाना शाहाबुद्दीन ने भागवत के बयान का विरोध किया
मौलाना शाहाबुद्दीन ने भागवत के बयान का विरोध किया (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 18, 2026 at 2:40 PM IST

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बरेली: हिंदू तीन बच्चे पैदा करें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के द्वारा दिए गए बयान पर बरेली में सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल है. ऑल इंडिया जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने भागवत के बयान का विरोध करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है.

जनसंख्या वृद्धि धर्म से जोड़ना गलत: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है. ये किसी एक धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब किसी देश या परिवार में जनसंख्या ज्यादा होती है, तो उस परिवार पर आर्थिक दबाव भी स्वाभाविक रूप से बढ़ता है. ऐसे में इसको सांप्रदायिक नजरिए से पेश करना उचित नहीं है.

मौलाना शाहाबुद्दीन (Video Credit: ETV Bharat)

आरएसएस प्रमुख पहले भी तीन बच्चे पैदा करने की बात कहते रहे हैं, जबकि कुछ अन्य हिंदू नेता 10 से 30 बच्चे पैदा करने की बातें करते हैं और मुसलमानों पर 12-12 बच्चा पैदा करने का आरोप लगाते हैं, जो बेबुनियाद हैं. कभी डेमोग्राफी मॉडल’ पेश किया जाता है, तो कभी कहा जाता है कि मुसलमानों की आबादी बहुत बढ़ गई है. हकीकत यह है कि आज हर समुदाय आर्थिक हालात को देखते हुए परिवार नियोजन अपना रहा है.

बच्चों का बोझ उठाना आसान नहीं: मौलाना ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा दौर में महंगाई, शिक्षा, तालीम, तरबियत, शादी-विवाह और रोजगार के बढ़ते खर्चों के कारण मुस्लिम समाज भी दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने के पक्ष में नहीं है. हर मां-बाप चाहता है कि वह अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और भविष्य दे सके. ऐसे में ज्यादा बच्चों का बोझ उठाना आसान नहीं है.

वहीं मोहन भागवत के घर वापसी के बयान पर मौलाना ने कहा कि इसे घर वापसी नहीं, बल्कि धर्मांतरण माना जाना चाहिए. अगर किसी भी व्यक्ति का धर्म दबाव, लालच या प्रलोभन के जरिए बदला जाता है, तो वह कानूनन अपराध है. संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी भी नागरिक को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, कानून सबके लिए बराबर है. बरेली से उठी यह प्रतिक्रिया अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बन गई है.

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