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फिर से टीम मोदी का हिस्सा होंगे अनुराग? क्या हिमाचल के छोरे पर बरसेगा पीएम का प्यार, जानिए क्यों चर्चा में है हमीरपुर के ठाकुर

क्या मोदी कैबिनेट के फेरबदल में हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर की वापसी. दिल्ली से शिमला तक सियासी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म.

सांसद अनुराग ठाकुर
सांसद अनुराग ठाकुर (PIC CREDIT: ANURAG THAKUR FACEBOOK PAGE)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : June 30, 2026 at 7:35 PM IST

9 Min Read
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शिमला: पीएम नरेंद्र मोदी हिमाचल को अपना दूसरा घर कहते व मानते हैं. संगठन में सक्रिय होने के दौरान नरेंद्र मोदी हिमाचल भाजपा के प्रभारी रहे हैं. इस समय पीएम की टीम में फेरबदल के साथ कुछ और चेहरे शामिल करने की चर्चा है. इन्हीं चर्चाओं के केंद्र में एक युवा नेता का नाम भी है. हिमाचल के छोरे के रूप में चर्चित और भारतीय क्रिकेट व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले अनुराग ठाकुर का नाम केंद्रीय मंत्रिमंडल के लिए सियासी गलियारों में चल रहा है.

पहले टीम नरेंद्र मोदी में अहम पोर्टफोलियो संभाल चुके अनुराग ठाकुर क्या फिर से केंद्र सरकार का हिस्सा बनेंगे, इसकी पड़ताल करते हैं. सबसे पहला प्रश्न तो यही रहेगा कि चार लोकसभा सांसदों वाले छोटे पहाड़ी राज्य को केंद्रीय कैबिनेट में दो चेहरे क्यों मिलने चाहिए? दो चेहरे इसलिए कहा जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे जेपी नड्डा इस समय केंद्र सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल रहे हैं. यदि ये तर्क दिया जाए कि छोटे राज्य से दो नेता क्यों कैबिनेट मंत्री बनाए जाएं तो प्रत्युतर में कहा जा सकता है कि पहले भी केंद्र सरकार में हिमाचल से दो मंत्री रहे हैं. यूपीए टू में वीरभद्र सिंह व आनंद शर्मा हिमाचल से शक्तिशाली मंत्रालयों के मुखिया रहे हैं. ऐसे में ये बिल्कुल संभव है कि एक ही समय में हिमाचल से दो नेता केंद्रीय कैबिनेट में हो सकते हैं.

अनुराग के पक्ष में जाते हैं ये गुण

अनुराग ठाकुर युवा नेता हैं. वे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं. बेशक उनके पिता भारतीय जनता पार्टी के कद्वार नेता हैं और दो बार राज्य के सीएम रह चुके हैं, लेकिन अनुराग ठाकुर ने अपनी सियासी राह खुद बनाई है. वे 2008 में पहली बार उपचुनाव के माध्यम से लोकसभा पहुंचे थे. उसके बाद वे लगातार हमीरपुर से विजयी होते रहे हैं. पहली बार वे केंद्र सरकार में 2019 में शामिल हुए. वे मोदी-टू में वित्त व कारपोरेट मामलों के राज्यमंत्री के तौर पर सेवारत रहे. फिर उन्हें केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्रालय दिया गया. वे युवा मामले व खेल मंत्रालय का कामकाज भी संभालते रहे. इस तरह मोदी सरकार में एक युवा नेता के नाते वे काफी पावरफुल रहे. अलबत्ता मोदी-थ्री यानी मोदी-2024 में उन्हें कैबिनेट में जिम्मेदारी नहीं मिली. वे फिलहाल अन्यों की तरफ एक सांसद हैं. अब चर्चा है कि मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल व विस्तार होना है तो क्या अनुराग को जगह मिलेगी?

क्या राज्य की राजनीति में सक्रिय होंगे

एक चर्चा ये भी है कि अनुराग ठाकुर आने वाले समय में अपनी कर्मभूमि हिमाचल में सियासी पारी खेलने के लिए हाईकमान की तरफ से चुने जा सकते हैं. हालांकि ये सिर्फ एक चर्चा ही है जो अकसर उड़ती रहती है. हिमाचल में विधानसभा चुनाव 2027 में है. यहां पहले से ही जयराम ठाकुर के समर्थक उन्हें दूसरी बार सीएम की कुर्सी पर विराजमान देखना चाहते हैं. इसी बीच, हिमाचल आए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी एक सवाल के जवाब में ये कह दिया कि इस मामले को जयराम जी देखेंगे, उससे पूर्व सीएम के समर्थकों में हर्ष की लहर दौड़ गई.

हालांकि ये भी एक तथ्य है कि भाजपा में वही होता है जो हाईकमान (मोदी) की मर्जी होती है, ऐसे में अनेक बार चर्चाओं के गर्म बाजार पर अचानक से बर्फीला पानी पड़ जाता है. इधर, अनुराग ने भी एक सवाल के जवाब में कह दिया है कि विधानसभा चुनाव अभी हैं नहीं तो ऐसे सवालों का कोई औचित्य नहीं है. सियासत ये भी कहती है कि हर नेता के मन में राज्य के सीएम की कुर्सी का सपना होता है. ऐसे में क्या जेपी नड्डा ये सपना नहीं लेते होंगे. ये बात अलग है कि नड्डा ने कहा है कि वे केंद्र में ही ठीक हैं, लेकिन समय व भाजपा की रणनीति का कोई भरोसा नहीं कि किस नेता को क्या जिम्मेदारी दे दी जाए. एक बात और जोड़ते चलें कि जयराम ठाकुर के समर्थक तर्क देते हैं कि जैसे प्रेम कुमार धूमल को दो बार मौका मिला, वैसे ही जयराम ठाकुर को भी मिलना चाहिए.

क्या बीजेपी हाईकमान चलेगा दांव

हिमाचल में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होंगे. ऐसे में हिमाचल में सत्ता वापसी के लिए बीजेपी अनुराग ठाकुर पर दांव खेल सकती है, ताकि धूमल खेमे को एक्टिव किया जा सके. अनुराग समर्थक और कई बीजेपी कार्यकर्ता उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की चर्चा अक्सर करते हैं. इस समय अगर अनुराग कैबिनेट मंत्री बनते हैं तो उनके समर्थकों और जनता के बीच उनका कद बढ़ेगा, जिसका फायदा बीजेपी विधानसभा चुनाव में उठा सकती है.

अनुराग को कब लगा झटका

अनुराग ठाकुर एक समय काफी पावरफुल हो गए थे. केंद्र में मंत्री, बीसीसीआई में अहम पोजीशन, विदेश में देश का कई मोर्चों पर प्रतिनिधित्व आदि उनके खाते में दर्ज है. लेकिन हुआ कुछ यूं कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उनके संसदीय क्षेत्र हमीरपुर से भाजपा की स्थिति बहुत निराशाजनक रही. हमीरपुर से भाजपा के पास कोई सीट नहीं आई. सुजानपुर, बड़सर, नादौन, हमीरपुर व भोरंज में भाजपा को कोई सीट नहीं मिली. हालांकि ऑपरेशन लोट्स के बाद अब हमीरपुर में भाजपा की दो सीटें क्रमश: बड़सर व हमीरपुर सदर है. बड़सर से इंद्रदत्त लखनपाल व हमीरपुर सदर से आशीष शर्मा अब भाजपा विधायक हैं. ऐसे में 2024 में केंद्र सरकार में अनुराग ठाकुर का नाम शायद इसी कारण से कट गया हो.

ये तथ्य है कि भाजपा हाईकमान परफार्मेंस को लेकर अपने सभी नेताओं के प्रति निर्मम मानी जाती है. एक दिलचस्प तथ्य देखिए कि इस समय भाजपा के मुखिया नितिन नबीन हैं, जब अनुराग ठाकुर भारतीय जनता युवा मोर्चा के मुखिया थे तो उस समय नबीन राष्ट्रीय महासचिव थे. अनुराग उक्त पद पर 2016 तक छह साल की अवधि तक रहे थे. एक दिलचस्प तथ्य ये है कि हिमाचल प्रदेश में अभी किसी सीएम का बेटा सीएम नहीं बना है. इस कड़ी में दो ही नाम प्रमुख हैं-एक अनुराग ठाकुर व एक विक्रमादित्य सिंह. दोनों के ही पिता राज्य के सीएम रहे हैं और ये दोनों अगली पीढ़ी में काफी मजबूती से सक्रिय हैं.

अब कैसे हैं अनुराग के चांस

हिमाचल की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले लेखक-संपादक नवनीत शर्मा कहते हैं-पहले सुन रहे थे कि अनुराग ठाकुर को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान इसलिए नहीं मिला, क्योंकि एनडीए के घटक दलों को भी एडजस्ट करना था, सो वह रह गए. फिर चर्चा चली कि अनुराग को संगठन में भेजा जाएगा. अब यह चर्चा है कि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी.

नवनीत शर्मा आगे कहते हैं कि 'अनुराग युवा हैं, अनुभवी हैं और उनके काम भी उत्तम रहे हैं, लेकिन मेरा यह अनुभव है कि भाजपा और विशेष रूप से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में इंटरनेट मीडिया से कतई तय नहीं होता कि कौन बनेगा, कौन नहीं बनेगा. इसके विपरीत, जिसका नाम कटवाना होता है, उसका नाम उछाल दिया जाता है, ताकि वह आलाकमान के आगे राजनीतिक रूप से महत्वाकांक्षी साबित हो सके. यह नाम उछालने वाले हितैषी नहीं हो सकते, जिस सरकार में यह पता न हो कि अगले पल क्या निर्णय होने वाला है, वहां इतनी लंबी तैयारी के साथ चेहरों को तौला जाए, यह संभव नहीं दिखता.'

वहीं, हिमाचल से संबंध रखने वाले वरिष्ठ मीडिया कर्मी डॉ. संजीव शर्मा लिखते हैं-अनुराग ठाकुर दोनों ही पदों (केंद्रीय मंत्रिमंडल व राज्य में सीएम)के लिए योग्यता रखते हैं. केंद्र में वे पहले कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन इस समय जो चर्चाएं चल रही हैं, ये उन्हें रोकने के लिए ज्यादा मालूम हो रही हैं. हालांकि उनके समर्थक जोश में ऐसी पोस्टों को शेयर कर रहे हैं, लेकिन उनके विपरीत जो गुट है, उसे ये सूट करता है.

डॉ. संजीव लिखते हैं- 'वर्तमान की राजनीति में ये स्थापित तथ्य है कि जिसे किसी खास जगह पर पहुंचने से रोकना हो, उसके प्रति वहां (स्थान विशेष)के सबसे उपयुक्त दावेदार होने की चर्चा छेड़ दो. रही बात सीएम बनने की तो अनुराग ये कह चुके हैं कि ये भाग्य का खेल है, लेकिन भाग्य का खेल यहां भी देखिए कि पुष्कर धामी हारकर भी सीएम बन गए और यही फार्मूला प्रेम कुमार धूमल पर लागू नहीं हुआ.'

खैर, मोदी सरकार के समय ऐसा कई बार हो चुका है कि जिसके नाम की चर्चा होती है, वो पिक्चर से गायब हो जाता है. देखना है कि हिमाचल के युवा छोकरे पर पीएम मोदी व हाईकमान का अनुराग बरसता है या नहीं.

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