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चारधाम यात्रा की तैयारी, प्रदेश भर में होगी मॉक ड्रिल, इन बातों पर रहेगा फोकस

मॉक ड्रिल की तैयारियों को लेकर सचिव आपदा विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई.

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प्रदेश भर में होगी मॉक ड्रिल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 28, 2026 at 8:54 PM IST

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देहरादून: आगामी चारधाम यात्रा को देखते हुए उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन तंत्र को और मजबूत बनाने की कवायद तेज हो गई है. राज्य के सभी 13 जनपदों में 16, 17 और 18 मार्च 2026 को व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी. तैयारियों को लेकर शनिवार को सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी जिलों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

बैठक में तय किया गया कि मॉक ड्रिल केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अलग-अलग तहसील स्तर पर भी अभ्यास कराया जाएगा. इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर आपदा से निपटने की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और स्थानीय प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत बनाना है. अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में संभावित आपदा परिदृश्यों और चयनित स्थलों की जानकारी प्रस्तुत की.

सचिव विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल को वास्तविक परिस्थितियों की तरह आयोजित किया जाए, ताकि कमियों की सही पहचान हो सके और सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें. उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे अभ्यास की निगरानी उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) द्वारा की जाएगी.

सचिव ने कहा कि अब यूएसडीएमए खुद मॉक अभ्यासों का सफल संचालन करने में सक्षम हो चुका है और जनपदों को भी इस स्तर तक तैयार किया जा रहा है कि वे अपने संसाधनों के आधार पर नियमित अभ्यास कर सकें. उनका कहना था कि आपदा के समय त्वरित निर्णय और समन्वित कार्रवाई ही जनहानि को रोकने की कुंजी है. इसी लक्ष्य के साथ यूएसडीएमए 'जीरो डेथ' के उद्देश्य को ध्यान में रखकर कार्य कर रहा है.

तीन दिवसीय मॉक ड्रिल के दौरान भूकंप, वनाग्नि, भूस्खलन, अग्निकांड, जलभराव, बाढ़, मानव-वन्यजीव संघर्ष, नाव पलटने की घटना, बादल फटना, जलाशय विस्फोट, औद्योगिक दुर्घटना, एवलांच, भगदड़ और नदी में डूबने जैसी संभावित घटनाओं पर आधारित परिदृश्यों पर अभ्यास किया जाएगा. इन सभी परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों की तत्परता, संसाधनों की उपलब्धता और विभागीय समन्वय की परख की जाएगी.

अभ्यास के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, वन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां सक्रिय रूप से भाग लेंगी. संचार व्यवस्था, चेतावनी प्रणाली, राहत सामग्री की उपलब्धता और उपकरणों की कार्यशीलता की भी जांच की जाएगी.

दरअसल, चारधाम यात्रा के दौरान राज्य में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है. ऐसे में किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है. आगामी मॉक ड्रिल के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि संभावित जोखिमों की पहले से पहचान कर प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सके.

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