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प्रदेश में मेडिकल यूनिट वैन के 116 एंप्लॉय ने छोड़ी नौकरी, नहीं मिल रही सैलरी

मोबाइल मेडिकल वैन से प्रदेश भर में कुल 2,294 कर्मचारी जुड़े हुए हैं, इस मुद्दे को लेकर NHM का घेराव भी कर्मचारियों ने किया था.

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प्रदेश में मेडिकल यूनिट वैन पर मंडराएं संकट के बादल, भुगतान नहीं होने से छोड़ रहे नौकरी (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 6, 2026 at 8:18 PM IST

7 Min Read
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लखनऊ: यूपी में नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट वैन का संचालन कई सालों से हो रहा है, लेकिन अब इसकी स्थिति बिगड़ गई है. इस यूनिट में तैनात डॉक्टर एवं अन्य कर्मचारियों को पिछले 3 से 4 महीने से वेतन नहीं मिला है. वहीं कुछ ऐसे कर्मचारी हैं, जिन्होंने मोबाइल यूनिट में काम करना भी छोड़ दिया है, क्योंकि उन्हें सैलरी नहीं मिली. ऐसा माना जाता है कि मोबाइल यूनिट ग्रामीण और कस्बों के लिए काफी मददगार साबित हो रहा और इसके संचालन से स्थानीय लोगों को उन्हीं के क्षेत्र में ही इलाज मिल जाता था.

116 कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी: बता दें कि मोबाइल मेडिकल वैन से प्रदेश भर में कुल 2,294 कर्मचारी जुड़े हुए हैं. कुछ एंप्लॉय को स्वास्थ्य विभाग ने नियुक्त किया हैं तो वहीं कुछ कर्मचारियों को नेशनल हेल्थ मिशन की ओर से संविदा पर तैनात किया गया है. वर्तमान में वेतन संबंधित दिक्कतों के कारण करीब 116 कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी है. बचे हुए कर्मचारी आगामी सप्ताह में प्रदर्शन करेंगे. इन कर्मचारियों का भी कहना है कि अगर वेतन की समस्या दूर नहीं हुई और हमें हमारी मेहनत का मानदेय नहीं दिया गया तो नौकरी छोड़ देंगे.

गौरतलब हो, नेशनल हेल्थ मिशन का घेराव करते हुए एंप्लॉय ने प्रदर्शन भी किया था. वहीं आगामी सप्ताह में कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन होने वाला है, इसको लेकर कर्मचारियों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि मानदेय नहीं दिया जाता है तो उस स्थिति में हम प्रदर्शन करेंगे. स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ऑफिस का घेराव किया जाएगा. इसके बावजूद अगर वेतन नहीं मिलेगा तो धीरे-धीरे करके हम सब नौकरी छोड़ देंगे.

यूपी के 54 जिलों में चलाई जा रही मेडिकल वैन: वहीं, उत्तर प्रदेश के 54 जिलों में कुल 172 मोबाइल मेडिकल वैन संचालित की जा रही हैं. इसके संचालन से ग्रामीण क्षेत्र अधिक लाभान्वित हो रहा था. मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर ये वैन विभिन्न गांवों में जाकर मरीजों को निशुल्क उपचार, जांच और दवाएं उपलब्ध कराती हैं. प्रत्येक यूनिट में डॉक्टर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और चालक तैनात होते गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है. मरीज की स्थिति के हिसाब से उन्हें इलाज दिया जाता है अगर मरीज की स्थिति बहुत ज्यादा खराब है तो उन्हें नजदीकी जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता था.

हालांकि, नवंबर 2025 से इन यूनिटों में कार्यरत कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिल पाया है. इससे कई जगह वैन खड़ी होने लगी हैं. कर्मचारियों का कहना है कि वैन संचालित करने वाली कंपनी लगातार भुगतान का आश्वासन दे रही है, लेकिन मानदेय न मिलने से उनकी घरेलू स्थिति प्रभावित हो रही है. अब बिना भुगतान के आगे काम करना उनके लिए संभव नहीं है.

सीएमओ डॉ. एनबी सिंह के मुताबिक NMMU की टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के साथ-साथ संक्रामक रोग नियंत्रण अभियान, दस्तक अभियान और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं. इसके अलावा गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, बांदा जिला कारागार सहित कई जेलों में बंद कैदियों की जांच व उपचार में भी इनका उपयोग किया जाता रहा हैं.

35 लाख मरीजों की जांच फ्री: मोबाइल मेडिकल वैन के नोडल अधिकारी रवि कुमार ने कहा कि इससे बहुत से लोग लाभान्वित हो रहे हैं. अगर आंकड़ों की बात करें तो इससे लाभान्वित होने वाले आंकड़े बहुत अधिक है. करीब साढ़े छह साल के कार्यकाल में एनएमएमयू ने प्रदेश में 1.5 करोड़ से अधिक लोगों को उनके घर पर ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं. 35 लाख से अधिक मरीजों की निशुल्क जांच की गई. साल 2024 में 2926758 मरीजों का उपचार और 643259 की जांच की गई, जबकि साल 2025 में अब तक 2377436 मरीजों का उपचार और 476291 की जांच की जा चुकी है.

उन्होंने आंकड़ों के बारे में बताते हुए कहा कि अक्तूबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार उपचार के मामले में गोरखपुर पहले स्थान पर रहा, जहां 7357 मरीजों का इलाज किया गया. उन्नाव (6217) दूसरे, कुशीनगर (6030) तीसरे, चंदौली (4751) चौथे, वाराणसी (4367) पांचवें और अयोध्या (4419) छठे स्थान पर रहा.

नोडल अधिकारी रवि कुमार ने कहा कि मोबाइल मेडिकल सेवा बंद नहीं होगी. भुगतान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से किया जाता है. पोर्टल में कुछ तकनीकी बदलाव चल रहे थे. बिलों का मूल्यांकन कर भेज दिया गया है. जल्द ही भुगतान हो जाएगा. आगे की प्रक्रिया जारी है.

मुसीबत के समय कारगर साबित हुआ है MMU: उन्होंने कहा कि मोबाइल मेडिकल यूनिटों ने विभिन्न संकटों के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र में जुलाई-अगस्त के दौरान उल्टी-दस्त के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए 2 मोबाइल यूनिटें लगाई गईं, जिन्होंने सामान्य मरीजों का निशुल्क उपचार किया और गंभीर मरीजों को अस्पताल रेफर किया. अगस्त से सितंबर के बीच बाराबंकी, बलरामपुर, कुशीनगर, सीतापुर और लखीमपुर खीरी जैसे बाढ़ प्रभावित गांवों में मोबाइल यूनिटों ने तत्काल उपचार, दवाएं और जागरूकता प्रदान कर लोगों की सहायता की. इसके साथ ही जो डॉक्टर एवं कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें भुगतान जल्द से जल्द किया जाएगा. इसके लिए संबंधित एजेंसी से वार्तालाप की गई है, वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से भी सभी को आश्वासन दिया गया है.

सैलरी के लिए कर्मचारियों ने लगाई गुहार: मोबाइल मेडिकल यूनिट में फार्मासिस्ट के पद पर तैनात राहुल तिवारी ने कहा, पिछले 3 महीने से वेतन नहीं आया है. इस बारे में विभाग कुछ सोचता ही नहीं. यदि सही समय पर भुगतान कर दिया जाए तो हम जैसे अनेक लोगों का घर परिवार चलता रहेगा.

इसी तरह एक अन्य कर्मचारी दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा, हर महीने वेतन नहीं आता है, ऐसे में जो जमा पूंजी रहती है. वो भी खत्म हो जाती है. 3 महीने से वेतन नहीं मिला है. हमारा घर कैसे चलेगा, कई बार स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का घेराव किया है, लेकिन अभी तक कुछ आता पता नहीं है.

कुलदीप कुमार ने कहा कि पिछले 5 साल से मोबाइल मेडिकल वैन यूनिट से जुड़ा हुआ हूं. लगातार काम कर रहा हूं, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ कि समय पर वेतन मिल गया हो. इस बार तो हद ही हो गई. बच्चों की फीस तक नहीं जमा हो पाई है, परीक्षा शुरू होने वाली है. परीक्षा से पहले फीस जमा करनी है, लेकिन वेतन पिछले 3 महीने से नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि अब हमने फैसला कर लिया है कि अगर हर महीने हमें समय पर वेतन नहीं मिलेगा, तो हम सभी नौकरी छोड़ देंगे. कोई दूसरा काम करके जीवन यापन कर लेंगे. लेकिन अपनी 3 महीने के वेतन के लिए हम सभी आगामी सप्ताह में प्रदर्शन करेंगे.

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