मोबाइल की लत परिवारों को तोड़ रही है, फोन एडिक्शन से पति-पत्नी में अनबन, अलवर में काउंसलिंग केस बढ़े
आंकड़ों के अनुसार सोशल मीडिया और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से अलवर-भिवाड़ी में पति-पत्नी के बीच अनबन बढ़ी है.

Published : May 3, 2026 at 3:30 PM IST
अलवर: वर्तमान सोशल मीडिया दौर में मोबाइल का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है और यही मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल अब परिवारिक रिश्तों के दरकने का बड़ा कारण बनने लगा है. परिवार में लोग अब मोबाइल और सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताने लगे हैं, जिससे सदस्यों के बीच संवाद लगभग खत्म हो गया है. इससे परिवार और खासकर पति-पत्नी के बीच रिश्तों में खटास आ रही है. यही कारण है कि दरकते रिश्तों को बचाने के लिए अब बड़ी संख्या में लोग महिला सलाह एवं सुरक्षा केंद्र की मदद लेने को मजबूर हो रहे हैं.
डिजिटल युग में ये केंद्र पारिवारिक सदस्यों की काउंसलिंग कर टूटते रिश्तों को जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र की मुख्य विधिक काउंसलर फूलवती सैनी ने बताया कि केंद्र पर घरेलू हिंसा के साथ-साथ सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग से रिश्तों में अनबन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. उन्होंने बताया कि जनवरी से मार्च तक कुल 41 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें लगभग आधी शिकायतें सोशल मीडिया से जुड़ी अनबन की हैं.
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रिश्तों पर सोशल मीडिया का असर: फूलवती सैनी ने बताया कि रिश्तों पर सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है. आजकल युवा वर्ग मोबाइल पर घंटों समय बिताता है. इससे पति-पत्नी या परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता. छोटी-छोटी बातों से विवाद शुरू होता है और यह धीरे-धीरे बड़े टकराव का रूप ले लेता है. उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्षों को केंद्र पर बुलाकर उनकी बात सुनी जाती है और समाधान निकाला जाता है. कई बार पहली काउंसलिंग में ही दोनों पक्ष सहमत हो जाते हैं, वहीं कुछ मामलों में एक से ज्यादा सत्र करने पड़ते हैं.
कई बार लेनी पड़ती है विधिक सलाह: काउंसलर फूलवती सैनी ने बताया कि काउंसलिंग से सुधार न होने पर विधिक सलाह और पुलिस की मदद भी ली जाती है. ऐसे मामलों को संबंधित पुलिस थाने में सूचित किया जाता है. वहां भी दोनों पक्षों को समझाकर साथ लाने की कोशिश की जाती है. कई बार पुलिस द्वारा पाबंदी भी लगाई जाती है ताकि पीड़ित को सुरक्षा मिल सके.
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महिला सुरक्षा केंद्र बना मददगार: महिला सुरक्षा केंद्र पीड़ित महिलाओं के लिए मजबूत सहारा बन रहा है. यहां पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, मानसिक तनाव और सोशल मीडिया के चलते उत्पन्न अनबन जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को मार्गदर्शन और सहायता दी जाती है. दोनों पक्षों को सुनकर समझाइश दी जाती है, जिससे कई परिवार फिर से खुशहाल हो रहे हैं. यह केंद्र टूटते परिवारों के लिए उम्मीद की किरण साबित हो रहा है. अलवर सेंटर की लीगल काउंसलर फूलवती सैनी ने बताया कि कई शिकायतों में सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताना, अनजान लोगों से चैट करना और पार्टनर की ऑनलाइन गतिविधियों पर शक विवाद की मुख्य जड़ बन रहा है। यह शक धीरे-धीरे रिश्तों को तोड़ने लगा है.
10 साल में 1983 प्रकरण हुए निस्तारित: सेंटर काउंसलर फूलवती सैनी ने बताया कि 2016 से 15 अप्रैल 2026 तक कुल 1983 प्रकरण निस्तारित किए गए हैं. इनमें कई मामलों में पुलिस सहायता ली गई और जरूरतमंद महिलाओं को आश्रय भी उपलब्ध कराया गया. वर्तमान में केंद्र में 10 केस निस्तारण की प्रक्रिया में हैं. सेंटर का मुख्य लक्ष्य पति-पत्नी के बढ़ते विवाद को समाप्त कर उन्हें फिर से एक साथ लाना है ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें.
भिवाड़ी में 300 से ज्यादा घर फिर से बसे: भिवाड़ी में महिला सुरक्षा केंद्र की लीगल काउंसलर दीप्ति ने बताया कि केंद्र की शुरुआत 12 अगस्त 2022 को हुई थी. अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 216 शिकायतें मिलीं, जिनमें से 106 में समझौता हो गया, 5 पुलिस प्रक्रिया में और 42 कोर्ट के माध्यम से निस्तारित हुए. पिछले पांच सालों में केंद्र की मदद से 300 से ज्यादा घरों को फिर से बसाया गया है.
औद्योगिक नगरी में लिव इन के मामले आ रहे ज्यादा: भिवाड़ी जैसे औद्योगिक क्षेत्र में लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े विवाद सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं. नौकरी की तलाश में बाहर से आने वाले लोग यहां लिव इन में रहने लगते हैं. बाद में आपसी मतभेद, हिंसा या मानसिक तनाव की घटनाएं होती हैं. ऐसी महिलाएं केंद्र पहुंचकर आगे के जीवन के लिए सलाह और सहायता ले रही हैं.
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वन स्टॉप सेंटर के आंकड़े
| वर्ष | DALSA | पुलिस सहायता | कानूनी सहायता | आश्रय सहायता | कुल |
|---|---|---|---|---|---|
| 2019-20 | 1 | 13 | 1 | 1 | 17 |
| 2020-21 | 5 | 28 | 1 | 14 | 145 |
| 2021-22 | 6 | 50 | 2 | 85 | 256 |
| 2022-23 | 5 | 53 | 2 | 137 | 388 |
| 2023-24 | 15 | 47 | 2 | 90 | 445 |
| 2024-25 | 35 | 32 | 13 | 49 | 350 |
| 2025-26 | 4 | 94 | 0 | 120 | 640 |
| 2026 | 58 | 11 | 3 | 3 | 45 |
| कुल | 129 | 328 | 23 | 499 | 2286 |
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वन स्टॉप सेंटर के आंकड़े
| वर्ष | पुलिस सहायता | आश्रय सहायता | मदरसा मदत केस | कुल |
|---|---|---|---|---|
| 2016-17 | 26 | 0 | 129 | 129 |
| 2017-18 | 38 | 0 | 214 | 214 |
| 2018-19 | 33 | 0 | 276 | 196 |
| 2019-20 | 46 | 1 | 246 | 168 |
| 2020-21 | 46 | 0 | 222 | 139 |
| 2021-22 | 33 | 0 | 244 | 168 |
| 2022-23 | 42 | 0 | 306 | 258 |
| 2023-24 | 79 | 1 | 324 | 261 |
| 2024-25 | 47 | 0 | 297 | 234 |
| 2025-26 | 20 | 3 | 264 | 214 |
| 2026 (16.0) | 4 | 5 | 23 | 12 |
| Total | 410 | 5 | 2545 | 1993 |
वर्तमान में 10 केस शेष है, जिनकी निस्तारण प्रक्रिया चल रही है.
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