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दिल्ली विधानसभा में विधायक सतीश उपाध्याय ने दूषित पानी, तो उमंग बजाज ने उठाया खेल मैदानों की कमी का मुद्दा, दिया ये समाधान

शीतकालीन सत्र में विधायकों ने युवाओं के लिए मुद्दे से लेकर लंबिक मद्दों पर भी ध्यान आकर्षित किया. पढ़ें विस्तार से..

दिल्ली विधानसभा शीतकालीन सत्र
दिल्ली विधानसभा शीतकालीन सत्र (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : January 9, 2026 at 10:59 PM IST

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नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो सबसे पहले विधायकों ने नियम 280 के तहत अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाया. इनमें मालवीय नगर के विधायक सतीश उपाध्याय, मोती नगर विधायक हरीश खुराना, राजेंद्र नगर विधायक उमंग बजाज, नांगलोई विधायक मनोज कुमार शौकीन, घोंडा विधायक अजय महावर, शाहदरा विधायक संजय गोयल, मटियाला विधायक संदीप सेहरावत, नजफगढ़ विधायक नीलम पहलवान, मुस्तफाबाद विधायक मोहन सिंह बिष्ट और विश्वास नगर के विधायक जितेंद्र महाजन ने भाग लिया.

इनमें सतीश उपाध्याय ने अपने क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई का मुद्दा उठाया, जो पिछली सरकार के समय से लंबित है. वहीं विधायक हरीश खुराना ने अपने क्षेत्र मोती नगर के जवाहर कैंप और चूना भट्टी में अवैध मार्बल कटिंग के मुद्दे को उठाया. राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक उमंग बजाज ने विधानसभा में युवाओं के लिए खेल और शारीरिक गतिविधियों के पर्याप्त अवसर उपलब्ध न होने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि दिल्ली की लगभग 40 प्रतिशत आबादी युवा वर्ग से आती है, लेकिन खेलने और फिटनेस से जुड़ी गतिविधियों के लिए शहर में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं हैं.

सशक्त युवा राष्ट्र की नींव: विधायक उमंग बजाज ने सदन में सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार के जिन सरकारी स्कूलों में खेल मैदान उपलब्ध हैं, उन्हें स्कूल समय के बाद स्थानीय युवाओं के लिए खोला जाए. उन्होंने इसके लिए स्पष्ट नीति बनाए जाने अथवा जमीनी स्तर पर आवश्यक निर्देश जारी किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया. साथ ही कहा कि युवाओं को खेलने, स्वस्थ रहने और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने का अवसर देना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है. सशक्त और सक्रिय युवा ही एक मजबूत दिल्ली और सशक्त राष्ट्र की नींव होते हैं.

चौड़ीकरण का उठाया मुद्दा: वहीं, नियम 280 के तहत ही शाहदरा विधानसभा की वर्षों पुरानी गंभीर समस्या को विधायक संजय गोयल ने उठाया. उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र से गुजरने वाली रोड नं. 58 और रोड नं. 64, जो मेट्रो व फ्लाईओवर अंडरब्रिज के नीचे से होकर गुजरती हैं, उसके चौड़ीकरण और समग्र विकास का प्रस्ताव रखा. उन्होंने बताया कि यह मामला वर्ष 2005 से न्यायालयों में लंबित रहा है. दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क को पूरा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक 150 फुट चौड़ी होने वाली यह लिंक रोड मात्र 27 फुट पर सिमटी हुई है. इसके कारण प्रतिदिन भारी ट्रैफिक जाम लगता है और एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित होती हैं.

फैक्ट्री मालिकों को मिले उनका हक: उन्होंने सदन में मांग रखी कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान जिन फैक्ट्रियों को ध्वस्त किया गया था, उन्हें आज तक न तो वैकल्पिक इंडस्ट्रियल प्लॉट मिला और न ही उचित मुआवजा. केवल नाममात्र का मुआवजा दिया गया, जबकि वास्तविक मूल्य कहीं अधिक है. 200 मीटर की इस लिंक रोड को जल्द ही 150 फुट चौड़ा किया जाए, यातायात को सुचारू बनाया जाए और प्रभावित फैक्ट्री मालिकों को उनका हक पूरा मुआवजा व इंडस्ट्रियल प्लॉट तुरंत दिया जाए, ताकि लोगों को वर्षों से चली आ रही इस समस्या से राहत मिल सके.

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