टैक्सी यूनियन के धरने में पहुंचे MLA सुधीर शर्मा और आशीष शर्मा, सुक्खू सरकार पर साधा निशाना
विधायक सुधीर शर्मा और आशीष शर्मा ने टैक्सी यूनियन की मांगों का किया समर्थन. सुक्खू सरकार पर जमकर साधा निशाना.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 24, 2026 at 10:43 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में ऑल हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर एसोसिएशन ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया. धरने में भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और आशीष शर्मा भी पहुंचे और टैक्सी ऑपरेटरों के आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने टैक्सी यूनियन ने वाहनों की फिटनेस अवधि से जुड़े नियमों में राहत देने, बाहरी टैक्सियों पर लगाए जा रहे अतिरिक्त टैक्स की समीक्षा करने और अन्य लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है.
इस दौरान भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि टैक्सी ऑपरेटर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और कई जगहों पर यूनियन के सदस्य आमरण अनशन तक कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है. विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि टैक्सी ऑपरेटरों की सबसे बड़ी चिंता वाहनों की फिटनेस अवधि को लेकर है. उनके मुताबिक केंद्र सरकार के स्तर पर वाहनों के लिए 15 वर्ष की फिटनेस अवधि का प्रावधान है, जबकि हिमाचल में इसे 12 वर्ष रखा गया है.
विधायक सुधीर शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, "मुख्यमंत्री ने अपनी ऑल्टो गाड़ी की फिटनेस अवधि 25 साल करवा ली, लेकिन सरकार की हालत ऐसी है कि कांग्रेस सरकार की एक साल की भी फिटनेस नहीं बची है. टैक्सी चलाना हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का साधन है. ऑपरेटर अपने वाहनों में निवेश करते हैं और इसी व्यवसाय से परिवारों का पालन-पोषण करते हैं. ऐसे में सरकार को उनकी समस्याओं को नियम-कायदों के साथ-साथ मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए".
सुधीर शर्मा ने सरकार से टैक्सी यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की. उन्होंने कहा कि समय रहते फैसला होने से हजारों टैक्सी ऑपरेटरों और उनके परिवारों को राहत मिल सकती है. प्रदेश के पर्यटन कारोबार को बढ़ाने में टैक्सी ऑपरेटरों की अहम भूमिका है. हिमाचल आने वाले पर्यटक बड़ी संख्या में टैक्सियों का इस्तेमाल करते हैं. बाहरी टैक्सियों से अतिरिक्त टैक्स वसूले जाने से प्रदेश के पर्यटन कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे स्थानीय टैक्सी ऑपरेटरों के हित सुरक्षित रहें और पर्यटकों को भी परेशानी न हो.
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