सुख की सरकार से विधायकों को चाहिए ये 'सुख', अपनी जनता के लिए रखीं ये मांगें
बैठक में विधायकों ने साफ शब्दों में कहा कि जनता की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 6, 2026 at 7:34 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में विकास और जनता की बुनियादी जरूरतों को लेकर एक बार फिर सरकार और विधायकों के बीच मंथन शुरू हो गया है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायकों की प्राथमिकताएं तय करने को लेकर शुक्रवार को शिमला स्थित राज्य सचिवालय में अहम बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने की. इस बैठक में ऊना, हमीरपुर और सिरमौर जिलों के विधायकों ने अपनी-अपनी विधानसभा की जमीनी तस्वीर सरकार के सामने रखी. सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार जैसे मुद्दों पर विधायकों ने साफ कहा कि अगर जनता को सरकार का "सुख" चाहिए, तो इन मांगों पर तुरंत काम जरूरी है.
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब प्रदेश पहले से ही वित्तीय दबाव की चर्चा में है. इसके बावजूद विधायकों ने साफ शब्दों में कहा कि जनता की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. बैठक में जहां सत्तापक्ष के विधायकों ने विकास योजनाओं के लिए बजट और स्वीकृतियों का मुद्दा उठाया, वहीं विपक्ष की ओर से यह सवाल भी उठा कि क्या ये मांगें जमीन पर उतरेंगी या फिर फाइलों में ही सिमट कर रह जाएंगी.
चिंतपूर्णी: धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर जोर
ऊना जिले की चिंतपूर्णी विधानसभा से विधायक सुदर्शन बबलू ने चिंतपूर्णी मंदिर के विस्तार के लिए 130 करोड़ रुपये दिए जाने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया. इसके साथ ही उन्होंने स्तोथर पुल और चौकी-मन्यार कॉलेज का कार्य जल्द पूरा करने की मांग की. विधायक ने जोल में सब फायर स्टेशन खोलने और क्षेत्र की सड़कों को मजबूत करने पर भी जोर दिया.
गगरेट: अस्पताल, स्कूल और सीवरेज की मांग
गगरेट के विधायक राकेश कालिया ने गगरेट अस्पताल के लिए दो करोड़ रुपये देने पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया, लेकिन शेष राशि जल्द जारी करने की मांग भी रखी. उन्होंने भद्रकाली आईटीआई भवन, छह सरकारी स्कूलों के भवन निर्माण और दौलतपुर चौक व मुबारकपुर में सीवरेज सुविधा की मांग उठाई. फ्लड प्रोटेक्शन के लिए भी अतिरिक्त बजट की जरूरत बताई गई.
ऊना: शहर की सीवरेज और ड्रेनेज बड़ी समस्या
ऊना विधायक सतपाल सत्ती ने नगर निगम ऊना में शामिल नए गांवों के लिए सीवरेज स्कीम बनाने की मांग रखी. उन्होंने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था मजबूत करने, संतोषगढ़-ऊना पुल के निर्माण और बीडीओ कार्यालय का काम पूरा करने की बात कही. इसके साथ ही भभौर साहिब सिंचाई योजना को सुदृढ़ करने की भी मांग रखी गई.
कुटलैहड़: पानी और सड़क परियोजनाओं पर फोकस
कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा ने जल शक्ति विभाग को विभिन्न योजनाओं के लिए 36.89 करोड़ रुपये देने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया. साथ ही नई पेयजल योजनाओं के लिए 14.93 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की बात कही. बंगाणा सीवरेज योजना, बंगाणा-शांतला और थानाकलां-भाखड़ा सड़क सुधार की मांग भी बैठक में रखी गई.
भोरंज और सुजानपुर: आधारभूत ढांचे की कमी
भोरंज विधायक सुरेश कुमार ने लदरौर-पट्टा पेयजल योजना को जल्द पूरा करने की मांग की. नगर पंचायत में बुनियादी ढांचा मजबूत करने, सब जज कोर्ट के नए भवन और सीवरेज योजना की जरूरत बताई. वहीं सुजानपुर विधायक रणजीत सिंह ने बीडीओ ऑफिस और पीएचसी चबूतरा भवन का काम पूरा करने, सड़कों के उन्नयन और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने का मुद्दा उठाया.
बड़सर: परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत
बड़सर विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने बड़सर और भोटा में नए बस अड्डे बनाने की मांग रखी. स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, रैली जजरी स्कूल के नए भवन और पीएचसी चकमोह को शुरू करने का आग्रह किया गया. दियोटसिद्ध से वॉल्वो बस और बड़सर-एम्स बस सेवा की भी मांग रखी गई.
सिरमौर: पर्यटन, स्वास्थ्य और सड़कें
पच्छाद विधायक रीना कश्यप ने हाब्बन घाटी, शिरगुल महाराज और भूरेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र में पर्यटन संभावनाओं पर जोर दिया. नाहन विधायक अजय सोलंकी ने मेडिकल कॉलेज में कॉर्डियोलॉजी विभाग, नर्सों के पद और बिजली की लो-वोल्टेज समस्या का मुद्दा उठाया. श्री रेणुकाजी विधायक विनय कुमार ने झील की डिसिल्टिंग, चिड़ियाघर में शेर लाने और सड़क नेटवर्क मजबूत करने की मांग रखी.
पांवटा साहिब: उद्योग और सिंचाई पर जोर
पांवटा साहिब विधायक सुखराम चौधरी ने अधूरे शिक्षण भवनों को जल्द पूरा करने, नावघाट पुल के निर्माण और गिरी सिंचाई नहरों की मरम्मत की मांग की. औद्योगिक क्षेत्र में बिजली लोड की समस्या का भी मुद्दा उठाया गया.
बैठक के अंत में राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने उम्मीद जताई कि विधायकों के सुझावों से प्रदेश में विकास को गति मिलेगी. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये मांगें सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगी या फिर जनता को वास्तव में "सुख" का अहसास होगा.
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