लातेहार में एसटी समाज के लोगों के अवैध घर तोड़ने की दी गई है सूचना, प्रकाश राम का ध्यानाकर्षण, चंदनडीह के बेघरों का भी मामला उठाया
विधानसभा में लातेहार में एसटी समाज के लोगों के अवैध घर तोड़ने का मुद्दा उठा. लातेहार विधायक की सूचना पर मंत्री ने संज्ञान लिया.

Published : February 27, 2026 at 7:46 PM IST
|Updated : February 27, 2026 at 7:57 PM IST
रिपोर्ट- राजेश कुमार सिंह
रांची: लातेहार सदर के तापा खास में 40-50 वर्षों से रह रहे एसटी समाज के लोगों के अवैध निर्मित घरों को तोड़ने की सूचना दी गई है. प्रशासन की तरफ से आए दिन दवाब बनाया जा रहा है. लातेहार के विधायक प्रकाश राम ने ध्यानाकर्षण के जरिए सरकार के समक्ष इस गंभीर मसले को रखा. उन्होंने कहा कि 2011-12 में भी चंदनडीह गांव के सैकड़ों लोगों के घर तोड़े गये थे. लंबे आंदोलन के बाद 2-2 डिसमिल जमीन दी गई. लेकिन आज तक उजड़े परिवार वहां बसाए नहीं जा सके हैं. लाचारी में किसी तरह झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं. उन 155 लोगों को बसाया जाना चाहिए. साथ ही तापा खास के 40-50 लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए.
वर्षों से बसे होने और भूमिहीन होने का प्रमाण जरूरी
जवाब में मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि अगर 40-50 वर्षों से किसी गैर मजरुआ जमीन पर वास करने का प्रमाण हो तो वैसे सूरत में बसाने की जवाबदेही राज्य सरकार की होगी. अगर ऐसे लोग भूमिहीन होते हैं तो उनको जमीन मुहैया कराकर बसाया जाता है. रही बात चंदनडीह के विस्थापितों की तो वे लोग संबंधित जगह पर सरना-मसना होने की वजह से नहीं जा पा रहे हैं. जबकि डीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, नावाडीह की जमीन धार्मिक स्थल के रूप में चिन्हित नहीं है. लिहाजा, वे लोग वहां जाकर बस सकते हैं. फिर भी सवाल उठ रहे हैं तो डीसी से फिर रिपोर्ट मंगवाई जाएगी.
डीसी की रिपोर्ट से इतर है सीओ की रिपोर्ट - प्रकाश राम
इस पर प्रकाश राम ने सीओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वहां पर आदिवासी समाज के लोग पूजा-पाठ करते हैं. वहां जतरा मेला लगता है. लातेहार जिला के सर्वे में काफी गड़बड़ी है. लिहाजा, पता लगाना मुश्किल है कि लोग अवैध तरीके से रह रहे थे. अगर 40-50 सालों से रह रहे हैं तो उनको बसाने की व्यवस्था करनी चाहिए. इसलिए दूसरी जगह जमीन देकर बसाना चाहिए.
मामले में नेता प्रतिपक्ष ने किया हस्तक्षेप
इस मामले में नेता प्रतिपक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार को पहले सर्वे कराना चाहिए. अगर भूमिहीन की बात है तो उनके प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए. उनको यह नहीं कहना चाहिए कि आपने गैर मजरुआ जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है. उनको उजाड़ने का मतलब है पाप करना. यह देखना चाहिए कि क्या वे वाकई अतिक्रमणकारी हैं. अगर उनके पास जमीन है ही नहीं तो फिर वे कहां जाएंगे. दो डिसमिल जमीन पर आदिवासी समाज के लोग कैसे रह पाएंगे क्योंकि वे अपने साथ जानवर भी रखते हैं.
सात डिसमिल तक हो सकती है बंदोबस्ती
नेता प्रतिपक्ष के सुझाव पर मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि 7 डिसमिल तक बंदोबस्ती की जा सकती है. बशर्ते मांग की जाए. जंगल में कोई खेती करता है तो उन्हें पट्टा दिया जाता है. रही बात प्रकाश राम की तो उनके कहे अनुसार सीओ वाली रिपोर्ट की पड़ताल कर ली जाएगी. चूंकि कई सवाल उठे है, इसलिए डीसी से रिपोर्ट मंगवायी जाएगी. जवाब में विधायक ने कहा कि चंदनडीह के विस्थापित लोग बसने के लिए नावाडीह गये थे. लेकिन वहां टकराव वाली नौबत आ गई थी. लिहाजा, बसाने के लिए प्रशासन को सहयोग करना चाहिए.
विधायक प्रकाश राम ने कहा कि तापा खास के लोगों के मामले को गंभीरता से देखना चाहिए. वहां प्रशासन के स्तर पर जांच कराना चाहिए कि वे लोग कब से रह रहे हैं. सवाल जवाब के बाद मंत्री ने कहा कि नये सीरे से डीसी से रिपोर्ट मंगवाई जाएगी. देखा जाएगा कि सीओ की रिपोर्ट से उनकी रिपोर्ट अलग क्यों हैं. इस आधार पर संबंधित लोगों को बसाने का काम किया जाएगा.
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