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'डॉक्टर और अच्छे डॉक्टर में जमीन-आसमान का अंतर', न्यूरो सर्जन से MLA बने जनकराज की नसीहत भरी 'घुट्टी'

मरीज से मारपीट मामले के बाद विधायक ने डॉक्टरों को नसीहत दी और सरकार से सवाल किए.

MLA जनकराज की नसीहत
MLA जनकराज की नसीहत (FILE)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : December 25, 2025 at 3:58 PM IST

6 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला में डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट पर अब सियासत गरमाने लगी है. भरमौर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक डॉ. जनकराज ने डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट को लेकर राज्य सरकार को घेरते हुए सवाल उठाए. साथ ही न्यूरो सर्जन से विधायक बने डॉ. जनकराज ने एक अच्छा डॉक्टर होने की परिभाषा बताई.

डॉ. जनकराज ने सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "सरकार डॉक्टर पर कार्रवाई करके पल्ला झाड़ रही है, जनता की आंखों में धूल झोंक रही है. बिना ये सोचे की ओवरलोडेड सिस्टम से डॉक्टरों का मनोबल और टूटेगा और मरीजों की मुसीबत बढ़ेगी. आईजीएमसी में हुआ झगड़ा कोई सामान्य मामला नहीं बल्कि यह सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की घोर नाकामी का करारा सबूत है. यह व्यवस्था परिवर्तन खोखले दावों वाली स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की नाकामी का जीता-जागता प्रमाण है."

डॉ. जनकराज ने सरकार से पूछे ये सवाल

  1. क्या मरीज अपराधी हैं?
  2. क्या अस्पताल प्रताड़ना केंद्र बन गए हैं? एक बेड पर 2-3 मरीज, जांच और ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है.
  3. क्या डॉ. और मरीज एक दूसरे के दुश्मन हैं ?

विधायक डॉ. जनकराज ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने प्रदेश के अस्पतालों को अव्यवस्था का अड्डा बना दिया है. विधायक ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा-

  • अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है.
  • मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है.
  • अस्पतालों में डॉक्टरों और मरीजों के लिए सुरक्षा का अभाव है.
  • अस्पतालों में शिकायत निवारण की कोई व्यवस्था नहीं है.

"ये सब सरकार की नीतिगत विफलता का सीधा परिणाम है. डॉक्टर और मरीज दोनों पीड़ित हैं. इसका सिर्फ एक कारण है, सरकार की लापरवाही. हमने सदन में पूछा था कि सरकार ने अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने और स्टाफ की कमी को पूरा करने की बजाए 180 करोड़ के छह रोबोट खरीदना जरूरी क्यों समझा? क्या ये फैसला लोगों की मांग और उनकी जरूरतों के आधार पर लिया गया था? क्योंकि लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार लोगों के हितों के लिए काम करती है संविधान में ऐसा लिखा है." - डॉ. जनकराज, भरमौर विधायक

डॉक्टर होने के नाते अपने अनुभव किए साझा

वहीं, डॉ. जनकराज ने एक डॉक्टर और एक अच्छे डॉक्टर को लेकर भी अपने अनुभव सोशल मीडिया पर साझे किए. उनका कहना है कि "एक डॉक्टर और एक अच्छे डॉक्टर में जमीन-आसमान का फर्क होता है." बता दें कि राजनीति में आने से पहले और विधायक बनने से पहले डॉ. जनकराज देश के जाने माने न्यूरो सर्जन रहे हैं. वे सुपर स्पेशलिस्ट डिग्री धारक हैं. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से न्यूरो सर्जरी में गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. जनक राज ने जनरल सर्जरी में भी एमएस की है.

डॉक्टर और अच्छे डॉक्टर में अंतर

सिर्फ डॉक्टर: डॉ. जनकराज ने कहा कि एक डॉक्टर सिर्फ बीमारी देखता है. वो डायग्नोसिस करता है, दवा लिखता है और आगे बढ़ जाता है. उसके लिए मरीज एक “केस” होता है, एक नंबर, एक फाइल होता है. उसकी आवाज में ठंडक होती है. नजरें घड़ी पर टिकी रहती हैं और शब्दों में जल्दबाजी होती है. वो सही हो सकता है, कुशल हो सकता है, लेकिन उसका इलाज सिर्फ शरीर तक ही पहुंचता है. दिल तक नहीं. मरीज उसके पास से उठता है तो शरीर में दवा तो होती है, लेकिन दिल में एक खालीपन, एक ठेस होती है.

अच्छा डॉक्टर: वहीं, एक अच्छा डॉक्टर इंसान देखता है. वो मरीज के चेहरे पर दर्द पढ़ता है, उसकी आंखों में डर को पहचानता है. वो धीरे से मरीज का हाथ थामना है और मुस्कुराकर कहता है, "चिंता मत कीजिए, मैं हूं ने आपके साथ. सब ठीक हो जाएगा." एक अच्छा डॉक्टर मरीज का नाम लेकर पुकारता है, उसकी बात पूरी सुनता है, और जवाब में प्रेमपूर्वक समझाता है जैसे कोई अपना समझा रहा हो. उसकी आवाज में करुणा करुणा होती है, व्यवहार में सम्मान होता है. वह जानता है कि दवा के साथ-साथ आशा भी एक दवा है और वो आशा वो खुद होता है. जब मरीज उसके पास से उठता है तो तो दिल में एक नई रोशनी लेकर, एक नई हिम्मत लेकर उठता है.

"अच्छा डॉक्टर समझता है कि अस्पताल सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं है, बल्कि पीड़ित मानवता का आश्रय स्थल है. जहां हर आंसू को पोंछा जाना चाहिए, हर डर को गले लगाया जाना चाहिए. वहां हर शब्द एक घाव भर सकता है या नया घाव दे सकता है. आज का शिक्षित और जागरूक समाज यही मांग कर रहा है कि हमारे अस्पतालों में सिर्फ मशीनें और दवाइयां नहीं, बल्कि संवेदनशील दिल और सम्मानजनक शब्द भी हो, क्योंकि अन्ततः इलाज सिर्फ शरीर का नहीं, मन का भी है, जिसकी सच्ची दवा इंसानियत और करुणा है." - डॉ. जनकराज, भरमौर विधायक

नेता प्रतिपक्ष ने की मामले में सरकार से दखल की मांग

वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए घटना की निंदा की. जयराम ठाकुर ने कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक है. चिकित्सा एक नोबल प्रोफेशन है. मरीज तनाव में अगर कुछ ऊंच-नीच करता है तब भी स्थिति को धैर्य से संभाना चाहिए. जयराम ठाकुर ने पूरे मामले की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में दखल देकर स्थिति को सामान्य करे. यह घटना पूरे हिमाचल में चिंता का विषय बनी हुई है.

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