Explainer: सरकार 55% जमीन वापस करेगी, चार गुना कीमत मिलेगी, फिर भी किसान इतने परेशान क्यों?
बिहार में 11 टाउनशिप को लेकर जहां उत्साह है, वहीं चार गुना कीमत के बावजूद किसान परेशान हैं. पढ़ें वरुण ठाकुर की रिपोर्ट..

Published : April 28, 2026 at 8:16 PM IST
दरभंगा: बिहार सरकार मास्टर प्लान के तहत राज्य में 11 जगहों पर टाउनशिप बसाने जा रही है. 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के डेवलपमेंट के लिए जगह भी चिह्नित हो चुकी है और जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है. जिस वजह से उन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है. इस सरकारी आदेश के बाद किसानों की टेंशन बढ़ गई हैं. सभी किसानों की अपनी जरूरत है. कई किसान तो ऐसे हैं, जो जमीन बेचकर बेटी की शादी करने वाले थे लेकिन अब वह बुरी तरफ फंस गए हैं.
दरभंगा में मिथिला सैटेलाइट टाउनशिप: उत्तर बिहार के विकास को एक नई ऊंचाई देने के लिए मिथिलांचल की राजधानी कही जाने वाली दरभंगा में मिथिला नाम से सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया है. यह आधुनिक शहर दरभंगा एयरपोर्ट से मात्र 1.5 किलोमीटर की दूरी पर बसाया जाएगा. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रशासन ने जिले के 102 गांवों को चिह्नित कर लिया है, जहां ग्रेटर नोएडा जैसे फॉर्मूला पर भविष्य में एक सुनियोजित और स्मार्ट सिटी की नींव रखी जाएगी.
जमीन की खरीद बिक्री पर रोक: दरअसल बीते दिनों बिहार में नई नवेली सरकार कि पहली कैबिनेट की बैठक में फैसले के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने इन चिह्नित 102 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और किसी भी नए निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. यह पाबंदी 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी. सरकार का तर्क है कि अनियोजित निर्माण और भू-माफियाओं की सक्रियता को रोकने के लिए यह 'फ्रीज' आवश्यक है, ताकि शहर का मास्टर प्लान सुव्यवस्थित तरीके से जमीन पर उतारा जा सके.
राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ग्यारह ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विकास हेतु विशेष क्षेत्र एवं कोर क्षेत्र का चयन किया गया है। इन क्षेत्रों के नामकरण के साथ-साथ भूमि के क्रय-विक्रय, हस्तांतरण, भूमि विकास एवं भवन निर्माण पर… pic.twitter.com/OiOuF8n83u
— IPRD Bihar (@IPRDBihar) April 22, 2026
"राज्य में प्लान्ड अर्बन डेवलपमेंट को नई दिशा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के डेवलपमेंट के लिए खास एरिया और कोर एरिया चुने गए हैं. इन एरिया के नामकरण के साथ-साथ जमीन की खरीद-बिक्री, ट्रांसफर, जमीन डेवलपमेंट और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन पर रोक लगाने की मंजूरी दे दी गई है."- विनय कुमार, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, अर्बन डेवलपमेंट और हाउसिंग डिपार्टमेंट, बिहार
सरकारी के आदेश से किसान परेशान: इस आदेश के बाद जहां बहुत लोगों में खुशी है तो वहीं दूसरी ओर भू-माफिया और गरीब किसान जो अपनी या फिर किसी कारण से जमीन बेचने के नाम पर पैसा उठा लिएं थे, उनके लिए चिंता का सबब बन गया हैं. आदेश के अचानक लागू होने से उन गरीब किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिन्होंने अपनी बेटियों की शादी या अन्य जरूरी कामों के लिए जमीन बेचने का सौदा कर रखा था.

रजिस्ट्री पर रोक लगने के कारण वे अब अपनी ही जमीन नहीं बेच पा रहे हैं, जिससे उनकी पारिवारिक योजनाएं अधर में लटक गई हैं. कई लोगों ने जमीन के अग्रिम राशि भी ले ली थी लेकिन अब रजिस्ट्री नहीं होने के कारण उन पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ गया है.

कैसे होगी बेटी की शादी?: बहादुरपुर प्रखंड के शाहपुर निवासी कामाख्या सिंह का हाल भी ऐसा ही है. उन्होंने बताया कि मई में उनकी बेटी की शादी तय थी. जमीन बेचकर वह शादी करने वाले थे लेकिन इसी बीच सरकार का आदेश आ गया कि 31 मार्च 2027 तक जमीन नहीं बेच सकते. अब उनके सामने समस्या ये है कि वह शादी के लिए पैसे कहां से लाएंगे? इस वजह से वह परेशान हैं. चिता सता रही है कि समय पर पैसे का इंतजाम नहीं हुआ तो कहीं बेटी की शादी ही ना टूट जाए.

"मेरी बेटी का अगले महीने शादी होनी है. सरकार का क्या है घर बैठें प्लान बना दिया जाता है. जनता को क्या कठिनाई है, यह कोई नहीं देखता हैं. अब जमीन बेचेंगे नहीं तो पैसे कहां से लाएंगे. अगर पैसा नहीं हुआ तो शादी कैसे होगी?:"- कामाख्या सिंह, किसान

किसान कामाख्या सिंह कहते हैं, 'इस योजना आने से बहुत लोग खुश है तो बहुत लोग नाराज हैं. नाराज होने वाले में हम भी शामिल हैं. जमीन लोग खरीद कर रखता है. जो बेटी बेटा का विवाह, बच्चे की पढ़ाई-लिखाई करेंगे तो मजबूरी के लिए भी रखता है. सरकार का पहला आदेश हुआ है कि लोग जमीन नहीं बेच सकते हैं. सरकार को जमीन लेना है ले सकती है लेकिन जमीन ब्रिकी पर रोक नहीं लगनी चाहिए थी.'

'तुगलगी फरमान है ये': वहीं, दरभंगा सदर प्रखंड के शीशो निवासी मदन कुमार मंडल ने इस आदेश को तुगलगी फरमान बताया है. वे कहते हैं कि सरकार को जनता को विश्वास में लेकर फैसला लेना चाहिए. बेटा और बेटी की शादी है. जमीन बेचकर जो पैसे आते, उसी से खर्च करते लेकिन अब तो रास्ता ही बंद हो गया.
"इस आदेश से हमलोग दहशत के माहौल में हैं. हमारे घर में भी मेरी बेटी और बेटा का शादी है. बड़ा आयोजन की तैयारी में थे. लोग संपत्ति इसलिए रखता है कि सुख-दुख में काम आए लेकिन सरकार ने एक झटके में रोक लगा दिया. हमलोग इस आदेश के बाद चिंता में हैं कि कैसे क्या होगा?"- मदन कुमार मंडल, किसान

क्या बोलीं अधिकारी?: जिला अवर भूमि निबंधन पदाधिकारी स्वीटी सुमन ने बताया कि आदेश निकलने के बाद सभी 102 गांव से संबंधित भूमि दस्तावेज के निबंधन के लिए रोक लगाई गई है. इनमें दरभंगा सदर, बहादुरपुर और केवटी ब्लॉक के 102 मौजे के अलावे बाकी सभी जगह की जमीन पहले की तरह खरीद-बिक्री की जा सकती है. अभी कोई संशोधन का आदेश नहीं है.
"नगर विकास विभाग की तरफ से दरभंगा के कुल 102 मौजों को प्रतिबंधित किया गया है जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण- विनिर्माण के क्षेत्रों के लिए. ये 102 मौजे दरभंगा, बहादुरपुर और केवटी अंचलों में समाहित हैं और ये ग्रामीण क्षेत्रों को सनिहित करते हैं. इसके अलावे शेष जमीन पहले की भांति बिक्री के लिए स्वतंत्र हैं. "- स्वीटी सुमन, जिला अवर भूमि निबंधन पदाधिकारी, दरभंगा

17400 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना: सरकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार मिथिला टाउनशिप को करीब 17400 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है. इसकी सीमाएं उत्तर में केवटी का बरही गांव, दक्षिण में सदर का धोईघाट, पूरब में भुस्कौल और पश्चिम में शीशो गांव तक तय की गई हैं. इस बड़े भू-भाग को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा. टाउनशिप के लिए बहादुरपुर, केवटी और सदर अंचल के 102 गांव चिन्हित किए गए हैं. इन चिह्नित इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और नए निर्माण कार्यों पर 31 मार्च 2027 तक अस्थायी रोक लागू रहेगी.
नोएडा-गुरुग्राम की तर्ज पर होगी विकसित: इस नई टाउनशिप को नोएडा और गुरुग्राम की तर्ज पर विकसित करने की योजना है. मास्टर प्लान के तहत यहां चौड़ी सड़कें, आधुनिक ड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम, सार्वजनिक पार्क, ओपन स्पेस, कम्युनिटी एरिया और कमर्शियल जोन बनाए जाएंगे. चूंकि यह दरभंगा एयरपोर्ट और निर्माणाधीन एम्स के पास है, इसलिए यहां बड़े अस्पतालों, होटलों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी विशेष जगह चिह्नित की जाएगी.

क्या-क्या होंगी सुविधाएं?: योजना के तहत आवासीय और व्यावसायिक जोन अलग-अलग चिह्नित किए जाएंगे. सड़कों का चौड़ीकरण, आधुनिक ड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम, ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्क, ओपन स्पेस और कम्युनिटी एरिया विकसित किए जाएंगे. उद्देश्य यह है कि टाउनशिप एक सुव्यवस्थित और टिकाऊ शहरी मॉडल के रूप में सामने आए.
बिहार में 11 जगहों पर टाउनशिप बनेंगी: जिन 11 शहरों को सैटेलाइट टाउनशिप के लिए चुना गया है, उनमें दरभंगा (मिथिला) के अलावे पटना (पाटलिपुत्र), छपरा (सारण), सोनपुर (हरिहरनाथपुर), सीतामढ़ी (सीतापुरम), मुजफ्फरपुर (तिरहुत), सहरसा (कोसी), पूर्णिया (पूर्णिया), भागलपुर (विक्रमशिला), गया (मगध), मुगेर (अंग) शामिल है.
कैसे बंटेगी टाउनशिप की विकसित जमीन?: टाउनशिप की जमीन में से 55 फीसदी जमीन मालिकों के लिए, 22 प्रतिशत जमीन सड़कों के लिए, 15% जमीन सरकार के पास रहेगी, जबकि 5% जमीन सार्वजनिक सुविधा के लिए और 3 फीसदी जमीन कमजोर वर्ग के लिए होगी.
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