कोडीन युक्त कफ सिरप का नशे के लिए दुरुपयोग होने पर लगेगा NDPS एक्ट, हाईकोर्ट ने 19 आरोपियों की जमानत खारिज की
कोर्ट ने ऐसे कई ट्रक चालकों, सहायकों और छोटे खुदरा विक्रेताओं को जमानत दे दी, जो केवल सीलबंद पार्सल ले जा रहे थे.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 1, 2026 at 10:12 PM IST
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सिरप (जैसे फेंसिडिल, एस्कफ आदि) के अवैध भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने इस मामले में 80 जमानत याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, एजीए प्रथम परितोष कुमार मालवीय, चंदन अग्रवाल ने ज़मानत याचिकाओं का घोर विरोध किया.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल केवल चिकित्सीय (दवा) उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, तो वह एनडीपीएस कानून के तहत नहीं आएगा. लाइसेंस की आड़ में या बिना लाइसेंस के इसे नशे के उद्देश्य से डायवर्ट, स्टॉक या बेचा जाता है, तो यह एनडीपीएस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा.
हाईकोर्ट ने मामले में विस्तृत व्याख्या करते हुए दो प्रमुख सवालों के जवाब दिए. पहला यदि किसी दवा विक्रेता या लाइसेंस धारक द्वारा निर्धारित मात्रा (0.2 प्रतिशत या 100 मिग्रा प्रति खुराक से कम) वाले कोडीन सिरप का परिवहन या बिक्री वैध रूप से चिकित्सीय उपयोग के लिए की जा रही है, तो इसे मादक पदार्थ नहीं माना जाएगा और इस पर एनडीपीएस एक्ट लागू नहीं होगा.
दूसरा यह कि यदि कफ सिरप का निर्माण भले ही दवा के रूप में हुआ हो, लेकिन उसे नशे या तस्करी के उद्देश्य से फर्जी फर्मों, बोगस बिलों या बिना वैध दस्तावेजों के भेजा/बेचा जाता है, तो पूरी सामग्री को मादक पदार्थ मानकर एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत कठोर कार्रवाई होगी.
19 आरोपियों की जमानतें खारिज : कोर्ट ने भोला प्रसाद (शैली ट्रेडर्स), दिवेश जायसवाल (डीएसए फार्मा), अंकुश सिंह (महाकाल मेडिकल), अभिनव कुमार यादव, बादल आर्य और हर्ष अग्रवाल जैसे आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. जांच में पाया गया था कि इनके द्वारा करोड़ों रुपये के फर्जी ई-वे बिल और फर्जी फर्में बनाकर लाखों बोतलों को अवैध रूप से खुले बाजार व अन्य राज्यों/देशों में नशे के लिए खपाया जा रहा था.
ड्राइवर, खलासी और छोटे खुदरा विक्रेताओं को मिली जमानत: कोर्ट ने ऐसे कई ट्रक चालकों, सहायकों और छोटे खुदरा विक्रेताओं को जमानत दे दी, जो केवल सीलबंद पार्सल ले जा रहे थे या जिन्हें कार्टन के भीतर छिपे कफ सिरप की जानकारी नहीं थी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई रिटेलर नियमित व्यवसाय के दौरान बिना डॉक्टर के पर्चे के मामूली मात्रा में कफ सिरप बेचता है, तो वह केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का उल्लंघन है, न कि सीधे एनडीपीएस एक्ट का मामला.
अदालत ने उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त को निर्देश दिया कि सभी ड्रग इंस्पेक्टर को यह आदेश जारी करें कि मेडिकल स्टोर्स पर कमियां पाए जाने पर सीधे एनडीपीएस के तहत मुकदमा दर्ज करने से पहले संबंधित शासकीय अधिवक्ता से कानूनी राय अवश्य लें.
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