मिशन स्कूल के फादर को उम्रकैद, महिला स्टाफ को 7-7 साल कारावास, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला बदला
हाईकोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता की गवाही अपने आप में पूर्ण है और उसे किसी अन्य गवाह की जरूरत नहीं है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 25, 2026 at 3:12 PM IST
बिलासपुर: कोरिया जिले के मिशन स्कूल यौन उत्पीड़न मामले में निचली अदालत के फैसले को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पलट दिया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत द्वारा आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने के फैसले को त्रुटिपूर्ण बतााया. स्कूल के फादर को उम्रकैद की सजा सुनाई है. घटना को छिपाने वाली दो महिला स्टाफ को 7-7 साल कारावास की सजा दी है.
कोरिया स्थित एक स्कूल में चौथी क्लास में पढ़ने वाली 9 वर्षीय छात्रा हॉस्टल में रहती थी. उसके साथ 9 सितंबर 2015 को दुष्कर्म हुआ था. पीड़िता ने बताया कि वह रात को बाथरूम गई थी, जहां कुछ छिड़का हुआ था, जिससे उसे चक्कर आने लगे. इसके बाद जब वह अपने कमरे में सो रही थी, तब उसके साथ दुष्कर्म किया गया. छात्रा ने सुबह इसकी शिकायत स्कूल की सिस्टर से की तो, उन्होंने मदद करने की बजाय उसे छड़ी से पीटा और किसी को न बताने की धमकी दी.
इस मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया. 9 जनवरी 2017 को बैकुंठपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया. राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती दी थी. सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने इस फैसले को त्रुटिपूर्ण ठहराया है. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के ठोस बयानों और मेडिकल साक्ष्यों को तकनीकी आधार पर खारिज कर गलत फैसला सुनाया था.
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में डॉ.कलावती पटेल की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया है. रिपोर्ट में पीड़िता के निजी अंगों पर गंभीर चोटों और सूजन की पुष्टि हुई थी, साथ ही एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों पर मानव शुक्राणु पाए गए थे, जो अपराध की पुष्टि करते हैं. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दुष्कर्म पीड़िता की गवाही अपने आप में पूर्ण है और उसे किसी अन्य स्वतंत्र गवाह के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता नहीं है.
हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी फादर को आईपीसी की धारा 376 (2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद व 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई. वहीं स्कूल की दो महिला स्टाफ को अपराध छिपाने और पीड़िता की मदद न करने पर आईपीसी की धारा 119 के तहत 7-7 साल की कठोर कारवास और 5-5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है.

