3 महीने से लापता कारोबारी दंपती का मिला कंकाल, छोटे भाई की गिरफ्तारी के बाद खुलासा
मुजफ्फरपुर में लापता कारोबारी दंपति की संपत्ति विवाद में छोटे भाई ने हत्या कर दी. पुलिस ने कंकाल बरामद किए. रिपोर्ट- विवेक कुमार

Published : August 24, 2026 at 10:34 AM IST
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से तीन महीने पहले रहस्यमय ढंग से लापता हुए लैपटॉप कारोबारी मनोज भगत (48) और उनकी पत्नी मीनू देवी (45) की गुमशुदगी की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है. पुलिस के अनुसार, संपत्ति विवाद में मनोज के छोटे भाई अविनाश उर्फ अनुज भगत ने ही दंपति की हत्या की थी. पुलिस ने आरोपी को बनारस से गिरफ्तार किया है.
पुलिस ने बरामद किया कंकाल: आरोपी की निशानदेही पर बोचहां थाना क्षेत्र में दरभंगा फोरलेन किनारे मुरादपुर चौक के पास राधा स्वामी सत्संग आश्रम के निकट झाड़ियों से दोनों के कंकाल बरामद किए गए हैं. पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शवों को बेडशीट और कंबल में लपेटकर गाड़ी से ले जाया गया और झाड़ियों में फेंक दिया गया था. लंबे समय तक पड़े रहने के कारण शव कंकाल में तब्दील हो गए. अब डीएनए जांच के जरिए दोनों की पहचान की पुष्टि कराई जाएगी.
संपत्ति को लेकर बढ़ा विवाद: मनोज भगत का ब्रह्मपुरा में बथुआ नर्सिंग होम के सामने भगत मार्केट है, जहां उनकी लैपटॉप की दुकान और आवास भी है. पुलिस जांच में सामने आया है कि मार्केट और पैतृक संपत्ति को लेकर मनोज और उनके छोटे भाई अविनाश के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. पुलिस इसी विवाद को हत्या की मुख्य वजह मान रही है.
20 मई की रात हुए थे लापता: मनोज भगत और उनकी पत्नी 20 मई की रात अचानक लापता हो गए थे. दोनों के मोबाइल फोन भी बंद मिले थे. काफी खोजबीन के बाद उनकी इकलौती बेटी शेफाली ने 22 मई को ब्रह्मपुरा थाने में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी. जांच के दौरान पुलिस को घर के कमरे और छत पर खून के धब्बे मिले. एफएसएल और डॉग स्क्वायड की जांच में खून इंसानी होने की पुष्टि हुई. इसके बाद पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई.
बेटी ने चाचा पर जताया था शक: शेफाली ने शुरुआत से ही अपने चाचा अविनाश पर संदेह जताया था. उसका आरोप था कि संपत्ति हड़पने की नीयत से उसके माता-पिता को गायब किया गया है. पुलिस ने इस एंगल पर जांच की तो संदेह की सुई अविनाश की ओर घूमती गई.
बनारस से गिरफ्तार हुआ आरोपी: एसडीपीओ विनीता सिन्हा के अनुसार, मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई थी और बिहार समेत कई राज्यों में छापेमारी की जा रही थी. इसी दौरान अविनाश भी 4 जून से फरार हो गया. पुलिस ने उसे बनारस से गिरफ्तार किया. पूछताछ में पुलिस के अनुसार उसने हत्या की बात स्वीकार की.

"आरोपी ने बताया कि 20 मई की रात संपत्ति विवाद को लेकर उसका अपने बड़े भाई और भाभी से विवाद हुआ था. विवाद बढ़ने पर उसने पहले मनोज भगत की हत्या की. मीनू देवी जान बचाने के लिए छत पर भागीं, लेकिन आरोपी ने वहां पहुंचकर उनकी भी हत्या कर दी."-विनीता सिन्हा, एसडीपीओ
झाड़ियों में फेंका शव: पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद आरोपी ने दोनों शवों को बेडशीट और कंबल में लपेटा दिया. इसके बाद अपनी गाड़ी में रखा और बोचहां में राधा स्वामी सत्संग आश्रम के पास झाड़ियों में फेंक दिया.
गायों की बदबू में दबा रहा राज: जिस स्थान से कंकाल बरामद हुए हैं, उसके मालिक ने पुलिस को बताया कि मई में वहां दो मृत गायों को भी फेंका गया था. गायों से निकलने वाली तेज दुर्गंध के कारण वहां पड़े मानव शवों की बदबू का पता नहीं चल सका और लंबे समय तक हत्या का राज छिपा रहा.
अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच: पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोहरे हत्याकांड में अविनाश के अलावा कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं. शवों को ठिकाने लगाने और सबूत मिटाने में किसी अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है. बरामद कंकालों की पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए जांच कराई जाएगी.
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