उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण शुरू, आज से नई शिक्षा व्यवस्था लागू, 158 मदरसों ने किया आवेदन
उत्तराखंड में 452 पंजीकृत मदरसे हैं, जिसमें से अभी तक 158 मदरसों ने ही शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के लिए आवेदन किया है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 1, 2026 at 6:29 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के साथ ही प्रदेश में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू हो गया हैं. ऐसे में अब प्रदेश में संचालित सभी मदरसों के साथ ही अल्पसंख्यक शिक्षक संस्थानों को भी शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होगी.
उत्तराखंड में कुल 452 पंजीकृत मदरसे हैं, जिसमें से अभी तक 158 मदरसों ने ही शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के लिए आवेदन किया है. इसके 7 मदरसों, एक सिख समुदाय स्कूल और एक जैन समुदाय के स्कूल को मान्यता मिल चुकी है. इन सभी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को सीएम पुष्कर सिंह धामी प्रमाण पत्र वितरित कर रहे है.
ज्यादा जानकारी देते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते ने बताया कि उत्तराखंड राज्य में 30 जून 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड समाप्त हो गया है, जिसकी जगह पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया गया है, जो एक जुलाई 2026 से प्रदेश में लागू हो गया हैं.
सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते के मुताबिक इस व्यवस्था के तहत मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को सीएम पुष्कर सिंह धामी प्रमाण पत्र वितरित कर रहे है. इसके साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजानदास की ओर से भी निदेश है कि सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हो. इसके लिए शिक्षा विभाग से समन्वय स्थापित किया जा रहा है.
वर्तमान समय तक 158 मदरसों की ओर से पोर्टल पर आवेदन किया गया है. ऐसे में शिक्षा विभाग के जो मानक है, उसके आधार पर शिक्षा विभाग की ओर से इन सभी मदरसों का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा. ऐसे में जो मदरसे मानकों पर खरे उतरेंगे उन मदरसों को मान्यता दी जाएगी, लेकिन जो मदरसे मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे उनको मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं मुकम्मल करने के लिए एक तय समय सीमा दी जाएगी..
साथ ही बताया कि उत्तराखंड में पंजीकृत 452 मदरसे है, जिसमें से 158 मदरसों ने शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है. एक जुलाई यानी आज 9 अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को मान्यता दी गी हैं, जिसमें 7 मदरसे, एक सिख समुदाय का स्कूल और एक जैन समुदाय का स्कूल शामिल है.
दरअसल, प्रदेश में जो छह अल्पसंख्यक समुदाय हैं, उन सभी समुदायों के शैक्षिक संस्थानों की मान्यता के लिए एक व्यवस्था बनाई गई है, जिसके तहत ये अल्पसंख्यक संस्थान, सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए आवेदन कर सकते है. अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत जो प्रावधान किए गए है, उसके तहत सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होगी, लेकिन शिक्षा विभाग के जो तय मानक है, उन मानकों को पूरा करने वाले मदरसों को ही मान्यता दी जाएगी. ऐसे शैक्षणिक संस्थान जो मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे उनको शिक्षा विभाग के साथ ही अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से भी मान्यता नहीं मिलेगी. ऐसे में जो मदरसे या फिर अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान जिनके मानक पूरा न होने पर मान्यता नहीं मिलती है. ऐसे संस्थानों पर तय नियम के अनुसार कार्रवाही की जाएगी.
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