धर्मांतरण कानून के विरोध में जयपुर में सड़कों पर उतरे अल्पसंख्यक, दिया धरना
धर्मांतरण कानून के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. इस कानून को रद्द करवाने का प्रयास किया जाएगा.

Published : January 5, 2026 at 3:44 PM IST
|Updated : January 5, 2026 at 5:02 PM IST
जयपुर: राजस्थान में लागू धर्मांतरण विरोधी कानून और अल्पसंख्यक वर्ग पर हो रहे कथित अत्याचार के विरोध में सोमवार को 'धर्म स्वतंत्रता और संविधान रक्षा समिति' व 'मरुभूमि क्रिश्चियन एसोसिएशन' के तत्वावधान में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों ने चांदपोल बाजार से शहीद स्मारक तक एक शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला और धरना दिया. रैली में शामिल बौद्ध, जैन, मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदाय के लोगों ने अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग करते हुए राजस्थान विधानसभा द्वारा पारित धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करने की मांग की. धरने के दौरान केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद से अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों पर अत्याचार के मामले बढ़े हैं.
प्रदर्शनकारियों ने 25 दिसंबर को क्रिसमस के अवसर पर ईसाई समुदाय को कई राज्यों में हुई परेशानी का भी हवाला दिया. आरोप लगाया गया कि राजस्थान में भी कई स्थानों पर क्रिसमस समारोहों में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न किए गए. धरने के संयोजक एवं बौद्ध समाज से जुड़े नरेंद्र बौद्ध ने कहा कि उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए है.
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उन्होंने कहा कि यह कानून अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ है और इसे रद्द किया जाना चाहिए. मंसूरी तेली महापंचायत के अध्यक्ष अब्दुल लतीफ आरको ने धर्मांतरण विरोधी कानून में खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस बिल में केवल एक धर्म के लोगों के लिए बात की गई है. यदि हिंदू धर्म से कोई धर्मांतरण करता है तो उसे ही अपराध माना जाएगा, जबकि अन्य धर्म से हिंदू बनने को 'घर वापसी' बताया जाएगा. यह पूरी तरह गलत है. हिंदुस्तान सभी के लिए है और कानून सबके लिए समान होना चाहिए. इस बिल के प्रावधानों से ही पता चलता है कि यह केवल अल्पसंख्यक वर्ग को परेशान करने के लिए लाया गया है.
ईसाई समुदाय में डर: कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एम.डी. चौपदार ने कहा कि आजाद भारत में पहली बार ईसाई समुदाय को क्रिसमस पर डर का साया महसूस हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ऐसा कानून लेकर आई है, जिसके तहत नमाज पढ़ने, पूजा करने या गिरजाघर जाने के लिए भी भाजपा से पूछना पड़ेगा. इस बार क्रिसमस पर ईसाई समाज के लोग डर से दुबके हुए थे. कई गिरजाघरों पर ताले लगे हुए थे. उन्होंने यह भी बताया कि इस कानून के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है और शीघ्र ही दो-तीन और याचिकाएं दायर कर इस कानून को रद्द करवाने का प्रयास किया जाएगा.

