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Exclusive : कैसा होगा बिहार का राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय?, मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी से जानिए

बिहार में ही मिलेगी कला की उच्च शिक्षा, मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने बताया प्रस्तावित कला विश्वविद्यालय बनेगा गेम चेंजर, संरक्षण और रोजगार दोनों देगा.

Minister Pramod Chandravanshi
मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 7, 2026 at 11:30 AM IST

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पटना: बिहार में उच्च शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. परंपरागत विश्वविद्यालयों के साथ अब राज्य सरकार अलग-अलग क्षेत्रों के लिए डेडीकेटेड विश्वविद्यालय विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. इंजीनियरिंग, मेडिकल और खेल शिक्षा के बाद अब सरकार कला एवं संस्कृति के क्षेत्र के लिए अलग बिहार कला विश्वविद्यालय स्थापित करने की तैयारी में है.

बिहार में बनेगा राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय: पटना साइंस कॉलेज के परिसर में स्थापित होने वाले यूनिवर्सिटी आफ फिजिक्स एंड साइंसेज के बाद सरकार बिहार में एक कला विश्वविद्यालय की स्थापना की तैयारी कर रही है. कला एवं संस्कृति विभाग और शिक्षा विभाग इसके प्रारूप पर संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं. सरकार का दावा है कि यह विश्वविद्यालय पूरी तरह कला और संस्कृति आधारित होगा, जहां संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक कला, वाद्य यंत्र, मेकअप आर्ट, फिल्म एवं प्रदर्शन कला जैसी विधाओं की विशेष शिक्षा दी जाएगी.

कला मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी (ETV Bharat)

छात्रों को कला की विशेष शिक्षा: ईटीवी भारत से बातचीत में बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि बदलते बिहार की जरूरतों को देखते हुए अब कला शिक्षा को भी संस्थागत स्वरूप देने का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि पहले बिहार के विद्यार्थियों को संगीत, रंगमंच और अन्य कला विधाओं में उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन प्रस्तावित कला विश्वविद्यालय बनने के बाद उन्हें अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञ शिक्षा उपलब्ध होगी.

बदलते बिहार के साथ बदल रही शिक्षा की सोच: मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार अब पहले वाला राज्य नहीं रहा. राज्य में सड़क, कानून व्यवस्था और निवेश का माहौल बेहतर हुआ है. उद्योगों और पर्यटन के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं. ऐसे माहौल में कला और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में भी संस्थागत विकास की जरूरत महसूस की गई है.

युवाओं को अपने राज्य में ही मिले अवसर: उन्होंने कहा कि पहले बिहार के छात्र संगीत में स्नातकोत्तर करने के लिए मध्य प्रदेश जाते थे, रंगमंच सीखने के लिए प्रयागराज जैसे शहरों का रुख करते थे. कई कलाकार मुंबई और देश के दूसरे हिस्सों में जाकर अपनी पहचान बना रहे हैं. ऐसे में सरकार चाहती है कि बिहार के युवाओं को अपने राज्य में ही वह सभी अवसर मिलें, जिनके लिए अब तक उन्हें पलायन करना पड़ता था.

Minister Pramod Chandravanshi
बिहार में डेडीकेटेड विश्वविद्यालयों का मॉडल (ETV Bharat)

डेडीकेटेड विश्वविद्यालयों का मॉडल अपना रहा बिहार: राज्य सरकार पहले ही अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशेष विश्वविद्यालयों की स्थापना कर चुकी है या उस दिशा में काम कर रही है. बिहार इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों को संबद्धता देता है. बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य शिक्षा संस्थानों के लिए नियामक विश्वविद्यालय की भूमिका निभा रहा है. राजगीर में खेल विश्वविद्यालय स्थापित हो चुका है, जहां खिलाड़ियों के लिए प्रमाणपत्र, डिप्लोमा और डिग्री स्तर के विशेष पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं.

अगली कड़ी बनने जा रहा कला विश्वविद्यालय: इसी क्रम में हाल के दिनों में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा पटना साइंस कॉलेज में विज्ञान एवं भौतिकी के लिए समर्पित साइंस एंड फिजिक्स विश्वविद्यालय की घोषणा भी की गई है. अब कला विश्वविद्यालय इस श्रृंखला की अगली कड़ी बनने जा रहा है. यदि यह स्थापित होता है तो बिहार संभवत देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा, जहां अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग विशेष विश्वविद्यालयों का व्यापक नेटवर्क होगा.

कला विश्वविद्यालय की जरूरत क्यों?: मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी का कहना है कि आज का दौर स्पेशलाइजेशन का है. उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले एक चिकित्सक सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज करता था, लेकिन समय के साथ हृदय रोग, किडनी रोग और अन्य क्षेत्रों के विशेष डॉक्टर तैयार होने लगे. यही स्थिति शिक्षा के क्षेत्र में भी है.

"पहले छात्र केवल विज्ञान, कला और वाणिज्य जैसी पारंपरिक धाराओं तक सीमित रहते थे, लेकिन आज रोजगार और कौशल आधारित शिक्षा की मांग बढ़ी है. ऐसे में कला की प्रत्येक विधा में विशेष तैयार करना समय की आवश्यकता है. कोई हारमोनियम का विशेषज्ञ बने, कोई बांसुरी का, कोई शास्त्रीय या लोक नृत्य का और कोई रंगमंच या मेकअप आर्ट का विशेषज्ञ बने. इसी सोच के साथ कला विश्वविद्यालय की परिकल्पना की गई है."-प्रमोद चंद्रवंशी, मंत्री, कला एवं संस्कृति

कैसा होगा प्रस्तावित कला विश्वविद्यालय?: मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय सामान्य कला संकाय वाला विश्वविद्यालय नहीं होगा. इसमें इतिहास, राजनीति विज्ञान, हिंदी या अन्य मानवीकी विषयों की पढ़ाई नहीं होगी. यह पूरी तरह कला और संस्कृति को समर्पित संस्थान होगा. विभागीय स्तर पर तैयार किए जा रहे प्रारूप के अनुसार इसमें संगीत, लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच, मेकअप आर्ट, फिल्म एवं प्रदर्शन कला, विभिन्न वाद्य यंत्रों की शिक्षा, लोक कलाएं तथा आधुनिक कला से जुड़े पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे.

केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि अब होगा कला संरक्षण: मंत्री के मुताबिक, डिग्री, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और आगे चलकर शोध कार्यक्रम भी शुरू किए जाने की संभावना है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा संस्थान विकसित करना है, जहां केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि कला संरक्षण, शोध, डॉक्यूमेंटेशन और नई पीढ़ी को कौशल आधारित प्रशिक्षण भी दिया जा सके.

Minister Pramod Chandravanshi
बदलते बिहार के साथ बदल रही शिक्षा (ETV Bharat)

लोक कला और लोक संगीत पर रहेगा विशेष फोकस: प्रस्तावित विश्वविद्यालय में बिहार की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्व दिया जाएगा. सरकार की योजना लोक कलाओं को आधुनिक तकनीक और रोजगार से जोड़ने की है. मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय में मधुबनी पेंटिंग, मंजूषा कला, पटना कलम, टिकुली कला, सिक्की शिल्प जैसी पारंपरिक कलाओं पर अध्ययन और शोध को बढ़ावा दिया जाएगा. वहीं भिखारी ठाकुर की लोकनाट्य परंपरा, भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका, बज्जिका और अन्य भाषाओं के लोक संगीत को भी अकादमिक स्वरूप देने की दिशा में काम होगा.

"नाटक की शिक्षा के साथ-साथ मेकअप आर्टिस्ट तैयार करने के लिए अलग प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी. जिस प्रकार किसी विश्वविद्यालय में प्रत्येक विषय के लिए अलग विभाग होता है, उसी प्रकार कला विश्वविद्यालय में भी कला की प्रत्येक विधा के लिए विशेष संकाय विकसित किए जाएंगे."-प्रमोद चंद्रवंशी, मंत्री, कला एवं संस्कृति

अश्लीलता नहीं, सांस्कृतिक संगीत को मिलेगा बढ़ावा: मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि स्वस्थ सांस्कृतिक वातावरण तैयार करना भी है. उन्होंने कहा कि विभाग का प्रभार संभालने के बाद उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील और फूहड़ गीतों के प्रसारण पर रोक लगाने की पहल की थी और इस संबंध में सभी जिलों के डीएम और एसपी को निर्देश भेजे गए थे. उन्होंने कहा कि बिहार की लोक संगीत परंपरा अत्यंत समृद्ध है. भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका, बज्जिका और अन्य भाषाओं के पारंपरिक गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संस्थागत प्रयास जरूरी हैं और प्रस्तावित विश्वविद्यालय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

रोजगार और फिल्म उद्योग से भी जुड़ेगी पढ़ाई: सरकार कला विश्वविद्यालय को केवल शैक्षणिक संस्थान के रूप में नहीं बल्कि रोजगार और कौशल विकास से जोड़ना चाहती है. मंत्री ने कहा कि बिहार में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है. ऐसे में अभिनय, मंच संचालन, मेकअप, फिल्म तकनीक, संगीत, वाद्य यंत्र और प्रदर्शन कला से जुड़े प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता बढ़ेगी. विश्वविद्यालय में ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करने की योजना है, जिनसे छात्र सीधे रोजगार, फिल्म उद्योग, सांस्कृतिक संस्थानों, थिएटर, संगीत संस्थानों और स्वतंत्र कला क्षेत्र में अपना करियर बना सकें.

Minister Pramod Chandravanshi
प्रमोद चंद्रवंशी और सम्राट चौधरी (ETV Bharat)

अभी प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया जारी: कला विश्वविद्यालय को लेकर विभागीय स्तर पर प्रारूप तैयार किया जा रहा है. शिक्षा विभाग और कला एवं संस्कृति विभाग संयुक्त रूप से इसकी रूपरेखा पर काम कर रहे हैं. प्रारूप अंतिम रूप लेने के बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद विधायी प्रक्रिया पूरी कर विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा.

कलाकारों का रुकेगा पलायन: यदि सरकार की यह योजना मूर्त रूप लेती है तो बिहार में पहली बार कला शिक्षा को समर्पित ऐसा विश्वविद्यालय होगा, जहां पारंपरिक लोक कला से लेकर आधुनिक प्रदर्शन कला तक एक ही परिसर में विशेष शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे. सरकार का मानना है कि इससे न केवल कलाकारों का पलायन रुकेगा, बल्कि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी मिलेगी.

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