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'पुलिस लोगों को भय दिखाकर करती है अवैध वसूली', मंत्री मदन सहनी ने मोनू आत्महत्या मामले में पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

दरभंगा में मोनू आत्महत्या मामले पर मंत्री मदन सहनी का बड़ा बयान सामने आया है. पुलिस की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल. रिपोर्ट-वरुण ठाकुर

Minister Madan Sahni
मंत्री मदन सहनी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 20, 2026 at 2:59 PM IST

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दरभंगा: बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी ने अपने विधानसभा क्षेत्र बहादुरपुर के खराजपुर गांव में हुए 20 वर्षीय युवक मोनू की आत्महत्या के मामले को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि बिहार में कई जगहों पर आम लोगों को अपराधियों से ज्यादा पुलिस से भय महसूस होता है. मंत्री ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी, दरोगा और पुलिसकर्मी आम लोगों से भय दिखाकर अवैध वसूली करते हैं.

दरभंगा पुलिस से लेकर डीजीपी तक पर सवाल: मंत्री मदन सहनी ने दरभंगा पुलिस से लेकर बिहार के डीजीपी तक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो जनप्रतिनिधियों को भी इस मामले में गंभीरता से कुछ सोचना पड़ेगा. उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

दरभंगा में मोनू आत्महत्या मामला (ETV Bharat)

चोरी के मोबाइल बरामदगी के बाद दबाव का आरोप: मामला दरभंगा के बहादुरपुर थाना क्षेत्र के खराजपुर गांव से जुड़ा है. आरोप है कि चोरी के एक मोबाइल बरामद होने के बाद पुलिस की ओर से युवक मोनू पर दूसरे मामले में फंसाने का दबाव बनाया गया और कथित तौर पर दो से तीन लाख रुपये की मांग की गई. बताया जा रहा है कि बीते रविवार को सादे लिबास में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने मोनू के पास से चोरी का मोबाइल बरामद किया था, लेकिन उस समय उसे गिरफ्तार नहीं किया गया.

रुपये की मांग के बाद आत्महत्या का आरोप: मोनू के भाई रघु कुमार साहनी ने बताया कि सादे लिबास में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने मोनू को दूसरे मामले में फंसाने का डर दिखाकर रुपये की मांग की थी. आरोप है कि अगले दिन पुलिसकर्मी रुपये लेने पहुंचने वाले थे, लेकिन उससे कुछ मिनट पहले ही मोनू ने घर में अपनी जान दे दी. परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मुकदमे में फंसाए जाने के दबाव के कारण ही युवक ने यह कदम उठाया.

सादे लिबास में पुलिसकर्मियों के फायरिंग का दावा: रघु कुमार साहनी के अनुसार घटना के दौरान सादे लिबास में बिना नंबर वाली दो बाइक से तीन पुलिसकर्मी पहुंचे और परिवार के लोगों के साथ झड़प हुई. इसके बाद सादे लिबास में दो पुलिसकर्मी एक बाइक से दोबारा पहुंचे. आरोप है कि दोनों ने अचानक पिस्टल निकालकर लोगों की ओर फायरिंग की. फायरिंग से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आने की बात कही जा रही है.

“सादे लिबास में आए पुलिसकर्मियों ने मोनू को दूसरे केस में फंसाने का डर दिखाकर दो-तीन लाख रुपये मांगे थे. अगले दिन रुपये लेने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही मोनू ने उनके टॉर्चर से परेशान होकर आत्महत्या कर ली.”-रघु कुमार साहनी, मोनू का भाई

एसडीपीओ ने फायरिंग से किया इनकार: मामला बढ़ने के बाद एसडीपीओ समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया. उस समय एसडीपीओ ने फायरिंग के आरोप से इनकार किया था. पुलिस की ओर से अभी तक इस पूरे प्रकरण पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

डीएसपी की पोस्टिंग पर सवाल: मंत्री मदन सहनी ने इस पूरे मामले पर दरभंगा के एसएसपी से व्यक्तिगत रूप से जांच कराने की मांग की है. उन्होंने दरभंगा पुलिस की कार्यशैली के साथ-साथ भारत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी डीएसपी की पोस्टिंग को लेकर भी सवाल उठाए और पुलिस प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की. उन्होंने कहा कि पुलिस लोगों को भय दिखाकर अवैध वसूली करती है.

“बिहार में कई जगहों पर लोगों को अपराधियों से ज्यादा पुलिस से डर लगता है. अगर पुलिस की कार्यशैली नहीं सुधरी तो जनप्रतिनिधियों को भी गंभीरता से सोचना पड़ेगा.”-मदन सहनी, मंत्री

परिजनों को जांच का इंतजार: मंत्री के इन आरोपों के बाद मोनू आत्महत्या मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. अब नजर इस बात पर है कि पुलिस प्रशासन इस पूरे प्रकरण की जांच किस स्तर पर करता है और सामने आए आरोपों की सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है. परिवार और स्थानीय लोग न्याय की मांग कर रहे हैं.

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