VB-G RAM G पर झारखंड सरकार ने जताई सख्त आपत्ति, मंत्री की अध्यक्षता में प्रावधानों की हुई समीक्षा
पंचायती राज मंत्री की अध्यक्षता में बैठक कर VB-G RAM G के प्रावधानों की समीक्षा की गयी.

Published : January 5, 2026 at 10:28 PM IST
रांचीः विकसित भारत–गारंटी (VB-G RAM G) के प्रावधानों को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार आमने सामने होता दिख रहा है. इसको लेकर मंत्री ने इस नये रूप में लाए गये योजना की समीक्षा बैठक की.
आज सोमवार को झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की अध्यक्षता में मनरेगा एवं विकसित भारत–गारंटी (VB-G RAM G) के प्रावधानों को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई. बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, मनरेगा आयुक्त, विशेषज्ञ, शिक्षाविद, सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधि एवं विभिन्न स्टेकहोल्डर्स शामिल हुए.

इस बैठक में मनरेगा और VB-G RAM G के प्रावधानों के समीक्षा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि 100 दिनों की वैधानिक रोजगार गारंटी को 125 दिन करने का प्रस्ताव जमीनी हकीकत से दूर और भ्रामक है. श्रम बजट के स्थान पर नॉर्मेटिव एलोकेशन, मजदूरी दर का केंद्रीकरण और 60 दिनों का अनिवार्य मोराटोरियम झारखंड जैसे श्रमिक-प्रधान राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
इस मौके पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में भूमिहीन मजदूर हैं, जिनके लिए ये प्रावधान आजीविका पर सीधा प्रहार है. इससे पलायन, भुखमरी और सामाजिक असुरक्षा का खतरा बढ़ेगा तथा राज्य में संचालित कृषि एवं बागवानी आधारित योजनाएं भी प्रभावित होंगी. दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस को अनिवार्य करना व्यावहारिक चुनौतियां पैदा करेगा.
बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी छह महीनों में राज्य के अधिकतम परिवारों को कम से कम 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं. जिससे मनरेगा की मूल भावना, संवैधानिक गारंटी और गरीबों के अधिकारों की पूरी मजबूती से रक्षा की जा सके.
राज्यांश को बढ़ाने पर झारखंड सरकार ने जताई आपत्ति
इस बैठक के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि नये प्रावधान में कुल व्यय का 40 प्रतिशत वित्तीय भार राज्यों पर डालना संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है. मौजूदा परिस्थितियों में इससे झारखंड पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है. राज्यों को विश्वास में लिए बिना केंद्र सरकार द्वारा ऐसी योजनाएं लागू करना संघीय व्यवस्था पर सीधा प्रहार है.
इस मौके पर जाने माने अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज ने कहा कि VB-G RAM G में सभी अधिकार एवं क्षमता केंद्र सरकार के द्वारा ही फिक्स किया जाएगा. झारखंड में अगले 5.5 महीने में मनरेगा पहले जैसे ही चलते रहेगी. 6 महीना के बाद जो नया स्कीम आ रही है उसमें क्या प्रावधान किया जाएगा उसको देखते हुए एक उचित गाइडलाइन स्टेट के द्वारा बनाया जाए.

मनरेगा अंतर्गत किए गए कार्यों का विस्तार से जांच होना चाहिए. सोशल ऑडिट होना चाहिए ताकि ट्रांसपेरेंसी पर कार्यों किया जा सके. इसके अलावा दीवार लेखन हो, मजदूरों को कार्यों उपलब्ध कैसे हो सके, उसके लिए बड़े पैमाने पर काम मांगो अभियान जैसा अभियान चलाना चाहिए.
सामाजिक कार्यकर्ता बलराम के द्वारा बताया गया कि मनरेगा में ग्राम सभा का क्षमता को बढ़ावा दिया गया है और पेसा कानून में भी ग्राम सभा को महत्व दिया गया है. लेकिन यह नया कानून VB-G RAM G में Top to Down एप्रोच के तहत केंद्रीय सरकार के द्वारा बजट का एलोकेशन किया जाएगा. काम की गारंटी सिर्फ राज्य सरकार का जिम्मेदारी है. विभिन्न शर्तों को देखते हुए यह लगता है कि केंद्रीय सरकार से प्राप्त होने वाले 60% फंड का उपलब्धता में काफी कठिनाई होगी.
वर्तमान में 12 महीना काम का उपलब्धता होने के बावजूद लगभग 50 दिवस ही काम दिया जा सका. अब दो महीना का कृषि ब्रेक का जिक्र किया गया है, इसको देखते हुए 125 कार्य दिवस मुहैया कराना नामुमकिन सा लगता है. झारखंड में लगभग 575 ऐसा गांव है जिसमें नेटवर्क नहीं है. आज के दिन में इस तरह का गांव में बायोमेट्रिक एवं अन्य तकनीकी टेक्नोलॉजी का उपयोग करना काफी चुनौतीपूर्ण है.
सामाजिक कार्यकर्ता जेम्स हैरिस के द्वारा बताया गया कि नया कानून में 2 महीना का कृषि कार्य हेतु जो ब्रेक का जिक्र किया गया है, वह झारखंड जैसा राज्य के लिए काफी समस्या पैदा कर सकती है. झारखंड में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्य बरसात के समय जुलाई से सितंबर किया जाता है. जिसमें कठिनाई हो सकती है और कुआं जैसे स्क्रीम को भी कभी-कभी समय में पूरा करने हेतु जोर दिया जाता है और यह 2 महीना का काम ब्रेक होने से बहुत सारा कुआं धसने का भी संभावना हो सकती है.
उनके द्वारा यह कहा गया की 40% व्यय जो राज्य के द्वारा वहन करने की बात नया कानून में कही गई है. झारखंड सरकार को नया कानून लागू नहीं करना चाहिए साथ ही झारखंड सरकार अपने राज्य के लिए एक रोजगार गारंटी का नया कानून लाए जो राज्य द्वारा संप्रेषित होगा. उनके द्वारा यह भी बताया गया कि अनइंप्लॉयमेंट एलाउंस में राज्य को ही जवाबदेही किया गया, केंद्र सरकार का कोई जवाबदेही का जिक्र नया कानून में नहीं किया गया है.
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