धमतरी में मिलेट्स महोत्सव, मिलेट मैन खादर वल्ली ने कहा- Millets खाएं डॉक्टरों से दूर रहें
मिलेट मेन पद्मश्री खादर वल्ली ने कहा कि मिलेट्स केवल भोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन और आत्मनिर्भर खेती का आधार हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 6, 2026 at 9:22 AM IST
|Updated : January 6, 2026 at 12:51 PM IST
धमतरी: पोषण सुरक्षा, पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धमतरी कलेक्ट्रेट में सोमवार को मिलेट्स महोत्सव का आयोजन पहली बार किया गया. जिसमें मिलेट मैन के नाम से प्रसिद्ध और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. खादर वल्ली भी शामिल हुए. मिलेट महोत्सव प्रदर्शनी स्थल पर धमतरी जिले में उत्पादित कोदो, कुटकी, रागी, जैविक चावल, दुबराज, देसी घी और कई तरह के खाद्य वस्तुओं को रखा गया.
"मिलेट्स खाएं और स्वस्थ रहें"
मिलेट मैन के नाम से मशहूर पद्मश्री डॉ. खादर वल्ली ने किसानों, जनप्रतिनिधियों और आमजन को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि मिलेट्स केवल भोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन और आत्मनिर्भर खेती का आधार हैं. डॉ. वल्ली ने कहा मिलेट्स हमारे स्वास्थ्य का अद्भुत रास्ता है. गेहूं चावल को छोड़कर हमें अपने पारंपरिक खाद्य पदार्थ मिलेट्स को खाना चाहिए. ये अच्छी बात है कि अब ज्यादातर रसोइयों में मिलेट्स पहुंच गए हैं. मिलेट्स खाने से हम अस्पतालों और डॉक्टरों से दूर रह सकते हैं. इसलिए मिलेट्स खाएं और स्वस्थ रहें. मिलेट मैन ने कहा कि गेहूं चावल से बीमारियां हो रही है. खान पान सही होता है तो दवाइयों की कोई जरूरत नहीं पड़ती.
किसानों को मिलेट्स की खेती के लिए किया प्रेरित
डॉ. खादर वल्ली ने किसानों को बताया कि मिलेट्स की फसल- कम पानी, कम लागत और कम रासायनिक खाद में तैयार होती है. सूखा, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन जैसी परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देती है. पारंपरिक धान की तुलना में जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा देती है. उन्होंने बताया कि कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा जैसे श्रीअन्न में फाइबर, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन एवं सूक्ष्म पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी हैं.

30 सालों से मिलेट्स के काम कर रहे मिलेट मैन
मिलेट मैन ने कहा कि वे पिछले 30 सालों से किसानों को मिलेट्स उगाने को लेकर प्रेरित कर रहे हैं और आगे भी किसानों और लोगों को मिलेट्स को लेकर जागरूक करते रहेंगे. किसानों से आह्वान किया कि वे रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक एवं जैविक तरीके से मिलेट्स उत्पादन अपनाएं, जिससे स्वास्थ्य के साथ-साथ बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके.
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में मिलेट्स को कृषि नवाचार का केंद्र बनाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि किसानों को बीज, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, उत्पादित मिलेट्स की खरीदी और बिक्री के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जा रही है. स्व-सहायता समूहों को मिलेट्स आधारित मूल्य संवर्धित उत्पाद (आटा, लड्डू, कुकी, स्नैक्स) से जोड़ा जा रहा है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिलेट्स को केवल फसल नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और स्वस्थ भविष्य की खेती के रूप में अपनाएं.


