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मनरेगा का सिर्फ नाम बदला या बहुत कुछ बदल गया? झारखंड में वीबी जी राम जी का क्या होगा असर

केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदल कर अब इसे वीबी जी राम जी कर दिया है. इसमें और क्या बदलेगा इस रिपोर्ट में जानिए.

MGNREGA vs VB G RAM G
काम के इंतजार में बैठे मजदूर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : December 21, 2025 at 1:47 PM IST

4 Min Read
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रांची: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बदलकर नई योजना 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी वीबी-जी राम जी बिल 2025 लाने के फैसले पर झारखंड में राजनीतिक बवाल मच गया है. कांग्रेस और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) समेत विपक्षी दल इसे महात्मा गांधी का अपमान, मजदूर-विरोधी और आदिवासी-विरोधी करार दे रहे हैं. वहीं भाजपा इसे पुरानी योजनाओं में सुधार बताकर विरोध को राजनीतिक नाकामी छिपाने की कोशिश बता रही है.

नई योजना से मनरेगा की आत्मा को मारने की कोशिश: झारखंड कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने नई योजना को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान और श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात बताया है. प्रदेश प्रभारी के. राजू, राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा सहित कई नेताओं ने कहा कि इस बदलाव से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, जहां लाखों लोग मनरेगा से रोजगार पाते हैं.

मनरेगा को जी राम जी करने पर नेताओं के बयान (ETV Bharat)

केंद्र और राज्यों का अनुपात 60:40 करने पर विरोध

नेताओं ने फंडिंग अनुपात को केंद्र-राज्य के बीच 60:40 करने को राज्यों के हितों से खिलवाड़ बताया. उन्होंने दावा किया कि नई योजना में पीक कृषि मौसम में काम पर रोक लग सकती है, जिससे साल के कुछ महीनों में रोजगार की गारंटी नहीं रहेगी. काम के प्रकार और स्थान भी केंद्र सरकार तय करेगी, जो पहले राज्यों के अधिकार क्षेत्र में था. कांग्रेस ने इस बदलाव के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है. गांव-गांव जाकर मजदूरों को जागरूक किया जाएगा कि कैसे भाजपा सरकार ने उनका हक छीना है.

MGNREGA vs VB G RAM G
काम के इंतजार में बैठे मजदूर (ETV Bharat)

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि केंद्र ने सिर्फ नाम नहीं बदला, बल्कि गांधी की विचारधारा पर प्रहार किया है. पहले केंद्र 90 प्रतिशत फंड देता था, अब पीछे हट रहा है. कई नियम बदल दिए गए हैं, ताकि कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाया जा सके. हमारे राज्य में सबसे ज्यादा मजदूर हैं, इससे झारखंड को कमजोर करने की तैयारी है.

प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा कि 20 वर्ष बाद इस अधिनियम में बदलाव से श्रमिक वर्ग के रोजगार पर व्यापक दुष्प्रभाव पड़ेगा. कांग्रेस इसे स्वीकार नहीं करेगी और मजदूरों के साथ चरणबद्ध आंदोलन करेगी.

आदिवासी-विरोधी है यह बदलाव: झामुमो

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बदलाव को राज्य के जनजातीय समुदाय के साथ धोखा करार दिया है. झामुमो का दावा है कि राज्य में हर वर्ष करीब 70 लाख लोग मनरेगा से जुड़े हैं, जिनमें से लगभग 25 प्रतिशत आदिवासी हैं. नई योजना से सबसे ज्यादा असर आदिवासी समुदाय पर पड़ेगा.

झारखंड में मनरेगा मजदूरों के लिए करीब 12 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान है. पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 24 जिलों के 264 प्रखंडों में करीब 76 लाख 60 हजार मनरेगा कार्डधारी हैं. नियमित मजदूरों की संख्या 40 लाख से अधिक है, जिनमें जनजाति समुदाय के मजदूर 25 प्रतिशत से ज्यादा हैं. इन आंकड़ों के आधार पर झामुमो और कांग्रेस केंद्र सरकार पर आदिवासी-विरोधी होने का आरोप लगा रही हैं.

अपनी नाकामी छिपाने के लिए विरोध: भाजपा

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार सिंह ने कहा कि योजनाओं में बदलाव होते रहते हैं. कांग्रेस सरकार ने भी पहले कई योजनाओं के नाम बदले थे. कांग्रेस और सहयोगी दल सिर्फ अपनी नाकामी छिपाने के लिए वीबी-जी राम जी योजना का विरोध कर रहे हैं. वीबी-जी राम जी बिल को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और संसद से पारित हो चुका है. देशभर में इस पर सियासत तेज है. झारखंड में सबसे ज्यादा आदिवासी मजदूर होने का हवाला देकर विपक्ष केंद्र पर हमलावर है.

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