लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नया तरीका: आम लोग बने कूरियर, फिरौती की रकम ऐसे लगा रहे ठिकाने
राजस्थान में लॉरेंस गैंग फिरौती की रकम के लेन-देन में ऐसे लोगों का इस्तेमाल कर रही हैं, जिसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नही है.

Published : January 5, 2026 at 6:50 PM IST
जोधपुर: मारवाड़ क्षेत्र से लॉरेंस बिश्नोई और उसके गैंग का पुराना और गहरा नाता रहा है. कई बार यहां स्थानीय अपराधियों के जरिए वसूली की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन हालिया मामले में गैंग ने नया तरीका अपनाया और ऐसे लोगों को शामिल किया जिनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, ताकि शक न हो. इनके जरिए फिरौती की रकम मंगवाई गई, लेकिन रायसिंहनगर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और गैंग की मनी ट्रेल को ट्रेस कर लिया.
श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. बरामद रकम कहां से आई और आगे कहां जानी थी, इसकी जांच जारी है. लॉरेंस से जुड़ा आरजू बिश्नोई इस नेटवर्क को चला रहा था. एसपी ने बताया कि जोधपुर से हुई गिरफ्तारियों से महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जो गैंग के लेन-देन से जुड़े हो सकते हैं.
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जोधपुर से गिरफ्तारियां और नया तरीका: रायसिंहनगर पुलिस ने जोधपुर के कुड़ी भगतासनी क्षेत्र से जयपाल जांदू को गिरफ्तार किया. वह पहले भी लॉरेंस गैंग के लिए फिरौती की रकम ट्रांसफर कर चुका था और इसके बदले कमीशन लेता था. उसका संबंध आरजू बिश्नोई से था. आरजू ने अपने साथी योगेश को यह काम सौंपा. योगेश ने अपने पिता कुलदीप के साथ दोस्तों अमन और रामस्वरूप को जोधपुर से रकम लेने भेजा.
29 दिसंबर को पुलिस ने उन्हें पकड़ा, तो कार से करीब 91 लाख रुपये बरामद हुए. ये आरोपी बता नहीं सके कि रकम कहां से आई, सिर्फ इतना कहा कि जयपाल से ली है. इसके बाद पुलिस ने जोधपुर से जयपाल को पकड़ा और पूछताछ के बाद मौका-ए-वारदात पर भी ले जाया गया. पकड़े गए तीनों आरोपियों का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं था. पुलिस के मुताबिक, यही गैंग का नया तरीका है. साफ-सुथरे बैकग्राउंड वाले लोगों से काम करवाना, ताकि शक न हो.
जांच अधिकारी एएसपी भंवरलाल ने बताया कि जयपाल जांदू जोधपुर में रहता है. उससे पूछताछ में रकम के स्रोत और फिरौती के मूल का पता लगाने की कोशिश हो रही है. वहीं, योगेश से यह जानने का प्रयास है कि रकम आगे कहां भेजी जानी थी. जांच में एक सुव्यवस्थित इंटरस्टेट एक्सटॉर्शन नेटवर्क का पता चला, जिसके तार राजस्थान, पंजाब और हरियाणा तक फैले हैं. बरामद कैश संभवतः किसी बिजनेसमैन से धमकी देकर वसूली गई रकम का हिस्सा है. गैंग ने जानबूझकर आम लोगों को कूरियर बनाया, ताकि बड़े अपराधी सुरक्षित रहें.
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यूएसडीटी क्रिप्टो का इस्तेमाल और लेयर्ड सिस्टम: एएसपी भंवरलाल ने बताया कि जांच में कई नई कड़ियां खुल रही हैं. फिरौती की रकम को पहले यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था, फिर कैश में कन्वर्ट किया जाता. जोधपुर से पंजाब तक पैसे ट्रांसफर के लिए मल्टी-लेयर सिस्टम अपनाया गया. अनजान लोगों के नाम पर अकाउंट खोलकर क्रिप्टो भेजी जाती, कैश में बदलने के बाद आम कूरियर को सौंपी जाती. इस मामले में भी पकड़े गए कुलदीप, अमन और रामस्वरूप को नहीं पता था कि वे बड़े क्रिमिनल नेटवर्क के लिए काम कर रहे हैं.
अधिकारियों के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता इस्तेमाल गैंग की रणनीति में बड़ा बदलाव है. धमकियां फोन या मैसेज से दी जाती हैं, लेकिन कमाई को यूएसडीटी ट्रांजेक्शन से छिपाया जाता और फिर कैश बनाया जाता. म्यूल अकाउंट और आम कूरियर कई लेयर जोड़ते हैं, जिससे इसकी ट्रेसिंग कठिन हो जाती है. पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं, ताकि बड़े सदस्यों से लिंक पता चलें. संदिग्ध बैंक अकाउंट और डिजिटल वॉलेट की भी जांच चल रही है.
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2017 से मारवाड़ में लॉरेंस का नेटवर्क: जोधपुर में 2017 से ही लॉरेंस गैंग सक्रिय है. उस साल गुर्गों ने पहली बार रंगदारी के लिए एक डॉक्टर और ट्रैवल एजेंट के घर फायरिंग की. पुलिस ने सख्ती दिखाई और लोकल गुर्गों को पकड़ा, लेकिन धमकी न मानने पर सरदारपुरा सी रोड पर व्यापारी वासुदेव इसरानी की बीच बाजार गोली मारकर हत्या कर दी गई, जो गैंग की खुली चुनौती थी. इस हत्याकांड में लॉरेंस को भी आरोपी बनाया गया.
जोधपुर पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर उसे पंजाब से लेकर आई और शास्त्री नगर थाने में पूछताछ की. उसके खिलाफ दो-तीन केस दर्ज हुए और वह कई दिन जोधपुर जेल में रहा. जेल में ही उसने लोकल नेटवर्क मजबूत कर लिया. आज भी उसके गुर्गे यहां सक्रिय हैं. जोधपुर जेल से ही कोर्ट पेशी के दौरान लॉरेंस ने मीडिया के सामने सलमान खान को धमकी दी थी कि हिरण शिकार मामले में माफी नहीं मांगी तो जान से मार देंगे. इसके बाद लॉरेंश गैंग सलमान को निशाना बनाने की कोशिश कर चुकी है.
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