टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए नेशनल टास्क फोर्स की दो दिवसीय बैठक, 2029 तक झारखंड को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य
टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए रांची में नेशनल टास्क फोर्स की बैठक शुरू हुई.

Published : June 11, 2026 at 8:29 PM IST
रांची: टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए देश भर में चल रहे टीबी मुक्त भारत अभियान के नेशनल टास्क फोर्स की दो दिवसीय बैठक गुरुवार से रांची में शुरू हुई. नेशनल ट्यूबरक्लोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम (NTEP) के तहत आज से शुरू हुए नेशनल टास्क फोर्स की बैठक का शुभारंभ झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने किया.
सेंट्रल टीबी डिवीजन, नेशनल टास्क फोर्स, जोनल टास्क फोर्स, स्टेट टीबी सेल और झारखंड एनएचएम के द्वारा आयोजित किये जा रहे टास्क फोर्स की इस बैठक में देश के 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के टीबी मुक्त भारत अभियान से जुड़े अधिकारी, प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. दो दिवसीय बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हमने वर्ष 2029 तक टीबी मुक्त झारखंड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
NHM के झारखंड अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि टीबी की बीमारी पर जीत छिपाने से नहीं बल्कि बताने से होगी. उन्होंने कहा कि झारखंड में अभी 63 हजार टीबी मरीजों को टीबी की दवाएं खिलाई जा रही हैं और उन्हें पोषाहार के लिए 1000₹ प्रति महीने की राशि डीबीटी के माध्यम से दी जा रही है.
उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के लिए अभी चल रहे 100 दिवसीय कैंपेन में डेढ़ लाख लोगों की स्क्रीनिंग हुई है और कैंपेन समाप्त होते-होते 25 लाख लोगों की स्क्रीनिंग होने की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि 455 पंचायत को टीबी मुक्त बनाया जा चुका है.
झारखंड के अपर मुख्य सचिव एके सिंह ने कहा कि भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए फोकस्ड इसलिए हैं क्योंकि विश्व के कुल टीबी रोगियों में से अकेले 25% के करीब टीबी रोगी भारत में हैं. उन्होने कहा कि देश के पास सारा संसाधन है, जिसके बल पर भारत को टीबी मुक्त बनाया जा सकता है.
उन्होने कहा कि अगर 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाना है तो देश को टीबी मुक्त भारत बनाना ही होगा. उन्होने बताया कि टीबी मुक्त भारत बनाने में AI का उपयोग फायदेमंद हो सकता है. उन्होंने कहा कि राज्य की सरकार भी पोषाहार में अपना बजटीय प्रावधान करने की योजना पर काम कर रही है.
स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता में नहीं रखा, अब सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है. हम झारखंड को मेडिकल हब बनाने जा रहे हैं. इसके तहत एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल रिम्स-2 बनेगा और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को सहयोग करना होगा.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना और अबुआ हेल्थ कार्ड के जरिये गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों का इलाज कराया जा रहा है, लेकिन हम ऐसी व्यवस्था चाहते हैं कि झारखंड में ही सभी को विश्वस्तरीय इलाज मिले.
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