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मेरठ के नवचंदी मेले पर 'ग्रहण', उद्घाटन के दो महीने बाद भी रौनक का इंतजार, मैदान में उड़ रही धूल

15 मार्च 2026 को मेले का उद्घाटन हुआ था. लेकिन अब तक प्रशासन ने दुकानदारों को प्लॉट आवंटित नहीं किया है.

15 मार्च 2026 को मेले का उद्घाटन हुआ था.
15 मार्च 2026 को मेले का उद्घाटन हुआ था. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 5, 2026 at 9:30 PM IST

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मेरठ : गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक 'ऐतिहासिक नौचंदी मेला' आज अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है. जिस मेले को उत्तर प्रदेश सरकार ने 'प्रांतीय मेला' घोषित कर बड़ा दर्जा दिया, उसे मेरठ के जिला प्रशासन ने अपनी फाइलों में दफन कर दिया है. 15 मार्च 2026 को मेले का उद्घाटन हुआ था. भाजपा के तमाम दिग्गज पदाधिकारी और जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी ने फीता काटकर विकास के बड़े-बड़े दावे किए थे.

सरकार ने इसे 'राजकीय' दर्जा देकर बजट की थैलियां भी खोलीं, लेकिन उद्घाटन के दो महीने बीत जाने के बाद भी मेला मैदान में सिर्फ धूल उड़ रही है. जनता मेले की रौनक देखने के लिए तरस रही है.

उद्घाटन के दो महीने बाद भी रौनक का इंतजार. (Video Credit; ETV Bharat)

1672 से शुरू हुए इस मेले का अपना एक गौरवशाली इतिहास है. यह वही मैदान है जहां आजादी की चिंगारी सुलगी थी और जहां व्यापार के बड़े सौदे होते थे. लेकिन आज की स्थिति देखकर लगता है कि जिला प्रशासन को इतिहास से ज्यादा कागजी खानापूर्ती में दिलचस्पी है.

​नौचंदी मेले की परंपरा रही है कि यह होली के बाद पड़ने वाले दूसरे रविवार को पूरी आबो-हवा के साथ शुरू हो जाता था. नवरात्रि के दौरान चंडी देवी मंदिर के जयकारों से पूरा इलाका गूंजता था और बाले मियां की मजार पर अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ता था, वहां आज वीरानी छाई है. प्रशासन ने दुकानदारों को अब तक प्लॉट आवंटित नहीं किया है.

नौचंदी मेले का इतिहास.
नौचंदी मेले का इतिहास. (Photo Credit; ETV Bharat)

अब जब आंधी और तूफान का मौसम सिर पर है, तब प्रशासन दुकानें लगाने की जुगत में है. मेले में पहुंचे एक बुजुर्ग ने कहा, ऐसी बदहाली तो अंग्रेजों के वक्त भी नहीं थी. ​नौचंदी मेला सिर्फ बाजार नहीं, मेरठ का दिल था. प्रशासन ने इसे 'इवेंट' बनाकर इसकी आत्मा मार दी है. लोग अब नौचंदी की रौनक देखने नहीं, बल्कि प्रशासन की नाकामी और ऐतिहासिक बदहाली का मंजर देखने आ रहे हैं.

व्यापारियों की शिकायत पर ​CDO नूपुर गोयल ने नौचंदी मेले का निरीक्षण किया. उन्होंने ​व्यापारियों, झूला संचालकों, ठेकेदारों और तहबाजारी करने वालों सहित सभी संबंधित समूहों को बुलाया, उनसे मेले की व्यवस्थाओं और तैयारियों में लगने वाले समय के बारे में फीडबैक लिया.

नौचंदी मेले की खासियत.
नौचंदी मेले की खासियत. (Photo Credit; ETV Bharat)

सीडीओ नूपुर गोयल ने बताया कि यह निरीक्षण एक तरह की समीक्षा बैठक थी, ताकि यह जाना जा सके कि अब तक कितनी तैयारी हो चुकी है और मेले को सुगम बनाने के लिए किन बदलावों या अतिरिक्त सुविधाओं की आवश्यकता है. हमारा अनुमान है कि हर बार की तरह इस बार भी नौचंदी मेला बहुत ही अच्छा और भव्य होगा. जो भी छोटे-मोटे बदलाव जरूरी हैं, उनके निर्देश दे दिए गए हैं.

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