ETV Bharat / state

NAFIS System से गुनहगारों की कुंडली बनाना हुआ आसान, मेरठ रेंज के 4 जिलों की पुलिस बनी TOPPER

गुनहगारों के Finger Print डिजिटली सुरक्षित रखने में मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ अव्वल आए हैं.

गुनहगारों के Finger Print डिजिटली सुरक्षित रखने में मेरठ अव्वल.
गुनहगारों के Finger Print डिजिटली सुरक्षित रखने में मेरठ अव्वल. (Photo Credit : ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : July 5, 2026 at 8:14 AM IST

2 Min Read
Choose ETV Bharat

मेरठ : गुनहगारों के Finger Print डिजिटली सुरक्षित रखने के मामले में मेरठ परिक्षेत्र के चार जिलों मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ के खाते में बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है. NAFIS रैंकिंग में मेरठ रेंज के 4 जिले प्रदेशभर की रैंकिंग में टॉप पर आए हैं. ये रैंकिंग मई के डाटा फीडिंग के आधार पर की गई है. इस तकनीक में अपराधियों की कुंडली खाकी के पास डिजिटली सुरक्षित रखी जाती है.

मेरठ में NAFIS सिस्टम 1 जुलाई 2022 से शुरू हुआ था. डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) स्थापित किए जाने के बाद 1 जुलाई 2022 से प्रदेश के सभी जिलों मे स्थित जनपदीय अंगुली चिन्ह इकाई द्वारा अंगुली चिन्ह फीडिंग का कार्य सुचारू रूप से संचालित है.


इसके तहत अपराधियों का फिंगर प्रिन्ट डाटा का डिजिटल के रूप में सुरक्षित रखने के साथ उनकी मुकदमों और अपराधों से जुड़ी हर जानकारी फीड की जाती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि Crime की स्थिति में किसी अपराधी की पूरी कुंडली एक क्लिक पर सामने होगी. इससे अपराधों के खुलासे और अपराधियों की गिरफ्तारी में तेजी आएगी.


डीआईजी कलानिधि नैथानी के अनुसार मेरठ में एक महीने में 533 अपराधियों को क्राइम ब्रांच के ऑफिस में लाया गया. जहां शत प्रतिशत का रिकॉर्ड फीड किया गया है. इसी तरह बुलंदशहर में कुल 506 अपराधियों का डाटा फीड किया गया. बागपत के कुल अपराधी- 215 रहे. वहीं हापुड़ में अपराधियों की संख्या 212 रही. यहां की फीडिंग भी शत प्रतिशत रही. इस तरह रेंज में 1466 अपराधियों के अंगुलियों के चिन्ह्नों की फीडिंग हो चुकी है.

डीआईजी कलानिधि नैथानी के अनुसार रेंज के मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ जिलों ने प्रदेश स्तर पर मार्च से लगातार तीसरी बार प्रथम रैंक हासिल की है. इस तरह की तकनीक को पहले FBI इस्तेमाल करती थी और जर्मनी में भी वहां की पुलिस NAFIS से अपराधियों का ब्यौरा जुटाती थी. इस तकनीकि की सहायता से क्रिमिनल्स जल्द पकड़ में आ जाते हैं.

यह भी पढ़ें : सावधान! वेबसाइट से फिंगर प्रिंट डाउनलोड कर साइबर क्रिमिनल कर रहे लोगों के बैंक खाते साफ

यह भी पढ़ें : तेलंगाना में फिंगर प्रिंट सर्जरी गिरोह का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार