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प्री बोर्ड एग्जाम से बचने के लिए बच्चे ने रची अपने अपहरण की कहानी, दो लाख रुपये फिरौती मांगी

मेरठ ट्रांसपोर्ट नगर थाना क्षेत्र का मामला. हाईस्कूल में पढ़ने वाले छात्र की करतूत खुलने पर परिजन हैरान. मनोवैज्ञानिकों ने दी काउंसिलिंग पर जोर.

प्री बोर्ड एग्जाम से बचने के लिए बच्चे ने रची अपने अपहरण की कहानी,
हाईस्कूल के छात्र ने रची अपने अपहरण की कहानी. (Photo Credit : ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 6, 2026 at 12:20 PM IST

2 Min Read
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मेरठ : प्री बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत होने जा रही है. ऐसे में छात्र दबाव में हैं. इसी दबाव में कई छात्र अनचाहे खतरनाक कदम उठा लेते हैं और परिजनों के सामने मुसीबत खड़ी कर देते हैं. ऐसा ही मामला मेरठ के ट्रांसपोर्ट नगर थाना क्षेत्र से सामने आया है. यहां हाईस्कूल में पढ़ने वाले एक छात्र ने परीक्षा से बचने के लिए खुद की अपहरण की कहानी रच डाली और घर से लापता हो गया. इसके अलावा उसने घरवालों के पास दो लाख रुपये की फिरौती मांगने का मैसेज भेज दिया. फिरौती का मैसेज पहुंचने परिजनों के होश उड़ गए. मामला पुलिस में पहुंचा तो छात्र को सकुशल बरामद कर लिया गया है.

एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले एक परिवार ने बेटे के अपहरण की सूचना पुलिस को दी थी. परिजनों ने बताया कि छात्र की बहन के मोबाइल पर दो लाख रुपये फिरौती का मैसेज भी मिला है. इसके बाद पुलिस टीम ने इलेक्ट्रोनिक सर्विलांस की मदद ली और छात्र की तलाश शुरू की. कई घंटों की पड़ताल के बावजूद कोई सुराग नहीं लगा. हालांकि रात में छात्र का फोन एक बार ऑन हुआ. इसके बाद लोकेशन ट्रेस कर मवाना क्षेत्र में फलावदा रोड स्थिति छात्र के मौसा के घर पर दबिश दी गई. जहां छात्र सकुशल मिला. हालांकि छात्र ने मौसा-मौसी को भी कोई बात नहीं बताई.



एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह के अनुसार छात्र ने पूछताछ में बताया कि वह हाईस्कूल प्री बोर्ड एग्जाम नहीं देना चाहता था. इसीलिए उसने अपने अपहरण का ड्रामा रचा था. उसने बताया कि वह घर से मवाना में रहने वाली अपनी मौसी के घर चला आया और मोबाइल को फ्लाइट मोड पर लगाने से पहले बहन को फिरौती का मैसेज भेजा था. इस घटना के बाबद मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के प्रभारी सुशील सिरोही ने बताया कि परीक्षा को लेकर अक्सर बच्चों में डर बैठ जाता है. ऐसे में परिवार के साथ की जरूरत होती है. बच्चों को अभिभावक अगर समय देंगे और उसकी पढ़ाई को लेकर बात करते रहेंगे तो बच्चों के मन में डर घर नहीं करेगा. साथ ही संबधित स्कूल काॅलेजों में भी बच्चों को काउंसिलिंग के माध्यम से जागरूक किया जा सकता है.