रोहतक में एमडीयू के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए CJI सूर्यकांत, बोले 'जीवन में सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण, कड़ी मेहनत और अनुशासन आवश्यक है'
महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक ने अपने पूर्व छात्र CJI सूर्यकांत को पूर्व छात्र अलंकरण से सम्मानित किया.

Published : February 15, 2026 at 9:07 AM IST
|Updated : February 15, 2026 at 9:12 AM IST
रोहतक: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को रोहतक के महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) में स्वर्ण जयंती समारोह में शिरकत की. यूनिवर्सिटी ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत को विशिष्ट पूर्व छात्र अलंकरण से सम्मानित किया. यूनिवर्सिटी ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत के निर्णयों में निहित निष्पक्षता, मानवीय संवेदनशीलता और संविधान के प्रति अटूट आस्था की विशेष सराहना की. बतादें कि सूर्यकांत ने वर्ष 1984 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से ही विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री हासिल की थी.
'राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना अत्यंत महत्वपूर्ण है':
समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू का भी अभिनंदन किया गया. समारोह के दौरान अपने संबोधन में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि "जीवन में सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण, कड़ी मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य प्राप्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति आवश्यक है. इस मार्ग पर सत्यनिष्ठा, मूल्य और नैतिकता के साथ-साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना अत्यंत महत्वपूर्ण है." उन्होंने "विद्यार्थियों से नैतिक मूल्यों, संविधान की भावना और न्याय के सिद्धांतों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया."
CJI ने यूनिवर्सिटी में बिताए गए दिनों को किया यादः न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में बिताए गए दिनों को याद किया. उन्होंने कहा कि "यूनिवर्सिटी परिसर में उन्हें कभी उनकी ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. यूनिवर्सिटी ने समावेशी वातावरण प्रदान किया, जहां केवल प्रतिभा, परिश्रम और बौद्धिक क्षमता को महत्व दिया गया." उन्होंने कहा कि "यही मूल्य उनकी जीवन यात्रा और न्यायिक सोच की मजबूत नींव बने."

