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UCC और वंदे मातरम पर बोले मौलाना असगर मिस्बाही, कहा– इस्लाम और शरीयत के खिलाफ कोई भी बात कबूल नहीं

बकरीद की नमाज के बाद UCC और वंदे मातरम पर बोले मौलाना असगर मिस्बाही ने अपनी राय रखी.

UCC and Vande Mataram
मौलाना असगर मिस्बाही (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : May 28, 2026 at 2:15 PM IST

3 Min Read
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रांची: राजधानी रांची में बकरीद की नमाज के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और वंदे मातरम को लेकर मौलाना असगर मिस्बाही का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि यूसीसी इस्लाम और शरीयत के खिलाफ है और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी इसका विरोध कर रहा है. साथ ही उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को लेकर मुसलमानों को किसी के पढ़ने या बोलने से एतराज नहीं है, लेकिन किसी को इसे पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.

मौलाना असगर मिस्बाही ने कहा कि संविधान में सभी धर्मों और समुदायों को समान अधिकार और हिस्सेदारी दी गई है. ऐसे में अगर कोई कानून किसी विशेष धर्म की धार्मिक मान्यताओं और शरीयत के खिलाफ जाता है तो उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी स्पष्ट किया है कि यूसीसी इस्लामिक शरीयत के खिलाफ है और इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा.

मौलाना असगर मिस्बाही का बयान (ETV Bharat)

धार्मिक सिद्धांतों के विपरीत व्यवस्था स्वीकार नहीं- मौलाना असगर मिस्बाही

मौलाना असगर मिस्बाही ने असम के मुख्यमंत्री के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस प्रकार की बातें सामने आ रही हैं, उससे यह साफ प्रतीत होता है कि यह कानून इस्लाम विरोधी सोच के तहत लाया जा रहा है. मौलाना ने कहा कि मुसलमान शरीयत के दायरे में रहकर जिंदगी गुजारता है और किसी भी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके धार्मिक सिद्धांतों के विपरीत हो.

वंदे मातरम् पर एतराज नहीं- मौलाना असगर मिस्बाही

वंदे मातरम को लेकर पूछे गए सवाल पर मौलाना असगर मिस्बाही ने कहा कि “किसी को वंदे मातरम पढ़ना है तो पढ़े, बोलना है तो बोले, हमें उससे कोई एतराज नहीं है. लेकिन मुसलमानों को इसे पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी अपने फैसलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि किसी नागरिक को वंदे मातरम गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

अमन चैन सबसे ज्यादा जरूरी- मौलाना

मौलाना ने कहा कि वंदे मातरम में देवी-देवताओं का उल्लेख है और वतन को मां का दर्जा दिया गया है, जबकि इस्लाम में इबादत केवल अल्लाह की मानी जाती है. इसी कारण यह इस्लामिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं है. हालांकि मौलाना ने कहा कि देश में अमन-चैन, भाईचारा और आपसी सौहार्द बना रहना सबसे जरूरी है.

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