ब्रज में होली की धूम; गोकुल में गोपियों ने बरसाईं छड़ियां, दुल्हन की तरह सजकर छड़ीमार होली खेली
ब्रज में होली का उल्लास छाया हुआ है. गोकुल में छड़ीमार होली का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 1, 2026 at 11:30 AM IST
|Updated : March 1, 2026 at 5:30 PM IST
मथुरा: मथुरा : भगवान श्री कृष्ण की क्रीड़ा स्थली गोकुल में रविवार को छड़ीमार होली हर्षोल्लास के साथ खेली गई. बाल स्वरूप कृष्ण भगवान ने गोपिकाओं के साथ होली का आनंद लिया. रंग-गुलाल और टेसू के फूलों से जमकर होली खेली गई. रसिया गीतों पर गोपिकाओं ने नृत्य किया. ढोल नगाड़े और बैंड बाजे के साथ ठाकुरजी की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई. दूर दराज और विदेश से आए लोग भी होली के गीतों पर जमकर नाचे.
गोकुल कस्बे के प्राचीन मंदिर गोकुल नाथजी के मंदिर से पालकी में बिठाकर ठाकुरजी की शोभा यात्रा निकाली गई. शोभा यात्रा अनेक मार्गों से होते हुए मुरलीधर घाट पर पहुंची और गोपिकाओं के साथ बाल स्वरूप कृष्ण ने छड़ीमार होली खेली. टेसू के फूलों से बने रंग गुलाल के साथ होली का श्रद्धालुओं ने अद्भुत आनंद लिया.
कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति : छड़ीमार होली के आयोजन के दौरान गोकुल कस्बे में अनेक स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. राधा कृष्ण की प्रस्तुति कलाकारों ने पेश की, तो वहीं रसिया गीतों पर श्रद्धालु भी जमकर नाचे. उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और पर्यटन विभाग द्वारा रंग उत्सव 2026 के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम कराए गए हैं.

ब्रज में 40 दिन खेली जाती है होली : पूरे देश में होली एक दिन ही खेली जाती है, लेकिन पूरे ब्रजमंडल में होली का पर्व 40 दिनों तक धूमधाम के साथ मनाया जाता है. बसंत पंचमी के दिन से ब्रज में होली की शुरुआत हो जाती है और फागुन के आखिरी दिन होली का समापन होता है. ब्रज में फूलों की होली, लड्डुओं की होली, लठ्ठमार होली, रंग और गुलाल की होली विश्व प्रसिद्ध है. होली खेलने और देखने के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं.

इस पल का रहता है इंतजार : गोपिका दीपा शर्मा ने बताया, आज मैं पहली बार होली खेल रही हूं. इस दिन का काफी दिनों से इंतजार रहता है. आज गोकुल में ठाकुरजी के साथ छड़ी मार होली खेली गई. क्योंकि ठाकुरजी का बाल स्वरूप गोकुल में बिता था, इसीलिए उनके साथ छड़ी लेकर होली खेली जाती है.

12 साल से यहीं खेल रहीं हूं होली : गोपिका हेमलता ने बताया, आज हम भगवान के साथ छड़ी मार होली खेल रहे हैं. गोकुल में उनका छोटा सा स्वरूप है. बालक के समान इसलिए उनको प्रेम के साथ छड़ी मार होली खेलते हैं, क्योंकि भगवान नटखट के रूप में यहां आए थे और कई लीलाएं की थी. मैं करीब 12 साल से होली यहीं खेलती आ रही हूं.

20 लाख से अधिक श्रद्धालु ब्रज में आ चुके: विश्व प्रसिद्ध होली खेलने के लिए 10 लाख से अधिक श्रद्धालु बरसाना पहुंचे हैं. नंद गांव में लठ्ठमार होली खेली गई थी. श्री कृष्ण जन्म स्थान और बांके बिहारी मंदिर में हर रोज होली खेली जा रही है. होली के उत्सव में 20 लाख से अधिक श्रद्धालु जनपद के मंदिरों में होली खेल चुके हैं.

प्रशासन ने किए खास इंतजाम: जनपद में होली के रंग उत्सव को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. वाहन पार्किंग के लिए अतिरिक्त पार्किंग की व्यवस्थाएं की गई है. दूर दराज से आ रहे श्रद्धालुओं के लिए बेहतर मंदिरों में दर्शन हो सके उसके लिए व्यवस्था की गई है. होली खेलने के लिए श्रद्धालु अद्भुत आनंद ले रहे हैं.

