ETV Bharat / state

EXPLAINER: छत्तीसगढ़ में क्या है मातृ और शिशु मृत्यु दर, सरकार ने उठाए क्या-क्या कदम, जानिए पूरे आंकड़े

मां और नवजात को बचाने के लिए सरकार ने कौन-कौन से कदम उठाए, उनका असर कितना दिखाई दे रहा है, संवाददाता प्रवीण सिंह की रिपोर्ट

EXPLAINER REPORT ON IMR MMR
EXPLAINER: छत्तीसगढ़ में क्या है मातृ और शिशु मृत्यु दर (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
author img

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : August 19, 2026 at 7:13 PM IST

8 Min Read
Choose ETV Bharat

रायपुर: मां और नवजात की सुरक्षित जिंदगी किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी कसौटी होती है. छत्तीसगढ़ में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए सरकार लगातार योजनाओं से लेकर अस्पतालों की सुविधाओं तक कई स्तरों पर काम करने का दावा कर रही है. लेकिन सवाल यह है कि इन कोशिशों का जमीनी असर कितना हुआ? पिछले कुछ वर्षों में मृत्यु दर का ग्राफ किस दिशा में गया, अस्पतालों में प्रसव और नवजात देखभाल के लिए क्या इंतजाम किए गए और सरकार के प्रयास कितने कारगर साबित हुए?

विधानसभा के मानसून सत्र 2026 में दिए गए सरकारी जवाब और उसके साथ लगाए गए आंकड़े इन सवालों पर एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं. सरकारी दस्तावेज के मुताबिक मातृ मृत्यु दर में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है, जबकि शिशु मृत्यु दर में सुधार अपेक्षाकृत सीमित रहा है. साथ ही नवजात गहन चिकित्सा इकाइयों यानी NICU में मृत्यु दर के आंकड़े यह बताते हैं कि कुछ वर्षों में सुधार हुआ, लेकिन अलग.अलग अस्पतालों के बीच काफी अंतर भी मौजूद है. ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मृत्यु दर कितनी घटी, बल्कि यह भी है कि मां और नवजात को बचाने के लिए सरकार ने कौन-कौन से कदम उठाए और उनका असर कितना दिखाई दे रहा है.

EXPLAINER REPORT ON IMR MMR
जन्म दर और प्रजनन दर में क्या बदलाव आया (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

मातृ मृत्यु दर में 22 अंकों की गिरावट

विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में मातृ मृत्यु दर वर्ष 2023-24 में 146 प्रति लाख जीवित जन्म थी. 2024-25 में यह घटकर 124 हो गई. इसके बाद 2025-26 में भी यह 124 रही और 15 जून 2026 की स्थिति में भी मातृ मृत्यु दर 124 ही दर्ज की गई है.

यानी 2023-24 की तुलना में प्रदेश की मातृ मृत्यु दर में 22 अंकों की कमी आई है. यह स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए निश्चित तौर पर सकारात्मक संकेत है, लेकिन एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 2024-25 में गिरावट के बाद अगले दो वर्षों में यह दर आगे नहीं घटी और 124 पर स्थिर रही. यानी मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में शुरुआती सुधार तो दिखाई देता है, लेकिन अब इसे और नीचे लाने की चुनौती बनी हुई है.

EXPLAINER REPORT ON IMR MMR
मातृ मृत्यु दर में 22 अंकों की गिरावट लेकिन अब इसे और नीचे लाने की चुनौती (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

शिशु मृत्यु दर में मामूली सुधार

शिशु मृत्यु दर की तस्वीर देखें तो वर्ष 2023-24 में यह 37 प्रति हजार जीवित जन्म थी. 2024-25 में यह घटकर 36 हुई और 2025-26 में भी 36 ही रही. 15 जून 2026 की स्थिति में भी शिशु मृत्यु दर 36 प्रति हजार जीवित जन्म दर्ज की गई है. इसका मतलब है कि तीन साल की अवधि में शिशु मृत्यु दर में केवल एक अंक की कमी आई है और उसके बाद इसमें कोई और गिरावट दर्ज नहीं हुई.

जन्म दर और प्रजनन दर में क्या बदलाव आया?

विधानसभा में दिए गए जवाब में जन्म दर और कुल प्रजनन दर के आंकड़े भी सामने रखे गए हैं. जन्म दर वर्ष 2023-24 में 22.3 प्रति हजार आबादी थी, जो 2024-25 में घटकर 22.2 हुई. 2025-26 में भी यह 22.2 रही और 15 जून 2026 की स्थिति में भी यही आंकड़ा दर्ज है.

यानी जन्म दर में मामूली कमी के बाद यह लगभग स्थिर बनी हुई है. कुल प्रजनन दर यानी TFR की बात करें तो NFHS.6 के अनुसार प्रदेश में यह 1.9 है. 2023-24, 2024-25, 2025-26 और 15 जून 2026 की स्थिति में भी TFR 1.9 ही बताया गया है. सरकार के मुताबिक यह रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से 0.2 कम है.

परिवार नियोजन और सुरक्षित अंतर पर जोर

सरकार ने कम प्रजनन दर के पीछे परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों के प्रति जनसामान्य में बढ़ती जागरूकता, शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में गर्भनिरोधक साधनों की पर्याप्त उपलब्धता और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ क्रियान्वयन को प्रमुख कारण बताया है. सरकार का कहना है कि जनसंख्या स्थिरीकरण, जनसंख्या नियंत्रण और जन्मों के बीच सुरक्षित अंतर सुनिश्चित करने के लिए लगातार जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. अनैच्छिक गर्भधारण की रोकथाम और बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त एवं सुरक्षित अंतर बनाए रखना भी इन कार्यक्रमों का हिस्सा है. इन प्रयासों का उद्देश्य केवल प्रजनन दर को कम करना नहीं, बल्कि स्वस्थ शिशुओं का जन्म, मातृ स्वास्थ्य में सुधार और जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्यों को हासिल करना बताया गया है.

चार शासकीय मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों में NICU

नवजात बच्चों को गंभीर स्थिति में बेहतर इलाज देने के लिए नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट यानी NICU की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने बताया था कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत संचालित 10 शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय चिकित्सालयों में से 15 जून 2026 की स्थिति में चार में NICU संचालित हैं. इनमें रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव शामिल हैं. सरकार के अनुसार इन NICU के लिए अलग से कोई अलग सेटअप स्वीकृत नहीं है. अस्पताल की आवश्यकता और NMC मानकों के अनुसार सेटअप को स्वीकृति दी जाती है. सरकार ने यह भी बताया है कि आदर्श ICU व्यवस्था के लिए नर्सिंग कैडर और IPHS और NQAS के मानकों के अनुसार व्यवस्था निर्धारित की जाती है.

NICU में मृत्यु दर के आंकड़े क्या बताते हैं

इन चार मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों में NICU की शिशु मृत्यु दर का प्रतिशत दिया गया है.

वर्ष रायपुर बिलासपुर रायगढ़ राजनांदगांव औसत
2023-24 7.30% 21.38% 12.60% 17.56% 14.71%
2024-25 6.60% 19.17% 13.90% 16.22% 13.97%
2025-26 5.90% 13.77% 14.70% 11.39% 11.44%
2026.27 (15 जून तक) 6.00% 16.32%14.30%13.50% 12.53%

इन आंकड़ों में सबसे पहले औसत पर नजर डालें तो 2023-24 में NICU की औसत मृत्यु दर 14.71 प्रतिशत थी. यह घटकर 2024-25 में 13.97 और 2025-26 में 11.44 प्रतिशत हुई. लेकिन 15 जून 2026 की स्थिति में यह फिर बढ़कर 12.53 प्रतिशत हो गई.

मातृ मृत्यु रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयास

सरकार ने मातृ मृत्यु रोकने के लिए गर्भावस्था से लेकर प्रसव और प्रसव के बाद तक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात कही है. इसके तहत मातृ मृत्यु के मामलों का ऑडिट, गर्भवती महिलाओं में एनीमिया प्रबंधन, कैल्शियम सप्लीमेंटेशन, प्रसव के दौरान Partograph के इस्तेमाल और प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की निगरानी जैसी व्यवस्थाओं का जिक्र किया गया है.

गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग और रेफरल व्यवस्था

गर्भवती महिलाओं की संभावित प्रसव तिथि यानी EDD के आधार पर सूची तैयार कर उनके फॉलोअप की व्यवस्था बताई गई है. इसके लिए 108 संजीवनी एक्सप्रेस, 102 महतारी एक्सप्रेस और 104 आरोग्य सेवा जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है.

SUMAN के जरिए सुरक्षित मातृत्व पर जोर

सरकार ने सुरक्षित मातृत्व आश्वासन यानी SUMAN कार्यक्रम का भी उल्लेख किया है. इसके तहत गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव के बाद मुफ्त एवं सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य है. इसमें आवश्यक दवाइयां, एंबुलेंस और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं. नवजात को भी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है.

संस्थागत प्रसव पर जोर

मातृ और नवजात मृत्यु कम करने के लिए संस्थागत प्रसव को महत्वपूर्ण माना गया है. सरकार के स्वास्थ्य संबंधी परिणाम बजट में उप स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों के माध्यम से संस्थागत प्रसव को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था.

मितानिन और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था

ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की पहली कड़ी के रूप में मितानिनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. सरकारी दस्तावेज में प्रदेश की करीब 72 हजार मितानिनों के लिए दवा पेटी योजना का उल्लेख है.

आंकड़ों के अनुसार यह रही तस्वीर

सरकारी आंकड़ों को एक साथ रखने पर तस्वीर यह बनती है कि मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन शिशु मृत्यु दर में सुधार की गति काफी धीमी है. मातृ मृत्यु दर 146 से घटकर 124 हुई, लेकिन इसके बाद यह 124 पर स्थिर है. शिशु मृत्यु दर 37 से घटकर 36 हुई, लेकिन उसके बाद 36 पर ही बनी हुई है. NICU के आंकड़े भी यही बताते हैं कि व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश और संभावना दोनों मौजूद हैं. चार संस्थानों का औसत 14.71 प्रतिशत से घटकर 11.44 प्रतिशत तक आया, लेकिन 15 जून 2026 की स्थिति में यह 12.53 प्रतिशत हो गया.

EXPLAINER: छत्तीसगढ़ की बहादुर महिलाएं, जिनसे घबराते थे अंग्रेज, आजादी की लड़ाई में रायपुर से बस्तर तक वीरांगनाओं ने लिखी साहस की कहानी
Explainer : महिला जनप्रतिनिधियों के परिवार राज पर रोक, फैसले का क्या होगा असर, मजबूत होंगी महिलाएं या बढ़ेंगी मुश्किल
EXPLAINER: 90 विधायकों में कौन Gen Z, छत्तीसगढ़ विधानसभा में युवा बनाम अनुभव का पूरा गणित