खजुराहो का अनूठा मंदिर, जहां हर साल बढ़ रही शिवलिंग की लंबाई, कलयुग का अंत से जुड़ा है कनेक्शन
खजुराहो के मतंगेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी हैं कई मान्यताएं. कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण एक चमत्कारी मणि के ऊपर कराया गया है. मनोज सोनी की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 24, 2026 at 4:47 PM IST
छतरपुर: यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल खजुराहो के मतंगेश्वर महादेव मंदिर में सावन के आखिरी सोमवार को श्रद्दालुओं का तांता लगा रहा. लोगों के बीच इस मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं और रहस्य प्रचलित हैं. कहा जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग हर साल तिल के समान बढ़ता है और यह जमीन के नौ फीट ऊपर तथा नौ फीट नीचे स्थित है.
मंदिर में भगवान कार्तिकेय को प्रथम भोग लगाने की विशेष परंपरा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव द्वारा युधिष्ठिर को दी गई मरकत मणि मतंग ऋषि के पास पहुंची और इसे शिवलिंग के नीचे स्थापित किया गया. मान्यता है कि इस मंदिर में पूजन और जलाभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यहां भगवान कार्तिकेय को प्रथम भोग लगाने और माता पार्वती के चरण दबाकर आशीर्वाद लेने की विशेष परंपरा है.
हर साल शिवलिंग की बढ़ जाती है लंबाई
खजुराहो के चंदेलकालीन मतंगेश्वर महादेव के मंदिर की कई बातें अद्भुत हैं. इनमें से एक मान्यता कि मंदिर में मौजूद शिवलिंग की लंबाई हर साल शरद पूर्णिमा को एक इंच बढ़ जाती है. मंदिर में स्थित शिवलिंग जमीन के अंदर 9 फीट और उतना ही बाहर भी है. पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि भगवान शिव के पास एक मरकत मणि थी, जो मतंगेश्वर महादेव के शिवलिंग के नीचे आज भी मौजूद हैं.

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रहस्यमयी शिवलिंग है जीवित
मंदिर के पुजारियों का कहना है कि" मंगतेश्वर महादेव मंदिर बहुत प्राचीन मंदिर है, यह कई मायनों में खास है और करीब 1000 साल पुराना होगा. यहां मौजूद शिवलिंग रहस्यमयी है. इसे जीवित शिवलिंग के नाम से भी जाना जाता है. बता दें कि इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 2.5 मीटर और इसका व्यास 1.1 मीटर है. मान्यता है कि यह शिवलिंग नीचे पाताल लोक की ओर और ऊपर स्वर्गलोक की ओर बढ़ रहा है, जैसे ही यह पाताल लोक पहुंचेगा, तब कलयुग का अंत हो जाएगा."

सावन के आखिरी सोमवार बुन्देलखंड के छत्तरपुर स्थित खजुराहो के मणिधारी मतंगेश्वर मन्दिर में आस्था, भक्ति का सैलाब देखने को मिला. भोलेनाथ के दर्शन और जलअर्पण के लिए सुबह से ही भक्तों की लाइन शुरू हो गई थी. सुबह से ही "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयकारों से शिवालय गूंज उठा. श्रद्धालुओं ने बाबा मतंगेश्वर का जलाभिषेक कर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की.

खजुराहो सहित आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे
मान्यता है कि सावन में बाबा मतंगेश्वर के दर्शन-पूजन से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. जिसके चलते खजुराहो सहित आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे और पूरे दिन मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा.
सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खजुराहो नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) बसंत चतुर्वेदी के निर्देशन में शिवसागर तालाब के घाटों की विशेष साफ-सफाई कराई गई, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान एवं आवागमन में सुविधा मिल सकें. मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने में पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है.
श्रद्धालु विष्णुपाल अवस्थी कहते हैं, यह मणिधारी शिवमंदिर है, जो भी मांगो मिलता है. भोलेनाथ की महिमा निराली है. खजुराहो नगर परिषद के CMO बसंत चतुर्वेदी कहते हैं "आज सावन का आखिरी सोमवार है. मंदिर में भक्तों की भीड़ ज्यादा होती है. जिसको लेकर सुरक्षा व्यवस्था के साथ साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान रखा गया है. नगरपालिका की टीम मौजूद है."

