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48 घंटे बिना हिले-डुले छत पर लेटे रहे, आतंकी आए तो पल में ठोक दिया, पैंटागन में दिया लेक्चर, ऐसे थे इंडियन आर्मी के रैंबो मेजर सुधीर

शहीद मेजर सुधीर वालिया हिमाचल प्रदेश के पालमपुर के बनूड़ी से थे. वर्ष 1990 में वे भारतीय सेना की पैरा एसएफ का हिस्सा बने.

Major Sudhir Walia Birth Anniversary
शहीद मेजर सुधीर वालिया (FB @SukhvinderSinghSukhu)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : May 24, 2026 at 3:04 PM IST

6 Min Read
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शिमला: पैरा एसएफ भारतीय सेना की अजेय परंपरा है. इसी एसएफ यूनिट के कर्नल हेमोंटो पैंगिंग नाइन पैरा एसएफ के मेजर सुधीर वालिया को याद करते हुए कहते हैं-मेजर सुधीर सर, भारतीय सेना के ब्रेवेस्ट ऑफ दि ब्रेव थे. उन्हें एक सूचना मिली थी कि एक दुकान में आतंकी आते हैं. मेजर सुधीर उस दुकान की छत्त पर बैठ गए. छत्त की सीलिंग पतली लकड़ी की थी. मेजर सुधीर सर 48 घंटे बिना हिले-डुले छत्त पर रहे ताकि किसी को भनक न लगे. यूरीन भी उन्होंने एक बॉटल में किया. जैसे ही आतंकी आए तो मेजर सुधीर ने छत्त की सीलिंग से ही तीन आतंकियों को ठोक दिया. कर्नल पैंगिंग के पास मेजर सुधीर वालिया की बहादुरी के कई किस्से हैं. वर्ष 1996 में अकेले मेजर सुधीर ने पांच में से तीन आतंकियों को मारा था. उन आतंकियों ने भारतीय सेना की घातक टुकड़ी पर हमला करके भारी नुकसान पहुंचाया था. उस ऑपरेशन में कर्नल पैंगिंग भी सुधीर वालिया के साथ थे.

खुद वीरता की देवी जिसकी शौर्य गाथा गाए, मां भारती के उस सपूत का नाम था मेजर सुधीर वालिया. भारतीय सेना का रैंबो, ब्रेवेस्ट ऑफ ब्रेव, लॉयन ऑफ इंडियन आर्मी जैसे अनेक नामों से अलंकृत भारत मां के इस वीर की कहानियां अभी भी सेना के पैरा एसएफ जवानों व अफसरों को रोमांचित करती है. मेजर सुधीर वालिया के शौर्य किस्सों से आज इंटरनेट की दुनिया भरी पड़ी है. गूगल या यू-ट्यूब पर सिर्फ मेजर सुधीर वालिया लिखें और आपके पास एक पल में सैंकड़ों कंटेंट आ जाते हैं. इन्हीं अमर बलिदानी मेजर सुधीर वालिया की आज जयंती है. यहां उनकी वीरता के कुछ किस्से दर्ज करना कृतज्ञ देश की आदरांजलि होगी.

Major Sudhir Walia
2 बार सेना मेडल से सम्मानित हुए थे शहीद मेजर सुधीर वालिया (Source- Instagram guts_glory_glamour)

2 बार सेना मेडल और अशोक चक्र से सम्मानित

मेजर सुधीर वालिया...रक्षा मंत्रालय का पन्ना खोलिए और उनके बारे में सर्च कीजिए. नाइन पैरा-एसएफ के रत्न अमर बलिदानी मेजर सुधीर वालिया पर जितना लिखा जाए उतना कम है. रैंबो नाम से उन पर कर्नल आशुतोष काले की पुस्तक मेजर वालिया के शौर्य किस्सों का संकलन है. जयश्री लक्ष्मीकांत की पुस्तक कुमार (सीडबलओएमएआर) में उनके जीवन के अनछुए पहलू हैं.

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ग्रुप के साथ मेजर सुधीर वालिया (Source- wordpressDikshank Sharma, The Rambo I Knew)

एनडीए खडक़वासला में उनके सम्मान और स्मृति में एक पोर्टेट स्थापित किया गया है. दो बार सेना मेडल और अशोक चक्र (बलिदान उपरांत) से सम्मानित मेजर सुधीर वालिया तत्कालीन भारतीय सेना के मुखिया जनरल वीपी मलिक के ओएसडी रहे. करगिल वार में जुलू टॉप पर कब्जा करने वाले मेजर सुधीर वालिया ने विजय दिवस के एक महीने बाद कश्मीर में एक ऑपरेशन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दे दिया. पैरा एसएफ में आने वाले हर भारतीय वीर के लिए मेजर सुधीर वालिया आदर्श हैं.

मेजर सुधीर वालिया हिमाचल प्रदेश के पालमपुर के बनूड़ी से थे. वे नाइन पैरा एसएफ यूनिट से थे. उन्होंने दो बार सियाचिन में सेवाएं दीं. वे करगिल युद्ध में जिद करके अपनी इच्छा से गए थे. वे उस समय भारतीय सेना के अध्यक्ष जनरल वीपी मलिक के ओसएडी थे. जनरल मलिक ने अपनी किताब में मेजर सुधीर वालिया पर खूब लिखा है. मेजर सुधीर वालिया भारतीय सेना के अकेले ऐसे अफसर थे, जो अमेरिका में अस्सी देशों के स्पेशल फोर्सिज के कमांडो के ट्रेनिंग प्रोग्राम में सर्वश्रेष्ठ चुने गए थे. उनकी अतुलनीय मेधा को देखते हुए अस्सी देशों के कोर्समेट उन्हें सम्मान से कर्नल कहते थे. कोर्स पूरा होने पर मेजर सुधीर वालिया को पैंटागन अमेरिका के सेना मुख्यालय में स्पीच देने का गौरव मिला था. ये वर्ष 1997क की बात है.

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पैंटागन में भाषण देते हुए मेजर सुधीर वालिया (Source- Reddit)

सुधीर को भगवान मानते हैं एसएफ वाले

भारतीय सेना की पैरा एसएफ यूनिट के मेजर विवेक जैकब मेजर सुधीर वालिया को याद करते हुए कहते हैं, "सुधीर सर को अफसर और जवान सभी भगवान मानते थे. ऑफिसर्स उन्हें बड़ा भाई कहते थे. जब भी अफसर व जवान बात करते वे सुधीर सर को किसी और ही डाइमेंशन के व्यक्ति मानते थे. ऐसे वीर, जिनसे खुद मौत भी डरती थी. सुधीर सर, जाट रेजिमेंट के हीरो थे. पैरा एसएफ के मेजर अभय सप्रू उन्हें किलिंग जैंटलमेन पुकारते हैं. खैर, मेजर सुधीर वालिया की ऐसी अनेक कहानिया पैरा एसएफ यूनिट में तैरती हैं."

सुधीर वालिया के पिता ने भी दी थीं सेना में सेवाएं

सुधीर वालिया का जन्म 24 मई 1968 को हुआ था. बचपन में ही भारतीय सेना से आकर्षित होकर सुधीर वालिया सैनिक स्कूल सुजानपुर में पढ़े. उनके पिता सूबेदार रूलिया राम वालिया ने भी देश की सेना में सेवाएं दी थी. ऐसे में घर में सेना से जुड़ा वातावरण रहा. स्कूलिंग पूरी करने के बाद वे एनडीए में सिलेक्ट हो गए. पहले ही प्रयास में उन्होंने परीक्षा पास कर ली. महज बीस साल की आयु में वे आईएमए से पास आउट हुए. वे भारतीय शांति सेना के साथ श्रीलंका में गए. वहां उन्होंने पैरा एसएफ के प्रति आकर्षण अपने भीतर पाया. वर्ष 1990 में वे भारतीय सेना की पैरा एसएफ का हिस्सा बने.

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अपनी माता के साथ मेजर सुधीर वालिया (Source- X @IndianDefenceFacts)

मेजर सुधीर वालिया के शौर्य की कहानियां अनेक हैं. उसके लिए पाठक इंटरनेट का सहारा ले सकते हैं. यहां ईटीवी भारत हिमाचल व देश की माटी के लाल को उनकी जयंती पर कृतज्ञता अर्पित करता है. वर्ष 1999 में अगस्त महीने में हफुरदा के जंगलों में आतंकियों का सफाया करते हुए मेजर सुधीर वालिया ने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया. मां भारती का ये वीर सपूत इस समय परमसत्ता की गोद में विश्राम पा रहा है.

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