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शहादत के एक साल बाद भी नहीं मिला सम्मान, कुर्थला के शहीद अग्निवीर समय सिंह के परिजन कर रहे स्कूल के नामकरण का इंतजार

नूंह में शहादत के एक साल बाद भी शहीद अग्निवीर समय सिंह को सम्मान नहीं मिला. परिजनों के के मुताबिक आर्थिक मदद भी नहीं मिली.

MARTYR AGNIVEER SAMAY SINGH
MARTYR AGNIVEER SAMAY SINGH (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 16, 2026 at 8:51 AM IST

3 Min Read
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नूंह: कुर्थला गांव के शहीद अग्निवीर समय सिंह को देश की सेवा करते हुए बीते साल 5 अगस्त को शहादत मिली थी, लेकिन उनके परिवार की मांग आज भी पूरी नहीं हो सकी है. 19 वर्षीय समय सिंह राजपूताना राइफल्स में अग्निवीर थे. उत्तराखंड के हर्षिल में बादल फटने के बाद राहत एवं बचाव कार्य के दौरान वो शहीद हो गए थे. उनका शव 65 दिन बाद गत 11 अक्टूबर 2025 को मिला था और राजकीय सम्मान के साथ पैतृक गांव कुर्थला में अंतिम संस्कार किया गया था.

शहीद को नहीं मिला सम्मान: शहीद की शहादत के बाद परिवार और ग्रामीणों ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुर्थला का नामकरण अग्निवीर समय सिंह के नाम पर करने और शहीद की बहनों की आर्थिक मदद की भी गुहार लगाई गई थी. जिला प्रशासन और सरकार की ओर से उस समय आश्वासन दिया गया था. मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर दस्तावेज सौंपे गए. लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी न तो स्कूल का नामकरण हुआ और न ही आर्थिक मदद मिली.

शहादत के एक साल बाद भी नहीं मिला सम्मान (ETV Bharat)

परिजनों और ग्रामीणों में रोष: इस कारण शहीद के परिजनों और ग्रामीणों में रोष है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शहीद को याद करते हुए उनके पैतृक गांव में तिरंगा यात्रा भी निकाली गई. इस मौके पर शहीद के पिता ने कहा कि वे किसी बड़ी आर्थिक मांग के लिए नहीं लड़ रहे. उनकी एकमात्र मांग है कि उनके बेटे के नाम पर गांव के बड़े स्कूल का नामकरण हो, ताकि उसे सम्मान मिले.

शहीद समय सिंह के पिता भी आर्मी में थे: पिता खुद भी 17-18 साल तक सेना में रहकर देश की सेवा कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि उनके इकलौते बेटे ने 19 साल की उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया. ट्रेनिंग दिल्ली में हुई थी और पहली पोस्टिंग उत्तराखंड में मिली थी, जहां यह हादसा हुआ. शहीद के पिता ने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार में गांव और आसपास से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे. इससे उन्हें और दर्द हुआ.

स्कूल का नाम शही के नाम पर रखने की मांग: उन्होंने कहा कि इसी गांव की बेटी लेफ्टिनेंट किरण शेखावत भी शहीद हो चुकी हैं, जिनके नाम पर जिले में एक महाविद्यालय का नामकरण किया जा चुका है. ऐसे में उनके बेटे के सम्मान के लिए भी स्कूल का नामकरण होना चाहिए. परिजनों का कहना है कि वे पिछले एक साल से जिला प्रशासन के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं. परिवार में नौकरी के लिए कोई नहीं है और बेटियां हैं. यदि सरकार उनकी आर्थिक मदद कर दे तो अच्छा है, नहीं तो उन्हें सिर्फ सम्मान चाहिए. फिलहाल शहीद अग्निवीर समय सिंह का परिवार और पूरा गांव सरकार और प्रशासन से इस वादे को पूरा करने की उम्मीद लगाए बैठा है.

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