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झोलाछाप डॉक्टर के इंजेक्शन से गई महिला की जान, प्रत्यक्षदर्शियों ने लगाया आरोप, बिना पीएम हुआ अंतिम संस्कार

25 साल की गर्भवती महिला को मामूली सर्दी खांसी की शिकायत थी. आरोप है कि कथित डॉक्टर ने जो इंजेक्शन दिया, उससे उसकी मौत हुई.

DEATH FROM COLD AND COUGH
झोलाछाप डॉक्टर के इंजेक्शन से मौत का दावा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 28, 2026 at 4:54 PM IST

5 Min Read
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बलौदा बाजार: पलारी थाना इलाके के गांव छेरकाडीह में 25 साल की गर्भवती महिला की मौत इलाज के दौरान हो गई. कथित डॉक्टर के क्लिनिक में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि महिला की मौत, झोलाछाप डॉक्टर के इलाज की वजह से हुई. पीड़ित महिला सर्दी खांसी के इलाज के लिए कथित डॉक्टर के क्लीनिक पहुंच थी. महिला के परिवार वालों ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार कर दिया.

सर्दी खांसी का इलाज झोलाछाप डॉक्टर से कराना पड़ा महंगा

मृतका इंदु साहू को सर्दी-खांसी की शिकायत थी. गुरुवार को वह गांव में ही इलाज कराने कथित डॉक्टर जयंत साहू के पास पैदल पहुंची. परिजनों के अनुसार, जब वह पहली बार वहां गई तो डॉक्टर घर पर नहीं था, इसलिए वह वापस लौट आई. कुछ समय बाद जब जानकारी मिली कि वह आ गया है, तो इंदु दोबारा क्लिनिक पहुंची. कथित डॉक्टर का कहना है कि इंदु को सामान्य सर्दी-खांसी थी और वह करीब 15-20 मिनट तक क्लिनिक में रही. इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई. लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो महिला को इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी. महिला लगातार उल्टियां करने लगी, चंद मिनटों में ही महिला बेहोश हो गई.


इंजेक्शन लगाने के बाद बिगड़ी तबीयत: प्रत्यक्षदर्शी

गांववालों का कहना है, ''इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही मिनट बाद इंदु ने घबराहट की शिकायत की, उल्टी करने लगी. देखते ही देखते वह जमीन पर गिर गई. क्लिनिक में मौजूद लोग घबरा गए.'' कथित डॉक्टर जयंत साहू का दावा है, ''उसने बेहोश महिला को पानी पिलाया, जिससे वह कुछ क्षण के लिए होश में आई, लेकिन फिर दोबारा अचेत हो गई.'' हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उसे कौन-सी दवा दी गई थी, क्या मात्रा थी और क्या गर्भावस्था की जानकारी कथित डॉक्टर को थी.



अस्पताल पहुंचने से पहले मौत

जब इंदु काफी देर तक घर नहीं लौटी तो उसकी सास कांति साहू उसे ढूंढते हुए क्लिनिक पहुंची. वहां उन्होंने बहू को अपने पति की गोद में अचेत अवस्था में देखा. आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी ले जाया गया. अस्पताल पहुंचने पर ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि महिला की मौत अस्पताल लाने से पहले ही हो चुकी थी. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार दोपहर करीब 2 बजे शव लाया गया था. बीएमओ डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि महिला को अस्पताल लाने वालों में कथित डॉक्टर जयंत साहू भी शामिल था.



चार घंटे तक मंथन, फिर बिना पीएम ले गए शव

अस्पताल में करीब 4 घंटे तक परिजन आपस में चर्चा करते रहे. इस दौरान पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पर बात हुई. लेकिन अंततः शाम करीब 6 बजे परिजनों ने लिखित आवेदन देकर पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया. इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया और बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार कर दिया गया. यहीं से यह मामला और गंभीर हो गया. इस पूरे घटनाक्रम में अब तक थाना स्तर पर कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई. किसी प्रकार की आधिकारिक शिकायत भी सामने नहीं आई है.



पुलिस में रिपोर्ट भी नहीं हुई दर्ज

ग्रामीण इलाकों में बिना डिग्री के इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है. मामूली बीमारियों से लेकर गंभीर मामलों तक में ऐसे लोग इलाज करते नजर आते हैं. कई बार मरीजों की जान पर बन आती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सख्ती शायद ही कभी दिखती है.


प्रशासनिक चुप्पी भी सवालों के घेरे में

अब तक न तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान आया, न अवैध क्लिनिक पर कार्रवाई की जानकारी मिला. इंदु साहू की शादी को ज्यादा समय नहीं हुआ था. वह गर्भवती थी और परिवार में नए मेहमान के आने की स्वागत की तैयारी चल रही थी. लेकिन एक साधारण सर्दी-खांसी के इलाज ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया. गांव में शोक का माहौल है. परिजन अब भी सदमे में हैं.


क्या है कानून प्रक्रिया

बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार हो जाने से कानूनी प्रक्रिया जटिल हो गई है. अगर भविष्य में कोई शिकायत दर्ज होती है, तो साक्ष्यों की कमी बड़ी बाधा बन सकती है. कानून के जानकारों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में स्वतः संज्ञान लेकर जांच की जा सकती है, खासकर जब मामला संदिग्ध हो और मौत क्लिनिक में हुई हो.

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