Holi 2026 : पिंकसिटी में जमकर उड़ा गुलाल, कहीं चंग-ढाप तो कहीं डीजे की धुन पर थिरके युवा, विदेशी मेहमान भी रंगों से सराबोर
जयपुर में धुलंडी पर चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया, जौहरी बाजार और परकोटे की गलियां रंगों की बौछार से सराबोर रहीं.

Published : March 4, 2026 at 3:56 PM IST
जयपुर: छोटी काशी मंगलवार के रंगोत्सव के बाद बुधवार को और भी ज्यादा जोश के साथ रंगों में डूब गई. पिंकसिटी की हवा मल्टीकलर हो गई. चारदीवारी के चौड़े रास्ते में रंगोत्सव की बयार बही. कहीं चंग-ढाप तो कहीं डीजे की धुन पर युवा थिरकते नजर आए. शहर में सड़क से लेकर छतों तक गुलाल उड़ता रहा और हर गली में होली का हुड़दंग दिखाई दिया.
इस बार दो दिन रंगों से सराबोर रही छोटी काशी: छोटी काशी में इस बार रंगोत्सव दो दिन छाया रहा. मंगलवार को शुरू हुआ रंगों का सिलसिला बुधवार को और ज्यादा जोश, उमंग और जनसैलाब के साथ नजर आया. सुबह से ही चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया, जौहरी बाजार और परकोटे की गलियां रंगों की बौछार से सराबोर रहीं. पर्यटक भी इस उत्सव के आकर्षण से खुद को अलग नहीं रख सके. विदेशी मेहमानों पर भी गुलाल का रंग चढ़ा और उन्होंने स्थानीय युवाओं के साथ थिरकते हुए जश्न में भागीदारी निभाई.
इस मौके पर आराध्यदेव के दरबार में भी भक्तों का सैलाब उमड़ा. गोविंद देव जी मंदिर में धूप-झांकी में श्रद्धालुओं ने भगवान के साथ होली खेली. मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों की संख्या को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से मंगलवार जैसी व्यवस्था ही बुधवार को भी रखी गई.

मंदिर के बाहर भी श्रद्धालुओं ने जमकर रंग-गुलाल उड़ाते हुए होली के पारंपरिक गीतों पर ठाकुरजी को रिझाया. दोपहर में पट बंद होने के बाद भी श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहा. हालांकि बेरिकेडिंग की व्यवस्था से भीड़ एक स्थान पर एकत्रित नहीं हुई और श्रद्धालुओं को सहजता से दर्शन का अवसर मिला.
चौड़ा रास्ता की सड़कों पर रंग, रेंगते रहे वाहन: चारदीवारी में उमड़े जनसैलाब के कारण ट्रैफिक की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा. कई स्थानों पर यातायात को डायवर्ट किया गया. सुरक्षा व्यवस्था के बीच युवा बेफिक्र मस्ती में डूबे दिखे.

छतों से उड़ता गुलाल और सड़कों पर रंगों की धार ने पूरे इलाके को कार्निवाल में बदल दिया. यहां रंग, सेलिब्रेशन और मस्ती एक साथ नजर आई. हर चेहरा गुलाल से सराबोर और खुशियों से चमकता नजर आया. ऐसे में पिंकसिटी में होली एक बार फिर केवल पर्व नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और उत्साह का महोत्सव बन गई.

