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ITBP जवान की मां के हाथ काटे जाने के मामले में कई पेंच; अस्पताल की लापरवाही सामने आई

6 अफसरों की कमेटी के सामने हाथ का टेस्ट होगा, जिसमें ITBP का जवान भी मौजूद रहेगा.

ITBP जवान की मां के हाथ काटे जाने के मामले में कई पेंच.
ITBP जवान की मां के हाथ काटे जाने के मामले में कई पेंच. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : June 3, 2026 at 11:03 AM IST

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कानपुर: ITBP जवान विकास की मां के हाथ काटे जाने के मामले में कृष्णा अस्पताल और पारस अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. अब जवान की मां के हाथ के लिए होने वाले हिस्टोपैथोलॉजी टेस्ट को लेकर कई पेंच फंस गए हैं.

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि हमें कोई अधिकार नहीं है कि हम किसी मरीज का हिस्टोपैथोलॉजी टेस्ट उस दशा में करा दें, जब एक हाथ का हिस्सा 16 दिनों से एक बॉक्स में बंद हैं.

एलएलआर अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग को 31 मई को बॉक्स मिला था. इस मामले में हम डीएम से अनुमति लेंगे. साथ ही 6 अफसरों की कमेटी के सामने उसका टेस्ट होगा, जिसमें ITBP का जवान भी मौजूद रहेगा.

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य का कहना है कि जवान की मां के हाथ काटे जाने के मामले में कृष्णा और पारस अस्पताल द्वारा जो इलाज मुहैया कराया गया, उसमें लापरवाही बरती गई. कृष्णा अस्पताल के निदेशक ऐश्वर्य गर्ग ने कहा वह अपना किसी तरह का कोई पक्ष नहीं रखना चाहते हैं. वहीं, जवान विकास ने कहा उनसे अभी तक किसी ने भी संपर्क नहीं किया है.

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कहा कि जिस दशा में ITBP जवान की मां का हाथ पहुंचा है, कहीं न कहीं उसके लिए कृष्णा और पारस अस्पताल के डॉक्टर्स की लापरवाही है. जब जवान की मां को हार्ट की दिक्कत थी, तो उसका इलाज होना चाहिए.

जिस थ्रेम्बोसिस की बात हाथ के लिए अपनाई गई, वह पूरी तरह से गलत है. अगर थ्रेम्बोसिस की समस्या होती तो वह पैरों में दिखती. हार्ट से पैर की नस सीधे जुड़ी होती है. अगर खून का थक्का बनता है, तो वह पैरों में दिखाई देता है. हाथ का किस तरह से इलाज किया गया, यह बहुत गंभीर विषय है.

प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कहा यह कोई सामान्य मामला नहीं है. कटे हुए हाथ की अगर नॉर्मल पैथोलॉजी जांच कराई गई, तो उसमें कुछ भी निकलकर सामने नहीं आएगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की लखनऊ से फोरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच कराई जानी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.

वहीं, मेडिकल कॉलेज में अब जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी बन रही है. इसमें एक न्यायिक अधिकारी, एक प्रशासनिक अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को शामिल किया जा रहा है. मेडिकल कॉलेज से डॉ. रोहित और डॉ. प्राची भी मौजूद रहेंगी.

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तय किया है स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की तरफ से जो बॉक्स उन्हें सौंपा गया है, उसे बंद कमरे में अकेले नहीं खोला जाएगा. जब मौके पर शिकायतकर्ता खुद मौजूद होंगे, तभी इस बॉक्स को खोला जाएगा.

इतना ही नहीं, बॉक्स खोलने से लेकर उसकी जांच शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया की बाकायदा वीडियोग्राफी कराई जाएगी, ताकि भविष्य में कोई सवाल न उठा सके.

मेडिकल कॉलेज को जांच आगे बढ़ाने के लिए अभी कुछ और दस्तावेजों की दरकार है. सामान्य पैथोलॉजी जांच के लिए कॉलेज को उन सभी पुरानी रिपोर्ट्स की जरूरत है, जिससे यह पता चल सके कि हाथ के किस खास हिस्से की हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच की जानी है.

इसके साथ ही, प्रशासन को उस डॉक्टर के नाम की भी तलाश है, जिसके नाम से यह पूरी रिपोर्ट तैयार होनी है. फिलहाल, न्याय की आस में बैठा जवान और सिस्टम की उलझी कड़ियां, दोनों ही इस कटी हुई कलाई के सच के सामने आने का इंतजार कर रहे हैं.

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