इंजीनियरिंग की कमी या फिर लापरवाही! हरिद्वार-देहरादून-ऋषिकेश हाईवे पर सड़क हादसों के खतरनाक प्वाइंट
हरिद्वार-देहरादून-ऋषिकेश हाईवे का एक हिस्सा सड़क हादसों का घर बनाता जा जा रहा है, जानिए कैसे? रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा-

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 22, 2026 at 8:47 PM IST
देहरादून: राजधानी देहरादून को हरिद्वार और ऋषिकेश को जोड़ने वाला हाईवे प्रदेश की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है. राजधानी आने वाला हर वाहन इसी मार्ग से गुजरता है, लेकिन डोईवाला से लेकर लच्छीवाला, मणिमाई मंदिर, लालतप्पड़, नुन्नावाला और आगे मोतीचूर फ्लाईओवर तक का हिस्सा पिछले कुछ समय से हादसों की ऐसी कहानी लिख रहा है, जिसमें सफर खत्म होने से पहले ही कई परिवारों की खुशियां उजड़ जा रही है.
कभी बेकाबू डंपर ने टोल प्लाजा पर कतार में खड़ी कारों को कुचल दिया तो कभी यात्रियों और बरातियों से भरी बस ब्रेक फेल होने के बाद डिवाइडर से जा टकराई. कहीं बस और ट्रैक्टर-ट्रॉली की भिड़ंत के बाद कई वाहन आग की चपेट में आ गए और कहीं सड़क किनारे खड़े भारी वाहन से टकराने के बाद कार सवारों की जान चली गई.
लच्छीवाला टोल प्लाजा पर टला बड़ा हादसा, टोल लेन में घुसा बेकाबू ट्रक @dmdehradun @DehradunPolice
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कुछ सवाल जो बार-बार खड़े हो रहे: सबसे चिंताजनक बात यह है कि हादसों की जगह और परिस्थितियां अलग होने के बावजूद उनके पीछे तेज रफ्तार, भारी वाहनों का दबाव, वाहन फिटनेस, ब्रेक-टायर की स्थिति, सड़क किनारे खड़े वाहन, टोल क्षेत्र की सुरक्षा और यातायात नियंत्रण जैसे सवाल बार-बार सामने आ रहे हैं.
19 अगस्त 2026 को हुई घटना: हाल ही में 19 अगस्त 2026 को देहरादून-हरिद्वार मार्ग पर मणिमाई मंदिर के पास हुए हादसे ने इस पूरे कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए. पुलिस के अनुसार देहरादून की ओर से आ रहे एक वाहन का पिछला टायर अचानक निकल गया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराया. पीछे से आ रही ईको वैन भी उससे भिड़ गई. दोनों वाहनों में कुल सात लोग सवार थे. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि चार लोगों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए. कुछ लोग टक्कर के दौरान वाहन से बाहर भी जा गिरे. इस हादसे की वजह तकनीकि खामी मानी जा रही है. तेज रफ्तार से पीछे से आ रही गाड़ी भी इसकी मुख्य वजह रही.

बेकाबू डंपर ने तीन कारों को मारी टक्कर, दो की मौत: 24 मार्च 2025 की सुबह लच्छीवाला टोल प्लाजा हादसों के इस हाईवे की सबसे भयावह तस्वीर सामने आई थी. देहरादून से हरिद्वार की ओर जा रहा खनन सामग्री से भरा डंपर टोल प्लाजा पर पहुंचते ही बेकाबू हो गया और कतार में खड़ी तीन कारों को टक्कर मार दी. एक कार डंपर और टोल प्लाजा के पोल के बीच बुरी तरह दब गई. इसमें टिहरी जिला न्यायालय के दो कर्मचारियों रतनमणि उनियाल और पंकज कुमार की मौत हो गई.
पुलिस ने उस वक्त बताया था कि डंपर के ब्रेक फेल से ये हादसा हुआ था. चालक को हिरासत में लिया गया था. सीसीटीवी फुटेज भी जांच का हिस्सा बनी थी. यह हादसा इसलिए सबसे ज्यादा चिंतित करता है, क्योंकि टोल प्लाजा ऐसी जगह होती है, जहां वाहन कतार में खड़े होते हैं और उनके पास अचानक आने वाले बेकाबू भारी वाहन से बचने के लिए बेहद सीमित जगह होती है. यानी जिस स्थान पर वाहनों की गति स्वाभाविक रूप से कम होनी चाहिए. वही स्थान भारी वाहन के बेकाबू होने मौत के जाल में बदल सकता है.

लच्छीवाला टोल पहली चेतावनी नहीं थी: लच्छीवाला टोल प्लाजा पर बेकाबू वाहनों के पहुंचने का सिलसिला केवल 2025 की घटना तक सीमित नहीं है. नवंबर 2024 में भी यात्रियों और बरातियों से भरी बसों के टोल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई थीं. एक घटना में बरातियों से भरी बस ब्रेक फेल होने के बाद टोल प्लाजा के डिवाइडर से जा टकराई. बस में करीब 30 लोग सवार थे, जिनमें 12 घायल हुए और एक की हालत गंभीर बताई गई थी. गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई.
इसी दौर में यात्रियों से भरी रोडवेज बस के टोल बैरियर के पोल से टकराने की घटना भी रिपोर्ट हुई थी. यानी टोल प्लाजा पर बसों के बेकाबू होने की घटनाएं कोई नई समस्या नहीं हैं. इन हादसों में किसी का जान नहीं गई. लेकिन इन्हें महज सामान्य सड़क दुर्घटना मानकर नजरअंदाज करना भी खतरे से खाली नहीं है. क्योंकि यही घटनाएं बताती हैं कि टोल क्षेत्र में वाहन बेकाबू होने की स्थिति में सुरक्षा कवच कितना प्रभावी है.

2021 में भी टोल के पास ट्रक और Volvo बस की टक्कर हुई थी: लच्छीवाला टोल प्लाजा के इतिहास में और पीछे जाएं तो भारी वाहन से जुड़ी दुर्घटना की समस्या और पुरानी दिखाई देती है. साल 2021 में टोल प्लाजा के पास बेकाबू ट्रक और Volvo बस की टक्कर की घटना सामने आई थी. उस समय भी भारी वाहन की रफ्तार और टोल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे. यानी 2021 से 2026 तक घटनाओं की कड़ी में बस, ट्रक, डंपर और अन्य भारी वाहन अलग-अलग परिस्थितियों में टोल क्षेत्र या उसके आसपास दुर्घटना का कारण बनते रहे हैं.
अब सवाल यही है कि वर्षों से सामने आ रहे इन संकेतों के बाद भी क्या टोल क्षेत्र की इंजीनियरिंग और सुरक्षा व्यवस्था में वह बदलाव हुआ, जो ऐसे हादसों को पूरी तरह रोक सके. क्योंकि 21 अगस्त 2026 फिर टोल प्लाजा पर बेकाबू ट्रक की वजह से बड़ा हादसा हो गया था. राहत की बात यह थी कि इस हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई. न ही किसी को गंभीर चोट आई. एक ही पॉइंट के आसपास बार-बार बड़े सड़क हादसे होने वहां की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है.

टोल प्लाजा से लेकर हाईवे किनारे तक खतरा एक जगह नहीं: इस मार्ग पर रोजाना सफर करने वाले संजीव ठाकुर कहते है कि लच्छीवाला टोल की समस्या को केवल टोल बूथ तक सीमित करके देखना भी सही नहीं होगा. मणिमाई मंदिर के पास 19 अगस्त को हुए हादसे ने दिखाया कि टोल क्षेत्र से कुछ दूरी पर सड़क किनारे खड़े भारी वाहन भी तेज गति से चल रहे वाहनों के लिए जानलेवा खतरा बन सकते हैं. इसलिए सड़क सुरक्षा की जांच सिर्फ टोल बैरियर बूथ या पोल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. टोल से पहले और बाद का पूरा हाइवे सड़क किनारे पार्किंग, खराब वाहन सर्विस लेन, कट, डिवाइडर, लाइड व्यवस्था और भारी वाहनों की आवाजाही सबका एक साथ सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए.

एक ही सवाल बेकाबू वाहन टोल तक पहुंचते कैसे हैं: लच्छीवाला की घटनाओं की टाइमलाइन एक सीधी कहानी कहती है कि
- 2021 में भारी वाहन और Volvo बस की टक्कर
- 2024 में बसों के डिवाइडर और टोल से टकराने की घटनाएं
- 2025 में डंपर का तीन कारों को टक्कर मारना और दो लोगों की मौत
- 2026 में टोल क्षेत्र में फिर भारी वाहन का अनियंत्रित होना
ये सभी घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन सवाल एक ही है कि अगर टोल प्लाजा से पहले वाहन की गति कम कराने के इंतजाम हैं तो बेकाबू भारी वाहन टोल लेन तक कैसे पहुंचते हैं. अगर भारी वाहनों के ब्रेक और फिटनेस की जांच होती है तो बार-बार तकनीकी खराबी की शिकायत क्यों सामने आती है और अगर टोल क्षेत्र में सुरक्षा मानक तय हैं तो दुर्घटना की स्थिति में कतार में खड़ी कारों को बचने के लिए पर्याप्त बफर जोन क्यों नहीं मिलता?
4 दिसंबर 2025 नुन्नावाला में बस-ट्रैक्टर भिड़े चालक की मौत: 4 दिसंबर 2025 को डोईवाला के नुन्नावाला गुरुद्वारे के पास रोडवेज बस और गन्ने से लदे ट्रैक्टर की भिड़ंत हुई. ये टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और एक व्यक्ति वाहन में फंस गया. राहत-बचाव दल ने काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला लेकिन बस चालक की जान नहीं बच सक. हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर धीमी गति से चलने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली और तेज गति से आने वाले यातायात के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया.
मोतीचूर फ्लाईओवर भी बना रहा हादसों का घर: इससे पहले 9 मार्च 2026 को रायवाला के मोतीचूर फ्लाईओवर पर रोडवेज बस और ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर के बाद पीछे आ रहे वाहन भी एक-दूसरे से भिड़ते चले गए. हादसे में कई वाहन आग की चपेट में आ गए और एक महिला की मौत हो गई थी. जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए. यह घटना इसलिए गंभीर थी, क्योंकि यहां तेज रफ्तार कई वाहन आपस में भिड़े थे.

एक तरह से देखा जाए तो मोतीचूर फ्लाईओवर पर भी आए दिन कोई न कोई हादसा हो ही रही है. फ्लाईवर के नजदीक रहने वाले कुणाल गोनियाल कहते है कि इस फ्लाईओवर पर ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब यहां सड़क हादसा न होता है. स्थानीय लोग तो फ्लाईओवर के लिए पूजा पाठ तक करवाने की सोच रहे है.
समस्या सिर्फ चालक की गलती मानकर खत्म नहीं की जा सकती. हर दुर्घटना के बाद तेज रफ्तार, लापरवाही या चालक की गलती को प्राथमिक कारण बताना आसान है, लेकिन सड़क सुरक्षा का वास्तविक समाधान इससे आगे जाता है. वाहन चालक की जिम्मेदारी अपनी जगह है, लेकिन सड़क की डिजाइन टोल की इंजीनियरिंग भारी वाहनों की फिटनेस, ब्रेक और टायरों की जांच, सड़क किनारे पार्किंग, रात में रोशनी और लेन ये सभी एक ही सुरक्षा तंत्र के हिस्से हैं. अगर इनमें से एक भी कड़ी कमजोर है तो हादसे की आशंका बनी रहती है. खासकर टोल प्लाजा पर जहां वाहन कतार में खड़े होते हैं. वहां पीछे से आने वाले भारी वाहन को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है.
क्या कहते है जिम्मेदार अधिकारी: एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ कहते है कि
बीते साल के कुछ हादसों के सबक लेते हुए कुछ तब्दीलिया की थी. उससे वाहनों की गति को कम हुई है. अधिकतर हादसे लोगों की लापरवाह से हो रहे है. दो दिन पहले हुआ हादसा भी इसीलिए हुआ, क्योंकि बड़ी गाड़ी के ब्रेक नहीं लग पा रहे थे. फिर भी हम मॉनिटरिंग करवा रहे है. अगर कुछ और करना होगा तो वो भी किया जायगा.
-सौरभ, प्रोजेक्ट डायरेक्टर-
वहीं देहरादून में लगातार बढ़ रहे हादसों को लेकर पुलिस का कहना है कि इस बारे में भी ईटीवी भारत ने देहरादून एसएसपी परमेन्द्र डोबाल से बात की. उनका कहा है कि
हमने इस मार्ग के मणिमाई के पास वाले हिस्से को ब्लैक सपोर्ट में जगह दी है. लगातार इस मार्ग पर हमारी पुलिस पेट्रोलिंग करती है और तेज गति से वाहनों को पकड़ती है और उन पर एक्शन भी लेती है. बड़े-बड़े साइन बोर्ड लगे है. सभी से अपील की जाती है कि सड़क पर उसी गति से चले, जिसे आप नियंत्रित कर सकतें है.
-प्रमेंद्र डोबाल, एसएसपी, देहरादून-
यदि सड़क हादसों पर लगाम लगानी है तो सबसे पहले लच्छीवाला से मोतीचूर तक गंभीर दुर्घटनाओं का रोड सेफ्टी ऑडिट होना चाहिए. टोल प्लाजा की इंजीनियरिंग की समीक्षा होनी चाहिए. भारी वाहनों की गति और फिटनेस पर निगरानी बढ़नी चाहिए. सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों पर सख्ती होनी चाहिए. सवाल अब यह नहीं होना चाहिए कि अगला हादसा कब होगा. सवाल यह होना चाहिए कि इतने हादसों के बाद भी अगला हादसा रोकने के लिए सिस्टम कब जागेगा. क्योंकि लच्छीवाला टोल और उससे आगे का यह पूरा हाईवे अब सिर्फ सफर का रास्ता नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा की परीक्षा बन चुका है.
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