ETV Bharat / state

शिवरात्रि महोत्सव में देवताओं ने पैगोडा शैली से किया किनारा, पारंपरिक स्थल पर हुए विराजमान

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में प्रशासन ने की नई पहल, लेकिन कई देवताओं ने नहीं अपनाई पैगोडा शैली.

International Shivratri Festival 2026
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 18, 2026 at 9:34 AM IST

|

Updated : February 18, 2026 at 11:07 AM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

मंडी: छोटी काशी मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान इस साल परंपरा और नवाचार का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. सात दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में जहां एक ओर प्रशासन द्वारा देवी-देवताओं के लिए बैठने की नई व्यवस्था की गई है. वहीं, दूसरी ओर कई देवताओं ने पौराणिक परंपराओं को प्राथमिकता देते हुए पारंपरिक स्थानों पर ही विराजमान होना उचित समझा है.

शिवरात्रि महोत्सव में कई देवताओं ने नहीं अपनाई पैगोडा शैली (ETV Bharat)

महोत्सव में आए 190 पंजीकृत देवी-देवता

इस बार अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में कुल 216 पंजीकृत देवी-देवताओं में से 190 देवी-देवताओं ने भाग लिया है. जिला प्रशासन और देवता समिति ने मिलकर पहली बार सभी पंजीकृत देवी-देवताओं के बैठने के लिए पैगोडा शैली में अस्थायी शिविरों का निर्माण कॉलेज ग्राउंड में करवाया. इसका उद्देश्य देवताओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और एकरूपता के साथ सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करना था.

पारंपरिक स्थानों पर विराजे 20 से ज्यादा देवी-देवता

हालांकि, 20 से ज्यादा देवी-देवताओं ने इस नई पैगोडा शैली की व्यवस्था को स्वीकार न करते हुए पौराणिक परंपरा को ही तरजीह दी. देव विष्णु मतलोड़ा, माता कश्मीरी, मडमाखन, देव गरल, भुजा ऋषि सहित सराज घाटी के कई देवता अपने पारंपरिक स्थानों पर ही विराजमान हैं. इन देवताओं के पुजारी और कारदारों का कहना है कि रियासत काल से जिस स्थान पर देवता विराजमान होते आए हैं, उसी परंपरा का निर्वहन इस बार भी किया गया है.

International Shivratri Festival 2026
पौराणिक परंपरा के अनुसार कॉलेज ग्राउंड में विराजमान हुए कई देवता (ETV Bharat)

"मंडी शिवरात्रि केवल एक मेला नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था और परंपराओं का प्रतीक है. ऐसे में परंपरागत नियमों और मान्यताओं का पालन करना आवश्यक है. राजा के समय से तय स्थानों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, जिसे बदला नहीं जा सकता." - देवता के पुजारी

मामले पर सर्व देवता सेवा समिति का रुख

वहीं, सर्व देवता सेवा समिति के पदाधिकारियों ने भी इस विषय पर संतुलित रुख अपनाया है. सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष शिवपाल शर्मा ने बताया कि पैगोडा शैली की व्यवस्था के लिए पहले सभी कारदारों से सहमति ली गई थी. इसके बावजूद जो देवी-देवता इस नई शैली में नहीं बैठना चाहते, उनके लिए कोई बाध्यता नहीं रखी गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे देवताओं के लिए पैगोडा शैली को खोल दिया जाएगा, ताकि वे अपनी परंपरा के अनुसार विराजमान हो सकें.

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में इस बार प्रशासन की नई पहल और देव समाज की परंपरागत आस्था दोनों का सम्मान किया जा रहा है. यही संतुलन छोटी काशी मंडी के इस ऐतिहासिक महोत्सव को विशेष बनाता है, जहां परंपरा और आधुनिक व्यवस्था साथ-साथ चलती नजर आ रही है.

ये भी पढ़ें: इस दिन मनाई जाएगी आमलकी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की सबसे सरल विधि
Last Updated : February 18, 2026 at 11:07 AM IST