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टूटी साइकिल से बना दी मक्का बोने की मशीन, 9वीं पास किसान ने कर दिया कांकेर में कमाल

जिस मैनुअल सीडर की मशीन की कीमत बाजार में 8 से 10 हजार है, उस मशीन को तापस ने 200 रुपए में तैयार कर दिया.

FARMER INVENTION
9वीं पास किसान ने कर दिया कांकेर में कमाल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : December 29, 2025 at 8:20 PM IST

6 Min Read
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कांकेर: कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है. इंसान को जब किसी चीज की सख्त जरुरत होती है, तब वह उस जरुरत को पूरी करने के लिए अपनी बुद्धि और ताकत दोनों का इस्तेमाल करता है. जब प्रयास सफल होता है, तो यही खोज या आविष्कार कहलाता है, जो हमारे जीवन को आसान बनाता है.

किसान का देशी जुगाड़ कर रहा कमाल

कांकेर जिले में एक छोटा सा गांव है परलकोट. गांव की आबादी बहुत ज्यादा नहीं है. यहां के ज्यादातर लोग खेती किसानी और मजदूरी पर ही आश्रित हैं. परलकोट इलाके के किसान ज्यादातर मक्के की खेती करते हैं. किसानों को बीज लगाने में काफी वक्त लगता है. मजदूर रखने पर मजदूरी भी ज्यादा आती है. चूंकि इलाके के ज्यादातर किसान गरीब हैं, लिहाजा मजदूर रखकर खेती करना सबके बस की बात नहीं है. इन्हीं सब समस्याओं को तापस मंडल ने जाना समझा और जुगाड़ तकनीक के जरिए नई मशीन बनाया.

कांकेर के किसान का कमाल (ETV BHARAT)

कबाड़ की साइकिल से बना दिया सीडर मशीन

मक्के की खेती करने वाले किसान कहते हैं कि मजदूरी देने के पैसे लोगों के पास नहीं हैं, ऐसे में खुद ही किसान को बीज लगाने पड़ते हैं. कई बार तो किसान का पूरा परिवार कई कई दिनों तक बीज ही बोता रहता है. ऐसे में घर का काम प्रभावित होता है. एक समय पर फसल नहीं लगने से फसल भी अच्छी नहीं होती है. किसानों की इन तमाम दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए, 9वीं पास किसान तापस मंडल ने कबाड़ की साइकिल से एक मशीन बना दी है. साइकल रुपी मशीन की मदद से किसान, एक दिन में कई एकड़ जमीन पर मक्का के बीज बो सकता है. इस मशीन को चलाने के लिए भी एक ही आदमी की जरुरत पड़ती है.

परलकोट के शारदानगर में रहते हैं किसान तापस मंडल

परलकोट के शारदानगर के रहने वाले तापस मंडल बताते हैं कि इलाके के ज्यादातर किसान गरीब तबके से आते हैं. इलाके में मक्के की अच्छी खेती होती है. इस लिहाज से ज्यादातर किसान मक्का लगाते हैं. मक्का लगाने में लोगों को मेहनत और लागत कम लगे, इसके लिए उन्होने एक मशीन का इजाद किया है. तापस बताते हैं कि मक्का बोने वाली इस मशीन को बनाने में कबाड़ हो चुकी साइकिल की मदद ली गई है. जुगाड़ तकनीक से बनी इस मशीन को चलाना और इससे काम लेना दोनों आसान है.

ओरिजनल मशीन की कीमत 8 से 10 हजार

किसान तापस बताते हैं कि बाजार में जो मक्का बोने की मशीन आती है, उसे मैनुअल सीडर कहते हैं. इस मशीन की कीमत यहां पर 8 से 10 हजार के बीच है. यहां के किसानों के पास उतना पैसा और खेती नहीं है कि वो मशीन खरीद सकें. ऐसे में उनकी तकलीफों को देखते हुए, मैंने ये जुगाड़ की मैनुअल सीडर मशीन तैयार की है.

200 रुपए में बना दी 10 हजार की सीडर मशीन

तापस मंडल कहते हैं, ''मशीन को बनाने से पहले उन्होने ओरिजिनल सीडर मशीन को करीब से काम करते हुए कई बार देखा. उसके काम करने के तरीके और उसकी इंजीनियरिंग को देखा और समझा. जब लगा कि मैं इस मशीन को जुगाड़ की मदद से बना सकता हूं, तब मैंने सीडर मशीन बनाने की ठानी.''

तापस मंडल कहते हैं कि ओरिजिनल मैनुअल सीडर मशीन 8 से 10 हजार के बीच आती है, लेकिन मैंने जुगाड़ की चीजों से इसका निर्माण महज 200 रुपए में कर लिया है. जुगाड़ की इस मशीन से काम बड़ी आसानी से होता है. बीज रखने के लिए मैंने इसके हैंडल में प्लास्टिक के डब्बे और तेल डालने वाली कीप का इस्तेमाल किया है. कीप की मदद से डिब्बे में बीज जाता है, डिब्बे से बीज पाइप के जरिए जमीन में पहुंचता है.

जुगाड़ तकनीक से फसल दमदार, मेहनत और लागत दोनों कम

तापस मंडल कहते हैं कि इस जुगाड़ की तकनीक की मदद से बीजों को एक लाइन में बड़ी आसानी से बोया जा सकता है. जमीन में एक ही गहराई में बीज को रखा जा सकता है. जुगाड़ की इस मशीन से बीज लगता जाता है और सिंचाई भी होती जाती है. एक निश्चित दूरी पर बीज का रोपण होने से पौधे अच्छे और मजबूत होते हैं. ऐसे में फसल भी अच्छी आती है.

दूसरे किसानों की तापस कर रहे मदद

जुगाड़ का सीडर मशीन बनाने वाले तापस कहते हैं, कई किसान उनसे मांगकर इस मशीन को बीज बोने के लिए ले जा चुके हैं. दूसरे किसान भी मशीन को देखकर और समझकर खुश हैं.

इस जुगाड़ के सीडर मशीन से समय और लागत दोनों की बचत होगी: तापस मंडल, किसान

किसानों का काम होगा आसान

तापस ये भी कहते हैं कि खेती किसानी के वक्त में मजदूर मिलना भी मुश्किल होता है. ऐसे में ये मशीन किसानों के काम आएगी.

मशीन तो मैंने बना दिया, लेकिन अब इसमें कई और फेरबदल कर इसे और बेहतर बनाया जा सकता है. 2 से ढाई हजार खर्च करने पर इस तरह की मशीन बड़े काम की साबित होगी. इस कीमत पर किसान भी इसे बना सकते हैं. उनका पांच से 7 हजार तक बच जाएगा-तापस

खुश हैं किसान

परलकोट के दूसरे किसान कहते हैं, अगर इस तरह के जुगाड़ आविष्कारों के लिए शासन से मदद मिले तो और भी इस तरह की मशीन लोग बना सकते हैं. ऐसे मशीनों की मदद से किसानों को खेती किसानी करना आसान हो जाएगा. गरीब और मध्यवर्गीय किसानों की मजदूर पर भी आत्मनिर्भरता कम हो जाएगी. किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन ज्यादा होगा तो किसान की आय अपनेआप बढ़ेगी.

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