लाइटें बुझी, अंधेरे गर्भगृह में दीपों से जगमगाए भगवान पशुपतिनाथ, महाकाल की तर्ज पर भव्य आरती
महाकाल मंदिर की तर्ज पर मंदसौर के भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में रात्रि कालीन दीप ज्योति आरती परंपरा की हुई शुरुआत, उमड़ा भक्तों का सैलाब. विनोद कुमार गौर की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 10, 2026 at 1:31 PM IST
|Updated : August 10, 2026 at 1:46 PM IST
मंदसौर: सावन के पवित्र महीने में मंदसौर स्थित भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के स्थान को और अधिक पवित्र बनाने के लिए इस साल से यहां महाकाल की तर्ज पर दीप ज्योति आरती की शुरुआत की गई है. प्रबंध समिति की मंजूरी के बाद मंदिर के पुजारियों ने रात्रि कालीन आरती की जगह इस दीप ज्योति आरती की शुरुआत की है. भोलेनाथ की इस आरती में रविवार की रात 11 बजे गर्भ गृह में पूरी तरह अंधेरा करते हुए केवल दीपक की रोशनी में ही प्रतिमा की 1 घंटे आरती की गई. इस परंपरा की शुरुआत से भक्तों में काफी खुशी का माहौल है.
महाकाल की तर्ज पर पशुपतिनाथ मंदिर में आरती
मंदसौर स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में रात में होने वाली शयन आरती को ही दीप ज्योति आरती का स्वरूप दिया गया है. प्रबंध समिति की मंजूरी के बाद यह आरती केवल सावन मास में रविवार और सोमवार की रात्रि में ही होगी. आरती से पहले भगवान की भव्य साढ़े 7 फीट ऊंची प्रतिमा को भस्म चढ़ाई गई. इसके बाद गर्भ गृह की तमाम लाइट बंद कर केवल दीपक की रोशनी में ही यह आरती हुई है.
अंधेरे में 1 घंटे हुई आरती
इस नई परंपरा की शुरुआत में ही इस नजारे के दर्शन के लिए यहां सैकड़ो की संख्या में भक्त मौजूद रहे. ढोल नगाड़े की गूंज के साथ करीब 1 घंटा तक भगवान भोलेनाथ की आरती होती रही. इस दौरान भक्त गण आनंद में झूमते नजर आए. मंदिर के प्रधान पुजारी राकेश भट्ट ने बताया कि सावन का पवित्र महीना चल रहा है और भगवान भोलेनाथ की पूजा के विशेष पूजन अर्चन का दौर भी जारी है. इसी कड़ी में प्रबंध समिति की मंजूरी के बाद भगवान भोलेनाथ को सावन महीने के रविवार और सोमवार की रात में शयन आरती को दीप ज्योति आरती का रूप देकर नई परंपरा की शुरुआत की गई है.''

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भव्य आरती देखने उमड़ा भक्तों का सैलाब
इस परंपरा में भगवान भोलेनाथ को पहले भस्म चढ़ाई जाती है. इसके बाद गर्भ ग्रह में किसी भी तरह की कृत्रिम रोशनी ना करते हुए केवल आरती के दीपक की रोशनी में ही उनकी आरती की जाती है. इसके बाद उन्हें शयन का विश्राम दिया जाता है. इसे धर्म के मुताबिक काफी पवित्र माना जाता है. उधर इसी परंपरा को देखने के लिए शहर के श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा.

आरती में सम्मिलित होने आए दर्शनार्थी रवि अग्रवाल ने बताया कि, ''यह परंपरा काफी अच्छी लगी और इसे देखने के लिए कई लोग एकत्रित हुए.'' उन्होंने कहा कि, ''भगवान महाकाल की तर्ज पर शुरू हुई यह परंपरा पशुपतिनाथ मंदिर में शुरू होने से भक्तों में काफी उत्साह का माहौल है.''

